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मुख्यमंत्री द्वारा मलेरकोटला का राज्य के 23वें जिले के तौर पर उद्घाटन, 548 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी

चंडीगढ़, 7 जून (पीतांबर शर्मा) : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को वर्चुअल ढंग से मलेरकोटला का राज्य के 23वें जिले के तौर पर उद्घाटन किया और इसके साथ ही ऐतिहासिक शहर के विकास के लिए 548 करोड़ रुपए के प्रोजैक्टों का नींव पत्थर रखा।
इस अवसर पर नए बनाए गए मलेरकोटला जिले में 100 अलग-अलग स्थानों पर एल.ई.डी. सक्रीनों के द्वारा कई विधायकों, म्यूनिसीपल कमेटियों के काऊंसलरों और गाँवों की पंचायतों के सरपंचों/पंचों ने सम्मिलन किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मलेरकोटला के नया जि़ला बनने से इस क्षेत्र के लोगों की काफी देर पुरानी माँग पूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहद समृद्ध विरासत वाले मलेरकोटला को काफ़ी समय पहले ही जि़ला बना दिया जाना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपने बीते कार्यकाल के दौरान 2005 में मलेरकोटला को जि़ला बनाए जाने का वादा किया था, परन्तु किसी कारण वह पूरा नहीं हो सका। बाद में अकाली भाजपा गठजोड़ सरकार ने अपने एक दहाई चले कार्यकाल के दौरान स्थानीय निवासियों की इस माँग को अनदेखा किया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि साल 2017 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने इस सम्बन्धी तैयारी करनी शुरू की, जिसके नतीजे के तौर पर इस वर्ष 14 मई को ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर औपचारिक ऐलान उनकी तरफ से किया गया।
अधिक जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मूलभूत तौर पर इस नए बने जिले में मलेरकोटला, अहमदगढ़ और सब-तहसील से दर्जा बढ़ाकर सब-डिविजऩ बनाए गए अमरगढ़ सब-डिवीजनों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जि़ला स्तर पर अस्थाई दफ़्तर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा जि़ला स्तर पर ही 12 विभागों के दफ़्तर जल्द ही चालू किए जाएंगे। जि़ला प्रशासनिक कॉम्पलैक्स और सब-डिविजऩल कॉम्पलैक्स का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जाएगा, जिसके लिए 20 करोड़ रुपए अलॉट कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मलेरकोटला के नया जि़ला बनने से क्षेत्र का समग्र विकास होगा, जिससे प्रशासन द्वारा लोगों को उनके घर तक सेवाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
शहर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसकी स्थापना साल 1454 में शेख सदरुद्दीन-ऐ-जहाँ द्वारा की गई थी, जोकि अफगानिस्तान से आए थे और इसके बाद बायज़ीद ख़ान द्वारा 1657 में मलेरकोटला रियासत स्थापित की गई थी। बाद में मलेरकोटला को अन्य शाही रियासतों के साथ मिलाकर पटियाला और ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन (पैप्सू) की सृजना की गई थी। 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के मौके पर मलेरकोटला रियासत पंजाब का हिस्सा बन गई थी।
सिख इतिहास में मलेरकोटला के ख़ास महत्व का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया भर में बसने वाले लोग ख़ासकर सिख, नवाब शेर मोहम्मद ख़ान की बहुत इज्जत करते हैं, जिन्होंने सरहिन्द के सूबेदार मंत्री ख़ान द्वारा ज़ुल्म की इंतहा करते हुए सिखों के दसवें गुरू गोबिंद सिंह जी पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह जी (9 साल) और बाबा फतेह सिंह जी (7 साल) को जीवित अवस्था में नींवों में चिनवा दिए जाने के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते हुए ‘हा दा नारा’ दिया था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके बाद श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने नवाब शेर मोहम्मद ख़ान को ‘श्री साहिब’ (तलवार) और ‘हुक्मनामा’ बख़्शीश किया था। सिखों के दसवें गुरू, गुरू गोबिंद सिंह जी पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने नवाब और मलेरकोटला के लोगों को आशीर्वाद दिया था कि यह शहर हमेशा अमन-शांति और ख़ुशी के साथ बसेगा। इसका सबूत इसी बात से मिलता है कि 1947 में बँटवारे के दंगों के दौरान मलेरकोटला रियासत में हिंसा की एक भी घटना नहीं घटी। उन्होंने आगे बताया कि इस शहर को सूफ़ी संत बाबा हैदर शेख का आशीर्वाद भी हासिल है, जिनकी यहाँ दरगाह स्थित है।
मुख्यमंत्री ने मलेरकोटला में जनवरी, 1872 में 66 नामधारी सिखों के बेमिसाल बलिदान को याद करते हुए कहा कि कूका शहीदों, जिनको बिना मुकदमे के बिर्टिश हुकूमत ने तोपों के साथ बांधकर उड़ा दिया था, की याद में 66 फुट लम्बा खंडा स्थापित किया गया है, जिसमें 66 बड़े और छोटे छेद हैं। बड़े छेद नौजवान शहीदों और छोटे छेद बाल शहीदों का प्रतीक हैं।
मलेरकोटला के उस समय के नवाब के साथ अपने अच्छे रिश्तों को याद करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि बचपन में अपने शहर में फेरीं के मौके पर वह नवाब साहिब को ‘चाचा जी’ और नवाब द्वारा उनको प्यार से ‘भतीज’ कहकर बुलाते थे।
बाद में मुख्यमंत्री ने नवाब शेर मोहम्मद ख़ान सरकारी मैडीकल कॉलेज मलेरकोटला का नींव पत्थर रखा, जिस पर 500 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा और इस सम्बन्धी 50 करोड़ रुपए की पहली किस्त मंज़ूर कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने मलेरकोटला में लड़कियों के सरकारी कॉलेज (12 करोड़ रुपए), नए बस स्टैंड (10 करोड़ रुपए) और महिला थाना के भी नींव पत्थर रखे। उन्होंने इस मौके पर शहरी वातावरण सुधार प्रोग्राम के अंतर्गत शहरी विकास यकीनी बनाने के लिए 6 करोड़ रुपए के अनुदान का ऐलान भी किया।
मलेरकोटला की सांस्कृतिक विरासत को और आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने द आगा ख़ान फाउंडेशन (यू.के.) द्वारा जारी पत्र के विवरण भी साझे किए, जोकि उनकी तरफ से फाउंडेशन को पहले लिखे पत्र का जवाब था, जिसमें उन्होंने मलेरकोटला के आखिरी नवाब इफ्तिखार अली ख़ान की पत्नी बेगम साहिबा मुनव्वर-उल-निसा की मल्कीयत वाले मुबारक मंजिल पैलेस की देख-रेख करने बाबत लिखा था। फाउंडेशन द्वारा इस प्रोजैकट के लिए हाँ की गई है और उसके प्रतिनिधि जल्द ही सम्बन्धित अथॉरिटी के साथ बातचीत करके इस काम की रूप-रेखा तैयार करेंगे।
जि़क्रयोग्य है कि पंजाब सरकार ने पहले ही मुबारक मंजिल पैलेस का अधिग्रहण कर लिया है और इसकी देख-रेख मलेरकोटला के नवाबों को सच्ची श्रद्धाँजलि होगी, जिससे इस शहर की धर्म निरपेक्ष और मिलजुल कर रहने की परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सके।
मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए जल आपूर्ति एवं स्वच्छता और परिवहन मंत्री श्रीमती रजिया सुल्ताना, जोकि स्थानीय विधायक भी हैं, ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि मलेरकोटला के निवासियों को यह शानदार तोहफ़ा देने के लिए वह मुख्यमंत्री के हमेशा कजऱ्दार रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि मलेरकोटला को जि़ला बनाए जाने और नवाब शेर मोहम्मद ख़ान के नाम पर बनाए जाने वाले मैडीकल कॉलेज के साथ उन आलोचकों के मुँह बंद हो गए हैं जोकि मलेरकोटला के प्राथमिकता के आधार पर विकास न किए जाने के लिए सरकार की नुक्ताचीनी करते रहते थे।
इस मौके पर अपने संबोधन में राजस्व और पुनर्वास मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ ने मलेरकोटला को एक नई जि़ला प्रशासनिक इकाई बनाए जाने की शानदार पहल के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस कदम से इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकारी स्कीमों को असरदार ढंग से लागू किए जाने का रास्ता साफ होगा।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि मलेरकोटला के ऐतिहासिक शहर को जि़ला बनाए जाने से इस क्षेत्र का सर्वपक्षीय विकास होगा, जाकि स्थानीय निवासियों की आशाएं पूरी करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को कहा कि बेहतर प्रशासन और तेज़ गति से विकास को यकीनी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के बदलते रूप के मद्देनजऱ स्थानीय लोगों की माँग के अनुसार अबोहर और बटाला को भी जिला बनाने के लिए संभावनाएं तलाशी जाएं। सुनील जाखड़ ने यह भी कहा कि एक समान विकास किए जाने के लिए ऐसा कोई भी फ़ैसला लेने से पहले सभी सम्बन्धित पक्षों को भरोसे में लिया जाए।
इस मौके पर पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान बरिन्दर सिंह ढिल्लों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बतौर डिप्टी कमिश्नर अमृत कौर गिल और एस.एस.पी. के तौर पर कंवरदीप कौर की तैनाती करके महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी वचनबद्धता का मुज़ाहरा किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को रोपड़ जिले के समग्र विकास और ख़ुशहाली के लिए निजी तौर पर दख़ल देने की अपील भी की।
मुख्य सचिव विनी महाजन ने अपने संबोधन में कहा कि मलेरकोटला को नया जि़ला मुख्यालय बनाए जाने से इस क्षेत्र के संपूर्ण विकास की गति और तेज़ होगी एवं इसके अलावा लोगों को एक समर्थ और पारदर्शी प्रशासन भी मिलेगा।
इससे पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व और पुनर्वास रवनीत कौर ने मलेरकोटला, अहमदगढ़ और अमरगढ़ की सम्मिलन वाले मलेरकोटला जिले के बारे में जानकारी दी और कहा कि इसमें 192 गाँव, 62 पटवार सर्कल और 6 कानूनगो सर्कल शामिल किए जाएंगे।
इस मौके पर म्यूनिसीसपल काऊंसलर मनोज कुमार, जिय़ा जमाल, ब्लॉक समिति मलेरकोटला के पूर्व प्रधान जसपाल दास और प्रोफ़ैसर रफी ने मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करते हुए मलेरकोटला को जि़ला मुख्याल्य का दर्जा देने और स्थानीय निवासी की किस्मत बदलने के लिए कई विकास परियोजनाएँ मंज़ूर किए जाने के लिए धन्यवाद किया।

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