Wednesday , June 16 2021
Breaking News








Home / दिल्ली / खेती कानूनों के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए 162 किसानों को केंद्र 25-25 लाख रुपए का मुआवज़ा दे: पंजाबी कल्चरल कौंसल

खेती कानूनों के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए 162 किसानों को केंद्र 25-25 लाख रुपए का मुआवज़ा दे: पंजाबी कल्चरल कौंसल

चंडीगढ़  (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो):  पंजाबी कल्चरल कौंसिल ने केंद्र सरकार को चि_ी लिखकर माँग की है कि वह किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी 162 किसानों को ऐक्स-ग्रेशिया लाभ अधीन 25-25 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दे और काले किसान विरोधी कानूनों को तुरंत रद्द करके ‘अन्नदाताओं’ को बनता मान-सम्मान दिया जाये जिन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा यकीनी बनाने के लिए अपने जीवन का सब कुछ दाव पर लगा दिया है। इसके अलावा कौंसिल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों की हर संभव सहायता और ज़रूरी बुनियादी सहूलतें प्रदान करने के लिए निजी दख़ल देने के लिए कहा है।
​केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को लिखी चि_ी में पंजाबी कल्चरल कौंसिल के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल और वाइस चेयरमैन तेजिन्दरपाल सिंह नलवा सीनियर वकील सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही दुख की बात है कि केंद्र सरकार के शर्मनाक व्यवहार, निर्दयी रवैय और अहंकार के कारण दो महीनों अर्थात 25 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सरहदों पर काले किसान विरोधी कानूनों के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान चार राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 149 किसान अपनी कीमती जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा पंजाब में धरनों और रेल रोको मोर्चे के दौरान सितम्बर से 24 नवंबर, 2020 तक 13 किसानों ने अपनी जान कुर्बान कर दीं हैं। उन्होंने कहा ‘‘केंद्र सरकार की यह जि़द्द किसी भी तरह जायज नहीं है क्योंकि कोई भी जानी नुक्सान देश के किसानों के साथ सरासर बेइन्साफ़ी है जो देश के अन्न भंडार भरने, खेती आधारित उद्योग के लिए कच्चा माल मुहैया करवाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और खेत मज़दूरों को भी रोज़गार प्रदान कर रहे हैं।’’
​कौंसिल के नेता ने पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रीयों द्वारा इन काले खेती कानूनों के विरुद्ध सख़्त और स्पष्ट रूख अपनाए जाने की सराहना करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से शहीद किसानों के प्रभावित परिवार को हर संभव वित्तीय सहायता यकीनी बनाने के लिए निजी दख़ल की माँग की है क्योंकि उन्होंने बहुत ही मुश्किल हालातों में दिल्ली के बॉर्डरों पर संघर्ष करते हुए अपनी जि़ंदगी का बलिदान दिया है।
​कौंसिल ने सभी शहीद हुए किसानों की एक सूची भी केंद्रीय मंत्री को भेजी है जिससे अन्नदाता के प्रति हमारी शुक्रगुजारी की प्रबल भावना के साथ दुखी परिवारों को हर तरीके से सक्रिय सहायता और सहयोग दिया जा सके।
​कौंसिल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा केंद्रीय विवादित खेती कानूनों के विरुद्ध अपनाए गए कड़े रूख और किसान आंदोलन के दौरान पारिवारिक सदस्यों को गवाने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपए की वित्तीय मदद देने और एक आश्रित मैंबर को नौकरी देने के ऐलान की भी सराहना की है। कौंसिल के नेताओं ने कहा कि दिल्ली की सरहदों पर किसान अपने लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ीयों और आम जनता के हकों के लिए बैठे हैं।
​ग्रेवाल ने शहादतों बारे विस्तार में जानकारी देते हुए बताया कि दुर्भाग्यपूर्ण संगरूर जिले के 22 किसान, मानसा और पटियाला के 14-14, बरनाला के 9, बठिंडा और लुधियाना के 8-8, श्री फतेहगढ़ साहिब और फाजिल्का के 7-7, श्री मुक्तसर साहब और अमृतसर के 6-6 किसान शामिल हैं। मोगा, होशियारपुर, फिऱोज़पुर और एसबीएस नगर के 5-5, मोहाली, रूपनगर, गुरदासपुर और जालंधर से 3-3, तरनतारन जिले के 2 शहीद किसान शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा से 9 किसान, उत्तर प्रदेश के 3 और मध्य प्रदेश से एक किसान ने अपना बलिदान दिया है। उन्होंने सरकार की तरफ से किसान आंदोलन को अलग अलग तरह के गलत और देश विरोधी नामों के द्वारा निंदा करने की भी आलोचना की है।
​देश के चार राज्यों के किसानों की इन हत्याओं के लिए केंद्र सरकार को जि़म्मेदार ठहराते हुए कौंसिल ने पत्र में केंद्र सरकार को दुर्भावना और असंवैधानिक तरीकों के द्वारा कृषि और खेती धंधों को ख़त्म करने के विरूद्ध चेतावनी भी दी है क्योंकि हर किसान अपनी ज़मीन को अपनी माँ के बराबर का दर्जा देता हुआ सबसे अधिक प्यार करता है।
​केंद्र सरकार को भारतीय नागरिकों पर ज़बरदस्ती तीन काले कानून थोपने के लिए जि़म्मेदार बताते हुए श्री ग्रेवाल ने कहा, ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार को किसानों और खेती की कीमत पर अपने कुछ चहेतों को निजी लाभ पहुँचाने कि की गई कोशिशों के हानिकारक और दुष्प्रभावों का अहसास होना चाहिए, क्योंकि किसानों ने न सिफऱ् भारत को विदेशों से अनाज की भिक्षा मांगने की जगह इसे एक खाद्य अधिशेष देश बनाया है बल्कि राज्यों सरकारों सहित केंद्र सरकार के लिए भी वित्तीय संसाधन पैदा किये हैं।
​कौंसिल ने ज़ोर देकर कहा कि राज्य की सूची वाले विषयों में केंद्र को कोई दख़ल नहीं देना चाहिए और सभी राज्यों में कृषि में किसी भी तरह के सुधारों के लिए पूरी तरह राज्यों पर छोड़ देना चाहिए और तीनों ही विवादित खेती कानूनों को तुरंत रद्द कर देना चाहिए। ग्रेवाल ने कहा कि केंद्र को अपना अडिय़ल रवैया त्याग कर इस ऐतिहासिक किसान आंदोलन की असली भावना और विशाल भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशों से किसानों की लोकतांत्रिक आवाज़ को मिल रहे भारी समर्थन का अहसास करना चाहिए।

About admin

Check Also

पंजाब विधानसभा चुनाव: इस बार मुख्यमंत्री चेहरे के साथ लड़ेगी आम आदमी पार्टी, स्थानीय नेतृत्व को वरीयता

(रफतार न्यूज ब्यूरो)ः पंजाब में 2022 में होने वाले विधानभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share