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कोविड-19 के खि़लाफ़ जंग के दौरान राज्य सरकार की मदद करने के लिए कैप्टन ने उद्योगों का किया धन्यवाद

चंडीगढ़, 24 मई(पीतांबर शर्मा) : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कामकाज की समीक्षा की और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने और पंजाब को देश के औद्योगिक नक्शे के शिखर पर पहुंचाने के लिए पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाया।
उन्होंने पंजाब में मार्च 2017 से अब तक 84,500 करोड़ रुपए का निवेश लाने के लिए इन्वैस्ट पंजाब की बेमिसाल कोशिशों की सराहना भी की, जहाँ से राज्य सरकार की निवेश समर्थकीय नीतियों में निवेशकों द्वारा भरोसा प्रकट करने का प्रगटावा होता है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की समीक्षा मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फंड की कमी को विभाग के कामकाज में रुकावट पैदा नहीं करने देंगे। उन्होंने मौजूदा औद्योगिक और व्यापारिक नीतियों में और उदारता लाने पर भी ज़ोर दिया, जिससे राज्य में निवेशकों को आकर्षित किया जाए।
मुख्य सचिव विनी महाजन की विनती पर अमल करते हुए मुख्यमंत्री ने कोविड महामारी के चलते निवेशकों की वर्चुअल बैठक करवाने को मंज़ूरी दी, जोकि संभावित अक्तूबर या नवंबर में करवाई जाए, जिससे निवेशकों/उद्यमियों का पंजाब में निवेश करने के लिए और विश्वास पैदा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव द्वारा औद्योगिक ईकाइयों में काम करने वाले वर्करों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण की दी गई पहल को भी हरी झंडी दी।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उद्योग विभाग को लुधियाना में ऑटो पार्ट उद्योगों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की टाईस स्कीम के अंतर्गत ज़रुरी फंड हासिल करने के प्रस्ताव की पड़ताल करने के लिए कहा, जो राज्य में ऑटो पार्ट के निर्माण को आगे बढ़ाएगी।
कोविड संकट में राज्य सरकार को सहायता देने के लिए उद्योगपतियों का धन्यवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मुश्किल भरे हालातों में कंपनियों द्वारा दिया गया बड़ा योगदान पंजाब के लोगों की जि़ंदगी, स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की रक्षा में अहम रहा है, जिनकी तरफ से अलग-अलग तरीकों जैसे फूड पैकेट, सूखे राशन की किटें, निजी सुरक्षा उपकरण, फेस मास्क, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटजऱ्, ऑक्सीजन प्लांट और अन्य बहुत सी कोविड केयर सुविधाएं प्रदान करके सहायता मुहैया करवाई गई।
विचार-विमर्श में हिस्सा लेते हुए उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने मुख्यमंत्री द्वारा ज़मीनी स्तर पर 84,500 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड निवेश को यकीनी बनाने के लिए किए गए यत्नों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा बड़ी संख्या में समझौते सहीबद्ध किए गए थे, जिनमें से ज़्यादातर ज़मीनी स्तर पर अमल में नहीं आए। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा सरकार ने राज्य के उद्योगों को अब तक 7000 करोड़ रुपए से अधिक की रियायतें दी हैं।
इससे पहले मुख्य सचिव ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह को बताया कि कोविड महामारी के कारण बने अभूतपूर्व हालातों के मद्देनजऱ पंजाब के लोगों को अपने राज्य निवासियों द्वारा दान-पुण्य और सहयोग के ज़रिये दिलासा और हौसला दिया गया है। लोगों और कंपनियों दोनों ने कोविड से जंग लड़ रहे व्यक्तियों को हर तरीके से सहायता की पेशकश की है और असाधारण दया भावना प्रकट की है।
उन्होंने इन चुनौती भरे हालातों के दौरान प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने के लिए सहायता के लिए आगे आने वाले सभी सैक्टरों के उद्योगों/संस्थाओं की भी सराहना की। राज्य भर के अस्पतालों में मैडीकल ऑक्सीजन की कमी कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में सबसे नाज़ुक कारण बन गई है। पंजाब के पास कोई बड़ा ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट न होने के कारण राज्य सरकार ऑक्सीजन के वितरण और यातायात के लिए मुख्य तौर पर राज्य से बाहर निर्भर है। विनी महाजन ने आगे कहा कि क्योंकि राज्य के पास ढुलाई के लिए ज़रुरी क्रायोजैनिक कंटेनर/टैंकर नहीं हैं, कॉर्पोरेटों द्वारा सरकार के साथ सहयोग करना बहुत महत्वपूर्ण बन गया।
एक संक्षिप्त पेशकारी देते हुए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शेखर ने मुख्यमंत्री को बताया कि विभाग ने इस सरकार द्वारा लाई गई औद्योगिक और व्यापारिक विकास नीति 2017 को सफलतापूर्वक लागू किया गया है और समय-समय पर उद्योगों की ज़रूरत के अनुसार इसमें संशोधन किया गया है, जिसके नतीजे के तौर पर इसके लागू होने के पिछले 4 सालों के दौरान इतने बड़े निवेशों को हासिल किया गया है। विभाग नई योजनाएँ लाने के साथ-साथ भारत सरकार की योजनाओं का प्रभावशाली ढंग से लाभ लेने में सफल रहा है और इसके नतीजे के तौर पर राज्य के औद्योगिक ढांचे में सुधार होने के साथ-साथ राज्य का समूचा औद्योगिक विकास हुआ है। विभाग सरकार के आदेशों के अनुसार सुधार करने का इरादा रखता है, जिससे राज्य में कारोबार करने में आसानी लाई जा सके।
आलोक शेखर ने आगे बताया कि पंजाब सरकार की विनती पर अमल करते हुए उद्योगों ने कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान अपने सी.एस.आर. योगदान के तौर पर नगद और अन्य प्रयासों के रूप में योगदान दिया है। पंजाब के उद्योगों ने अब तक 1,43,917 मेडिकल उपकरण का योगदान दिया है, जिसमें 4 क्रायोजैनिक टैंकर, 12 पी.एस.ए. प्लांट, 8205 पल्स ऑक्सीमीटर, 1140 सिलेंडर, 1000 थर्मल स्कैनर और 1 लाख से अधिक फेस मास्क/एन 95 मास्क शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस योगदान के अलावा पंजाब आपदा प्रबंधन अथॉरिटी को 2,66,54,800 (2.66 करोड़) रुपए का योगदान दिया गया है, जिसमें मैसर्ज एच.एम.ई.एल. द्वारा 1.5 करोड़ रुपए, मैसर्ज स्पोर्टकिंग द्वारा 50 लाख रुपए, मैसर्ज एवन साइकिल द्वारा 20 लाख रुपए और मैसर्ज रैलसन इंडिया द्वारा 10 लाख रुपए का योगदान शामिल है।
मैसर्ज एच.एम.ई.एल. बठिंडा सबसे बड़ा योगदान दे रहा है, जिसने 4 ऑक्सीजन टैंकर, बठिंडा में कोविड अस्पताल स्थापित करना, बठिंडा में ऑक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर और कोविड से जुड़े अन्य उपकरणों का योगदान दिया है, जिसकी कीमत 13 करोड़ रुपए बनती है। उन्होंने सभी कंपनियों का उनके उत्तम यत्नों और योगदान के द्वारा इस मुश्किल समय की चुनौतियों का मुकाबला करने और सरकार को बेहतर देखभाल सेवाएं जारी रखने में सहायता करन के लिए धन्यवाद किया।

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