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न्याय सिध्दांतो के दुरूप्रयोग रोकने हेतु ज्ञापन

 

छिन्दवाड़ा – (सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू)- के नेतृत्व में कई धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली भारत सरकार के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन देते हुये न्याय सिध्दांतो के दुरूप्रयोग को रोकने की मांग की ज्ञापन में बताया कि, – देश की न्याय पालिका को न्याय मंदिर एवं न्यायधीश को भगवान की संज्ञा दी जाती है। शोषित एवं पीड़ित वर्ग की न्यायपालिका से विशेष उम्मीद रहती है। पर कुछ वर्षाे से यह देखने को मिला है कि, न्यायपालिका किसी के हाथों की कटपुतली है। न्याय पालिका पर भ्रष्टाचार के आरोप कालान्तर से लगते रहें है। ताजा घटना क्रम अर्नव गोस्वामी का है, जिसे महाराष्ट्र पुलिस ने जबरन गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। और सेशन कोर्ट एवं उच्च न्यायालय मुम्बई की राग द्वेष वाली कार्यप्रणाली को पूरे देश ने देखा माननीय उच्चतम न्यायालय ने अर्नव गोस्वामी को जमानत दी। यह कार्य न्याय सिध्दान्तों के बिलकुल विपरीत था। न्याय सिध्दान्त अनुसार जिस आरोपी का मामला नीचली अदालतों में विचाराधीन है, उस पर उच्च न्यायालय को सुनने की पाबंदी है। ऐसा संविधान में उल्लेख है। देश की जेल में अर्नव गोस्वामी जैसे लाखों बेगुनाह बंद है। उस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट कोई निर्णय लेगा? उदाहरण स्वरूप संतआशारामजी बापू का मामला है। जो राजनीति से पीड़ित एक षड़यंत्र का हिस्सा है। मेरे द्वारा दिनाॅक 08/10/2015 को माननीय प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा जिस पर प्रधानमंत्री जी ने पत्र क्रमांक च्डव्च्ळध्क्ध्2015ध्0241368 के माध्यम से मुख्य सचिव राजस्थान सरकार को कार्यवाही हेतू आदेषित किया मुख्य सचिव ने उक्त शिकायत पत्र ब्प्क् राजस्थान सरकार को दिया। सी.आई.डी. ने विस्तृत जाॅच कर संतश्रीआशारामजी बापू के प्रकरण को फर्जी माना और मुझे लिखित दस्तावेज प्रदान कियें। सी.आई.डी. के जाॅच प्रतिवेदन के आधार पर मेरे द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में एक जनहित याचिका दर्ज करवाया जिसका क्रमांक 3479/2016 था जिस पर दिनाॅक 05/04/2016 को माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर ने मेरी भावनाओं की कद्र करते हुये मुझे मोखिक रूप से अवगत कराया की हम समझ रहें है यह प्रकरण फर्जी है, पर हमारी मजबूरी यह है कि प्रकरण निचली अदालत में विचाराधीन हैं। और याचिका निरस्त कर दी। आप सारे सबूत तथा सी.आई.डी. रिपोर्ट लेकर निचली अदालत में जाओ। आपके साथ न्याय जरूर होगा। लेकिन निचली अदालत के न्यायधीश ने षड़यंत्र पूर्वक इन सबूतों को जान बूझकर नजर अंदाज कर दिया। इस प्रकार जेल में बंद लाखों लोगों की यह समस्या है। आप सब में थोड़ी बहुत भी ईश्वर के प्रति या धर्म या संस्कृति या संविधान के प्रति आस्था है तो आवश्यक कार्यवाही की जायें। अन्यथा संविधान में जोड़ा जाये कि देश में समानता का अधिकार नहीं है। इस अवसर पर साध्वी रेखा बहन, साध्वी प्रतिमा बहन, संस्कृतिक रक्षक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मीकांत द्विवेदी, शिक्षाविद विशाल चउत्रे, आधुनिक चिंतक हर्षुल रघुवंशी, कुंबी सामाज के युवा नेता अंकित ठाकरे, राष्ट्रीय बजरंगदल के नितेश साहू, पवार समाज के प्रमुख हेमराज पटले, युवा सेवा संघ के नितिन दोईफोड़े, सोमनाथ पवार आई.टी.सेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े, कलचुरी समाज के सुजित सूर्यवंशी, अखिल भारतीय नारी रक्षा मंच के करूणेश पाल, छाया सूर्यवंशी, वनीता सनोड़िया, शकुंतला कराड़े, योगिता पराड़कर मुख्य रूप से उपस्थित थें।

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