Breaking News






Home / Breaking News / राष्ट्रीय एस सी कमीशन के सम्मुख पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर फिर दिल्ली तलब

राष्ट्रीय एस सी कमीशन के सम्मुख पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर फिर दिल्ली तलब

पटियाला (रफतार न्यूज संवाददाता) :  राष्ट्रीय अनुसूचित जातियां कमीशन (भारत सरकार) के चेयरमैन विजय सांपला की तरफ से पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के सीनियर दलित अधिकारी डा हरमिन्दर सिंह खोखर की तरफ से दायर की गई जाति आधारित भेदभाव के अंतर्गत तरक्की और बकाया तनख्वाह न देने की एक शिकायत के आधार पर कमीशन की तरफ से भेजे गए नोटिसों का जवाब न देने कारण पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो अरविन्द को 22 जून को निजी तौर पर कमीशन के नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था।
परंतु सुनवाई दौरान यूनिवर्सिटी के कुछ सीनियर अधिकारी उपस्थित हुए, जिनके द्वारा यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. अरविन्द की तरफ से उस दिन (22 जून) की सुनवाई दौरान व्यक्तिगत हाजरी से छूट माँगी गई। कमीशन के चेयरमैन सांपला की तरफ से 22 जून को कमीशन में उपस्थित हुए यूनिवर्सिटी के आधिकारियों की तरफ से पेश की गई दलीलों के साथ असहमत होते हुए यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर को 30 जून को निजी तौर पर ताजा एक्शन टेकन रिपोर्ट, केस डायरी और केस के साथ सम्बन्धित पूरे रिकार्ड समेत फिर दिल्ली तलब कर लिया है।
जिक्रयोग्य है कि पूर्व भारतीय सूचना सेवा अधिकारी डा हरमिन्दर सिंह खोखर की तरफ से कमीशन को भेजी गई शिकायत में कहा गया कि यूनिवर्सिटी की उच्च स्तरीय चयन समिति की तरफ से 2001 में उनको सहायक लोग संपर्क अफसर की अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित पक्की नौकरी पर नियुक्त करने के बावजूद, यूनिवर्सिटी की तरफ से साल 2003 में सहायक लोग संपर्क अधिकारी के एक पद को खत्म करते हुए उनको यूनिवर्सिटी सेवा से निवृत कर दिया।
डा खोखर के अनुसार उनकी तरफ से इस सम्बन्धित लड़ी गई कानूनी लड़ाई के चलते साल 2008 में यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती मानते हुए आरक्षित पद को पुनः बहाल करते हुए उनको बाइज्जत बहाल कर दिया, परन्तु जितना समय यूनिवर्सिटी की गलती के कारण वह नौकरी से बाहर रहे उस समय की बकाया तनख्वाह और 20 सालों की शानदार सेवाओं के बावजूद उन को एक भी तरक्की नहीं दी गई। जबकि उन के साथ ही यूनिवर्सिटी सेवा से भ्रष्टाचार और छात्राओं के शारिरक शोषण जैसे गंभीर दोषों के अंतर्गत बरखास्त किये गए जनरल कैटागिरी के ओर सभी कर्मचारियों को यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से पुरी तनख्वाहें और तरक्कियों के साथ सम्मानित किया गया।
डा खोखर अनुसार उन की तनख्वाह का बकाया सिर्फ 4लाख रुपए के करीब बनता है, परन्तु यूनिवर्सिटी के कुछ दलितविरोधी आधिकारियों की तरफ से उन के इस कानूनी हक को रोकनो के लिए वित्तीय घाटो में चल रही यूनिवर्सिटी का अब तक 10 लाख रुपया फूँका जा चुका है।
डा खोखर ने दोष लगाया कि इस से सम्बन्धित यूनिवर्सिटी सिंडिकेट की तरफ से 17 अगस्त, 2020 को हुई अपनी मीटिंग के दौरान उनको बकाया तनख्वाह और तरक्की देने के आदेश के बावजूद उन्हें बनते कानूनी लाभ नहीं दिए जा रहे। उनका दोष है कि उनके साथ यह भेदभाव अनुसूचित जाति के साथ सम्बन्धित होने के कारण किया जा रहा है।
डा खोखर ने कमीशन से माँग की है कि उनको भी जरनल कैटागरी कर्मचारियों की तरह, बिना किसी कसूर के नौकरी से बाहर रहने के समय की बनती बकाया तनख्वाह और तरक्की दी जाये। इसके इलावा पिछले 18 सालों से उनके साथ किये जा रहे जाति आधारित भेदभाव के दोषियों के विरुद्ध एस सी और एस टी एक्ट, 1989 के अंतर्गत पर्चा दर्ज करके तुंरत गिरफ्तार किया जाये।

About admin

Check Also

नवजोत सिद्धू बने पंजाब कांग्रेस के नये प्रधान, 4 कार्यकारी प्रधान होंगे, रफतार न्यूज की ख़बर पर एक बार फिर से मोहर

दिल्ली, 18 जुलाई (रफतार न्यूज ब्यूरो)ः रफतार न्यूज की ख़बर पर एक बार फिर से …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share