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अयोध्याः 10 साल से नहीं हो पा रहा था जिस जमीन का दाखिल-खारिज, राम मंदिर ट्रस्ट के खरीदते 1 महीने में हो गया, समझिए पूरी कहानी

अयोध्या (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो ) :
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जमीन खरीद को लेकर उठा विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौजूदा विवाद में नया पेच यह सामने आया है कि भूमि के जिस टुकड़े को लेकर ये पूरा विवाद है, दरअसल उस जमीन का बीते 10 सालों से दाखिल-खारिज नहीं हो पा रहा था लेकिन जैसे ही यह जमीन ट्रस्ट को बेची गई, मात्र 1 महीने के भीतर ही इसका दाखिल-ख़ारिज हो गया। विपक्ष पहले से ही इस मामले में दाल में कुछ काला होने की आशंका जताता आ रहा है। दाखिल-खारिज वाले प्रकरण में विपक्ष का मानना है कि यह सब मात्र एक संयोग नहीं है।

साल 2011 से 2021 का जमीन एग्रीमेंट

रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट पर लगे जमीन घोटाले के आरोप के बाद से हर जगह जमीन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हरीश पाठक और कुसुम पाठक की जमीन, जिसका एग्रीमेंट 2011 में मोहम्मद इरफान ( सुल्तान अंसारी के पिता) वा रवि मोहन और हरीश पाठक वा कुसुम पाठक के बीच हुआ था, उसका दाखिल खारिज उनके नाम पर नहीं हो पाया लेकिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पास आते ही वह जमीन ट्रस्ट के नाम पर दाखिल-खारिज हो गई।

क्या है पूरा मामला
जिस जमीन को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर आरोप लग रहे हैं, वह दरसअल हरीश पाठक वा कुसुम पाठक की थी। इसको उन्होंने 2011 में इरफान अंसारी वा रविमोहन तिवारी को बेच दिया। साल 2019 तक जमीन पर 9 मुकदमे दर्ज हुए। 17 सितंबर 2019 को सुल्तान अंसारी के पिता इरफान अंसारी और जितेंद्र सिंह बबलू के पिता इच्छा राम सिंह समेत 9 लोगों के साथ 2 करोड़ में एग्रीमेंट किया गया, लेकिन जब ट्रस्ट की ओर से यह जमीन खरीदी जाने लगी तो 9 लोगों के साथ किया गया यह एग्रीमेंट कैंसिल हो गया और नया एग्रीमेंट रवि मोहन तिवारी और इरफान अंसारी के बेटे सुल्तान अंसारी के साथ किया गया। जमीन को लेकर लग रहे आरोपों के बाद सुल्तान अंसारी ने एग्रीमेंट की बात साफ की। सुल्तान अंसारी का कहना है कि 4 मार्च 2011 को यह एग्रीमेंट उनके पिता इरफान अंसारी वा रविमोहान तिवारी से हरीश पाठक वा कुसुम पाठक के नाम से यह एग्रीमेंट हुआ था। उन्होंने बताया कि एग्रीमेंट के बाद इस जमीन पर कई मुकदमे थे, जिसकी वजह से जमीन बेची नहीं गई और जब जमीन का एग्रीमेंट ख़तम होने लगा तो 2014 में ये एग्रीमेंट उन्होंने रिन्यूवल करवाया। सुल्तान अंसारी का कहना है कि जमीन का विवाद वक़्फ़ बोर्ड से चल रहा था। लिखत रूप से बताया गया कि जमीन वक़्फ़ बोर्ड की नहीं है। साल 2014 में भी जब ये विवाद नहीं निपटा तो 2019 में दोबारा से उन्होंने एग्रीमेंट किया। 2011 में 1 करोड़ में ये सौदा हुआ था, जिसमें 10 लाख रुपए एडवांस के तौर पर दिए गए थे। साल 2019 में जमीन का एग्रीमेंट 2 करोड़ में हुआ, जिसमें 50 लाख रुपए एडवांस दिए गए थे। हरीश पाठक वा कुसुम पाठक लगातार 2011 से जमीन का सौदा कर रहे थे। फिर भी जमीन का दाखिल खारिज नहीं करवा पाए। अलग-अलग लोगों से एग्रीमेंट करवाने के बाद भी जमीन का एग्रीमेंट दाखिल-खारिज नहीं हो सका। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट क्षेत्र ने जिस जमीन को 18.50 करोड़ में खरीदा उस जमीन की कीमत सर्किल रेट के हिसाब से 5 करोड़ 79 लाख 84000 रुपए है। ट्रस्ट के द्वारा यह जमीन 3 गुना अधिक दामों में खरीदी गई है। ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन 3 गुना से भी ज्यादा कीमत पर खरीदी गई है।

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