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अधिकारियों को जल एवं वायु प्रदूषण और ठोस एवं प्लास्टिक वेस्ट के उचित प्रबंधन को यकीनी बनाने के निर्देश

चंडीगढ़, 8 जून (पीतांबर शर्मा) : पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन ने आज सभी विभागों को राज्य के पर्यावरण सम्बन्धी प्रमुख मसलों के हल के लिए ज़रुरी कदम उठाने और जल एवं वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ ही ठोस और प्लास्टिक वेस्ट के उचित प्रबंधन को यकीनी बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने मिशन तंदुरुस्त पंजाब के अंतर्गत राज्य को साफ़, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा महामारी की स्थिति में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि सभी विभाग राज्य के पर्यावरण के साथ जुड़े मुद्दों की तरफ ध्यान दें।
वह यहाँ राज्य में पर्यावरण योजना के अंतर्गत पराली जलाने को नियंत्रित करने सम्बन्धी कार्य योजना की प्रगति का जायज़ा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे।
कृषि विभाग ने बताया कि धान जैसी लम्बी अवधि वाली फसलों की जगह छोटी अवधि वाली विभिन्न किस्मों जैसे मक्का, कपास और बाग़बानी से सम्बन्धित अन्य फसलें लगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने सम्बन्धी सभी यत्न किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में फसलों के अवशेष के प्रबंधन के लिए मशीनरी मुहैया करवाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय को 880 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट भेजा गया है। पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी के नुमायंदों ने बताया कि 6 मैगावॉट क्षमता का बायोमास पावर प्रोजैक्ट मुकम्मल हो चुका है, जब कि 14 मैगावॉट क्षमता के दो बायोमास प्रोजैक्ट और 36.5 टीपीडी क्षमता के दो बायो सीएनजी प्रोजैक्ट निर्माण अधीन हैं और इस साल के अंत तक मुकम्मल होने की संभावना है। इसके साथ ही राज्य में धान की पराली में लगभग 8 मिलियन टन की कमी आएगी।
लुधियाना से सतलुज नदी में पानी के प्रदूषण को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विवरण देते हुए जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि सरहिन्द नहर से बुड्डा नाले में 200 क्यूसिक ताज़ा पानी छोडऩे का प्रोजैक्ट इस महीने के अंत तक पूरा हो जाएगा।
राज्य के विभिन्न कस्बों में स्थापित की जा रही 120 एसटीपीज़ की प्रगति का जायज़ा लेते हुए मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों को निर्देश दिए कि वह प्रोजैक्टों के काम को पूरा करने के लिए हरेक विभाग द्वारा दी गई समय-सीमा की सख़्ती से पालन करें।
भूमि और जल संरक्षण विभाग के नुमायंदो ने मीटिंग में बताया कि रामपुरा फूल, संगत और खन्ना शहरों में 38 एम.एल.डी. साफ किए गए गंदे पानी का पुन: प्रयोग के लिए सिंचाई नैटवर्क स्थापित करने का काम मुकम्मल हो गया है और किसानों ने साफ किए हुए पानी का इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारी ने मुख्य सचिव को बताया कि राज्य में छप्पड़ों के नवीनीकरण का काम 545 गाँवों में मुकम्मल हो चुका है और 638 गाँवों में यह काम प्रगति अधीन है।
मीटिंग के दौरान यह संकल्प लिया गया कि एक बार प्रयोग में आने वाले प्लास्टिक का निर्णय किया जाएगा और डिप्टी कमिश्नर और म्युनिसीपल कमिश्नर इसके निपटारे के लिए हर संभव यत्न करेंगे। इस मामले की समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर दो महीनों में एक बार की जाएगी।
9 नॉन-अटेनमैंट शहरों में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हुई प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि 114 इंडक्शन फर्नेस और 57 ईंट भट्टों ने साइड सक्शट हुड और इंड्यूस्ड ड्राफ्ट टैक्रोलॉजी को अपनाया है। इसके साथ ही 57 स्टील री-रोलिंग मिल्स से सी.एन.जी./पी.एन.जी. में तबदील हो गए हैं। इसके नतीजे के तौर पर मंडी गोबिन्दगढ़, खन्ना और लुधियाना में वायु प्रदूषण में काफ़ी कमी आई है।
डायरैक्टर पर्यावरण ने बताया कि राज्य ने विभिन्न रणनीतक स्थानों पर 10 कंटीन्यूस ऐंबीऐंट एयर क्वालिटी स्टेशन स्थापित करके अपने वायु गुणवत्ता निगरानी ढांचे को भी मज़बूत किया है।

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