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मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. राजू द्वारा सभी डी.ई.ओज़ को राजनैतिक पार्टियों/उम्मीदवारों के आपराधिक पृष्टभूमि के प्रचार सम्बन्धी मामलो में सख़्ती से पालना को यकीनी बनाने के निर्देश

   चंडीगढ़ (पितांबर शर्मा) : भारतीय चुनाव आयोग (ई.सी.आई.) की हिदायतों के अनुसार चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों और ऐसे उम्मीदवारों को नामांकित करने वाली राजनैतिक पार्टियों द्वारा उम्मीदवारों के आपराधिक पृष्टभूमि सम्बन्धी लोगों को जागरूक करने सम्बन्धी मुख्य चुनाव अधिकारी (सी.ई.ओ.), पंजाब डॉ. एस. करुणा राजू द्वारा राज्य के सभी 22 डिप्टी कमिश्नर-कम-जि़ला चुनाव अधिकारी (डी.ई.ओ.) को इस मामले में ज़रूरी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. राजू ने बताया कि भारतीय चुनाव आयोग द्वारा राजनैतिक पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा आपराधिक पृष्टभूमि के प्रचार सम्बन्धी दिशा-निर्देश जारी किए थे और डीईओज़ को यह दिशा-निर्देश जि़लों की सभी राजनैतिक पार्टियों को सर्कुलेट करने की हिदायत की गई है, जिससे आने वाले सभी चुनावों में पार्टियों और उनके उम्मीदवारों द्वारा इनकी सख़्ती से पालना को यकीनी बनाया जा सके।
भारतीय चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों पर गौर करने के लिए जि़ला स्तर पर राजनैतिक पार्टियों में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/प्रांतीय राजनैतिक पार्टियों और राज्यों की मान्यता प्राप्त जि़ला राजनैतिक पार्टियों और जि़लों में स्थित सभी रजिस्टर्ड ग़ैर-मान्यता प्राप्त राजनैतिक पार्टियों की जि़ला इकाईयाँ शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अख़बार में आपराधिक पृष्टभूमि सम्बन्धी जानकारी प्रकाशित करने में असफल रहने वाले उम्मीदवार/राजनैतिक पार्टी को सीईओ द्वारा निर्धारित फॉर्मेट में नोटिस जारी किया जाएगा।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह जानकारी एक स्थानीय भाषा वाले अखबार और एक नेशनल अखबार में प्रकाशित की जानी है। इसके अलावा राजनैतिक पार्टी के फेसबुक और ट्विटर समेत आधिकारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मज़ पर भी यह जानकारी दी जाएगी।
दिशा-निर्देशों में 13 फरवरी, 2020 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में ‘राष्ट्रीय’ और ‘स्थानीय भाषा’ वाले अख़बारों के अर्थों संबंधी बताया गया है। आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय अखबार को किसी भी रोज़ाना के अखबार के तौर पर परिभाषित किया गया है, जिसका कम से कम एक संस्करण हो और डीएवीपी/ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन द्वारा बताए अनुसार 75,000 से अधिक सर्कुलेशन हो।
दूसरी तरफ़ स्थानीय भाषा वाले अखबारों को किसी भी रोज़मर्रा की अखबार के तौर पर परिभाषित किया जाता है, जिसका कम से कम एक संस्करण राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र में स्थानीय भाषा में प्रकाशित किया जाता हो और डीएवीपी/ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन द्वारा बताए अनुसार कम से कम 25,000 सर्कुलेशन हो।

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