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कोविड-19 मरीजों से ‘लूट’ रोकने के लिए विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता सक्रिय

  •  निजी अस्पताल के बिलों की जांच करवाई तो 4.69 लाख रुपये कम कर दिया बिल
  • गुप्ता ने सीएम को लिखी चिट्ठी, लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश
  • हरियाणा में सरकार को मोटी चपत की आशंका, 3 गुणा वसूले दाम

चंडीगढ़, 18 मई (रफतार न्यूज ब्यूरो): हरियाणा के निजी अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों ने अनाप-शनाप ‘वसूली’ कर जहां लोगों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है, वही प्रदेश सरकार को भी मोटी चपत लगाई जा रही है। विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के पास बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें पहुंची हैं। जांच में शिकायतें सही पाई गईं। गुप्ता ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को चिट्ठी लिख ऐसे अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है। मामला विधान सभा की स्वास्थ्य सेवाएं संबंधी विषय समिति के संज्ञान में भी लाया जाएगा।

मंगलवार को विधान सभा सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए केंद्र और हरियाणा सरकार पूरे मनोयोग से लगी हुई हैं। सरकार के बड़े प्रयासों से इस महामारी से निपटने में संतोषजनक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, लेकिन इसी बीच प्रदेश में अनेक ऐसे तत्व भी सक्रिय हो गए हैं, जो कोविड महामारी को धन कमाने के बड़े व्यावसायिक अवसर के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।

विधान सभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को लिखे पत्र में कहा कि ऐसी गतिविधियों से न केवल मरीजों और उनके परिजनों का घोर आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि प्रदेश सरकार की छवि भी प्रभावित हो सकती है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने पंचकूला जिले में कोविड 19 के हालातों पर निगरानी रखने और व्यवस्था संभालने के लिए ज्ञान चंद गुप्ता को जिम्मेदारी सौंपी है। स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के कारण बड़ी संख्या में लोग उन्हें अपनी समस्याएं बताते हैं। इस सिलसिले में सबसे ज्यादा शिकायतें निजी अस्पतालों में अधिक वसूली और सरकारी खजाने को चूना लगाने के संबंध में मिल रही हैं।

ऐसी शिकायतों की जांच करने के लिए ज्ञान चंद गुप्ता के निर्देशों पर पंचकूला प्रशासन के एक कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी निजी अस्पतालों में उपचार के बिलों की जांच करती है। कमेटी ने पाया है कि निजी अस्पतालों में मनमाने ढंग से रुपये वसूले जा रहे हैं। विशेषकर सरकारी कर्मचारियों और बीमित व्यक्तियों के बिलों में बड़ी धांधलियां कर सरकार और बीमा कंपनियों को मोटी चपत लगाई जा रही है।

पंचकूला में सबसे ज्यादा शिकायतें शहर में स्थित पारस अस्पताल से जुड़ीं हुई हैं। यहां से आने वाली शिकायतों में से तीन की जांच जिला प्रशासन द्वारा बिलों के संबंध में गठित समिति ने की है। जांच में अनेक चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। पता चला कि पारस अस्पताल में दाखिल मरीजों का बेरहमी से आर्थिक शोषण किया जा रहा है। अनेक दवाओं के दाम 3 गुणा तक वसूले जा रहे हैं। वहीं, बिल इस ढंग से तैयार किए जा रहे हैं कि मरीज से जितनी अधिकतम वसूली संभव हो सके की जाए।

गुप्ता ने बताया कि उनके संज्ञान में जब कोरोना पीड़ित जोग ध्यान का मामला आया तो इसकी जांच कमेटी को सौंपी गई। जोग ध्यान के उपचार के बदले अस्पताल प्रबंधन ने 7 लाख 59 हजार 831 रुपये का प्रोविजनल बिल थमा दिया। इसमें से 2 लाख 95 हजार रुपये का भुगतान भी हो गया। पीड़ित ने इसकी शिकायत स्थानीय विधायक ज्ञान चंद गुप्ता को की। गुप्ता ने कमेटी से मामले की जांच करवाई तो अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में बिल में 4 लाख 69 हजार 221 रुपये की कटौती कर दी। अब अस्पताल ने 2 लाख 90 हजार 610 रुपये का बिल बनाया है।

ऐसा ही एक मामला अशोक कुमार का सामने आया। उसे 24 मार्च 2021 को पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अशोक कुमार को बजाज एलायंस की बीमा योजना के तहत कवर किया गया था। इसके बावजूद परिजनों से अस्पताल ने 74 हजार 935 एडवांस जमा करवा लिए। 9 अप्रैल को अशोक कुमार की अस्पताल में ही मृत्यु हो गई। इसके 2 दिन बाद 11 अप्रैल को अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को 9 लाख 77 हजार 17 रुपये का बिल थमा दिया। बिल इतना अनाप-शनाप था कि बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। इस मामले में भी हरियाणा सरकार के दिशानिर्देश की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

तीसरा मामला धर्म पाल सिंघल से जुड़ा है। उन्हें 17 अप्रैल को पारस अस्पताल में भर्ती किया गया था और 3 मई 2021 को छुट्टी दे दी गई थी। रोगी को एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के तहत बीमा योजना के तहत कवर किया गया है। इसके बावजूद 4 लाख 97 हजार 724 रुपये का बिल थमा दिया गया। इस बिल में रेडियोलॉजी टेस्ट, लैब टेस्ट, विविध सेवाएं और फिजियोथेरेपी, लैब (आउटसोर्स) और आईपी कंसल्टेशन चार्ज के साथ मेडिकल खर्च (ड्रग्स) दिखाया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने 17 मई 2021 को ईमेल से सूचित किया कि उनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। कारण यह पाया कि अस्पताल प्रबंधन ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के दिशानिर्देशों को लागू किए बिना भारी भरकम बिल बना दिया। बिलों में रेमेडेविसिर आदि कोविड -19 के उपचार संबंधी हिदायतों की भी घोर उल्लंघना की गई।

जांच कमेटी की सिफारिशों के आधार ज्ञान चंद गुप्ता ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख कर अनुशंसा की कि प्रदेश के ऐसे सभी अस्पताल के बिलों का ऑडिट करवाकर यह पता लगाना चाहिए कि ये मरीजों को व्यक्तिगत रूप से अधिक वसूली के साथ-साथ सरकार और बीमा कंपनियों को कितनी चपत लगा रहे हैं। उन्होंने ऐसे अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त करने को भी कहा है।

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