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देश में “ समय बैंक ” बनायें या “मातृ – पितृ पूजन दिवस” जैसे आयोजन को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की मांग

छिंदवाड़ा(भगवान दीन साहू)- के नेतृत्व में अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर छिन्दवाड़ा को ज्ञापन सौंपकर देश में समय बैंक बनाये या मातृ – पितृ पूजन दिवस को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की मांग करते हुये बताया कि , स्विट्जरलैंड जैसे अन्य देशों में वहाँ की सरकार ने ” समय बैंक ” योजना लागु की हैं । जिसमें एकाकी रहने वाले सिनियर सिटीजनों की सेवा करने के उद्देश्य से पश्चिमी संस्कृति के कुप्रभाव के कारण इन देशों के युवा विलासितापूर्ण , अमार्यादित , भोगवादी जीवन जीते हैं । परिणाम बुढ़ापे में शरीर को कई बिमारियों घेर लेती हैं । अंत में कई बार ये चल फिर भी नहीं सकते ! ऐसी स्थिति में 24 घंटे मलमुत्र के बीच जीवन यापन होता है। कई बार शरीर शांत हो जाता है। और सड़ने , गलने पर मजबूर रहता है । परिवार के सभी लोग अलग – अलग होकर स्वतंत्र रूप से जीवन यापन करतें हैं । ऐसी विकट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये वहाँ की सरकार ने “समय बैंक” योजना प्रांरभ की । जिसका एक कार्ड एवं कोड नं . जारी किया , जिसके अंतर्गत युवा अपने काम – धंधे में से समय निकालकर इन असहाय बुजुर्गों की सेवा करें । आपने कितने घंटे सेवा की यह कार्ड में दर्ज की जाती हैं । युवावस्था के दिनों की गयी सेवा या इतने घंटे की सेवा ब्याज सहित बुढ़ापे में इन्हें जरूरत पड़ने पर सरकार द्वारा प्रदान की जाती हैं । सेवा से तात्पर्य बुजुर्गो को स्नान , भोजन एवं चिकित्सा सुविधा में मदद करना हैं । जब यह युवा बुजुर्ग होते है तब समय बैंक उनके लिए एक वरदान साबित होता है । कोई दूसरा युवा आकर उतने घंटे सेवा का लाभ देता है । पर हमारी सनातन संस्कृति इसके ठीक विपरीत है। हमारी संस्कृति में मातृ देव भवः , पितृ देव भवः तथा अतिथि देव भवः की महत्ता हैं । हमारे संतो के मार्गदर्शन में हमारी संस्कृति जीवित है। आज भी देश में “मातृ – पितृ पूजन दिवस” जैसे आयोजन इसके उदाहरण हैं । पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव देश पर भी पड़ रहा हैं । जिससे संयुक्त परिवार की प्रथा टुट रही हैं । सरकार को चाहिए कि समय रहते ” समय बैंक ” योजना की शुरूआत करे , या “मातृ – पितृ पूजन दिवस” जैसे आयोजनों को राष्ट्रीय पर्व घोषित करें । ज्ञापन देते समय साध्वी रेखा बहन , साध्वी प्रतिमा बहन , शिक्षाविद विशाल चउत्रे , आधुनिक चिंतक हर्षुल रघुवंशी , राष्ट्रीय बजरंगदल के नितेश साहू , कुंबी सामाज के युवा नेता अंकित ठाकरे , पवार समाज के प्रमुख हेमराज पटले , युवा सेवा संघ के नितिन डोईफोडे , सोमनाथ पवार , ओमप्रकाश डेहरिया , आई.टी.सेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े , अखिल भारतीय नारी रक्षामंच से दर्शना खट्टर , छाया सूर्यवंशी , करूणेश पाल , डॉ . मीरा पराड़कर , शंकुतला कराड़े , वनीता सनोड़िया , योगिता पराड़कर , शोभा भोजवानी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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