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पंजाब पुलिस को शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पाँस टीमें, परिवारिक काउंसलिंग इकाईयाँ और सडक़ सुरक्षा सहायक मिलेंगे

चंडीगढ़  (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) : पंजाब पुलिस को नया रूप देने के हिस्से के तौर पर जल्द ही शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पांस टीमें, महिलाओं के खि़लाफ़ शारीरिक अपराध करने वालों पर सख़्त कार्यवाही करती नजऱ आएंगी। यह बदलाव पंजाब पुलिस के पुनर्गठन के अंतर्गत किये जाएंगे, जिसको मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को मंज़ूरी दे दी है।
पुनर्गठन के अंतर्गत किये जाने वाले इन बदलावों का मकसद पंजाब के सरहदी राज्य होने को मुख्य रखते हुए, पुलिस विभाग को आज के समय के दहशतवाद, अमन और कानून और पुलिस प्रबंधन सम्बन्धी चुनौतियों का सामना करने के लिए और मज़बूत करना है।
पुनर्गठन की गई पुलिस में 716 नए महत्वपूर्ण पदों की सृजना की गई है और 820 ग़ैर-ज़रूरी या खाली पड़े पदों को ख़त्म कर दिया गया है। पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा, दहशतगर्दी को नकेल कसना, भीड़ को काबू करने और दंगों के दौरान स्थिति से निपटने आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर और ज्य़ादा ध्यान दिया जायेगा। पुनर्गठन की यह प्रक्रिया राज्य की पुलिस की सामथ्र्य में वृद्धि करती हुई इसको पुलिस प्रबंधन, जांच पड़ताल और मामलों की पैरवी जैसी कार्यवाहियों को और बढिय़ा ढंग से पूरा करने के काबिल बनाएगी। इस प्रक्रिया से सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और यह एकसारता में लागू होगी।
पुनर्गठित पुलिस में 5000 कांस्टेबलों की भर्ती की जायेगी और इसके साथ ही आई.टी. और कानून जैसे क्षेत्रों में आम नागरिकों की भर्ती का रास्ता भी खुलेगा। इतन ही नहीं, इस नयी प्रक्रिया के अंतर्गत पैरवी और लिटीगेशन, फोरेंसिक विज्ञान लैबारेट्री, केमिकल ऐग्ज़ामीनर और कानूनी सलाहकार डायरैक्टोरेट भी मज़बूत किये जाएंगे।
महिलाओं की सुरक्षा को विभाग में विशेष अहमीयत वाले क्षेत्रों के तौर पर चुनते हुए पंजाब कैबिनेट द्वारा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता के अंतर्गत शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पांस टीमों की सभी जिलों में स्थापना करने को मंज़ूरी दे दी गई है। यह टीमें सब-इंस्पेक्टर के पद के पंन: नामकरण के अंतर्गत प्रवानित पदों में से ही गठित की जाएंगी और इनसे खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इसी तरह ही सभी जिलों में पारिवारिक काउंसलिंग इकाईयों की स्थापना की जायेगी, जिससे कमज़ोर समूहों और बच्चों के खि़लाफ़ अपराध के मामलों से निपटा जा सके। हालाँकि, छोटे जिलों में प्रति जि़ला एक टीम/इकाई होगी, परन्तु बड़े जिलों में यह संख्या अधिक हो सकती है। डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने कैबिनेट मीटिंग के बाद खुलासा किया कि इन टीमों/इकाईयों की सृजना करना विशेष कार्यों के लिए पुलिस अधिकारियों का पुन: प्रशिक्षण और पुन: नामकरण द्वारा किया जायेगा।
इस फ़ैसले के लागू होने के अंतर्गत 34 सब-इंस्पेक्टरों के पदों का फिर नामकरण करके उनको शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पांस टीमों के इंचार्ज बनाया जायेगा और 34 सब-इंस्पेक्टरों को काउंसलिंग कोऑर्डीनेटर स्थापित किया जायेगा। इसके अलावा 34 कांस्टेबलों को काउंसलिंग अफ़सर शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पांस टीम का नाम दिया जायेगा और 34 अन्य कांस्टेबलें को क्राइम सीन अफ़सर शारीरिक शोषण सम्बन्धी विशेष रिस्पांस टीम के तौर पर तैनात किया जायेगा। इसके अलावा सहायक बाल सुरक्षा अफसरों की 382, साईबर अपराध जांच अफसरों की 121 और काउंसलिंग अफसरों का पुन: नामकरण किए गए 302 पद भी मौजूद होंगे।
इसके अलावा यह भी फ़ैसला किया गया है कि कांस्टेबलों (महिलाओं की नये सिरे से सीधी भर्ती के द्वारा भरी जाने वाली) के 819 पद की फिर तैनाती/तबादला/अटैचमैंट, आम्र्ड काडर से जि़ला काडर में से की जायेगी।
संगीन अपराधों के मामलों में सज़ा की दर सुधारों और बेहतर ढंग से इन्साफ दिलाने के लिए पैरवी विभाग को 168 पदों की सृजना करने के द्वारा मज़बूती प्रदान की जायेगी, जबकि फोरेंसिक विज्ञान लैबारेटरी को 84 अतिरिक्त और केमिकल एग्ज़ामीनर विंग को 12 पद सृजन करके मज़बूत किया जायेगा। कानूनी सलाहकार को पुनर्गठन प्रक्रिया के अंतर्गत 16 अन्य पद मुहैया करवाए जाएंगे।
ख़ासकर बड़े शहरों में ट्रैफिक़ की बढ़ती समस्या को देखते हुए कैबिनेट द्वारा डी.जी.पी. के द्वारा बाज़ार की दरों पर 15 रोड सेफ्टी ऐसोसीएटों की सेवाएं बतौर कंसलटेंट लेने के लिए पदों की सृजना किए जाने को मंज़ूरी दी गई है। डी.जी.पी. को यह अधिकार भी दिए गए हैं कि विशेष अपराधों से पेश चुनौतियों के मद्देनजऱ आई.टी. और लीगल विभागों में सिवलीयन माहिरों में से 50 अतिरिक्त कंसलटैंटों की सेवाएं ली जाएँ।
सिवलीयन स्टाफ को अन्य कार्यों के लिए भर्ती किये जाने के समय वर्दीधारी पुलिस कर्मियों को विशेष तौर पर पुलिस सम्बन्धी ड्यूटियों के लिए ही तैनात करने के वैश्विक चलन को देखते हुए कैबिनेट ने जिलों और पुलिस हैडक्वाटर में दफ़्तरी काम-काज पूरे करने के लिए मिनिस्टीरियल स्टाफ के 413 पद सृजन किए जाने को भी मंज़ूरी दे दी।

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