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‘ई.डी. या किसी और से नहीं डरता’, कैप्टन अमरिन्दर सिंह का ऐलान

कहा कि वह बादलों के कारण पिछले 13 वर्षों से अदालतों में जा रहे हैं और अन्य 13 वर्षों के लिए भी जाने के लिए तैयार हैं
सवाल किया ‘नहीं जानता कि प्रकाश सिंह बादल को पद्म विभूषण क्यों मिला’, पूछा ‘क्या हरसिमरत अनपढ़ है?’
कहा, ‘केजरीवाल नूं झूठ बोलन दी आदत है और खट्टर नूं कुट्टन दी’, दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सम्बन्धी टिप्पणी तोड़ मरोड़ कर पेश करने कि की आलोचना
चंडीगढ़ (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) : राज्य की समूह विरोधी पार्टियों को अपने हितों की पूर्ति के लिए किसानों की जि़न्दगियों को राजनीति हेतु बरतने के लिए आड़े हाथों लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि वह ई.डी. या किसी और से नहीं डरते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह और पूरी कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और केंद्र सरकार को चाहिए कि वह किसानों की बात सुने और उनकी माँगें माने। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और अरविन्द केजरीवाल से लेकर मनोहर लाल खट्टर तक विरोधी पार्टियों के सभी नेताओं की ताडऩा करते हुए कहा कि इन्होंने किसानों, जो अपना हक लेने के लिए ठंड के मौसम में सडक़ों पर डटे हुए हैं, की सच्ची लड़ाई का मज़ाक बनाकर रख दिया है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हरसिमरत कौर बादल की तरफ से उन पर ई.डी. के दबाव में आने के दोष का जवाब देते हुए कहा कि 13 वर्षों तक मैने अदालतों के चक्कर काटे हैं क्योंकि बादलों ने मेरे खि़लाफ़ केस बनाऐ थे परन्तु मुझे ई.डी. की कोई परवाह नहीं है और मैं और 13 वर्षों तक अदालतों के चक्कर काट कर लड़ाई लड़ सकता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि सभी बादल एक ही जैसे हैं और झूठे हैं। उन्होंने अकाली नेताओं को सलाह दी कि वह झूठ बोलना बंद करके सच कहें क्योंकि लोग इनके बारे में अच्छी तरह अवगत हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बीते दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात करके उन्होंने यह कह दिया था कि पंजाब विधानसभा में पास संशोधन बिल किसानी मसले की पेचीदगी को हल करने की आसान विधि है क्योंकि यह राज्य के भविष्य का निचोड़ हैं। उन्होंने कहा कि मैने उनको यह बिल राष्ट्रपति द्वारा मंज़ूर करवाने की अपील की। उन्होंने आगे बताया कि कल उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात इस लड़ी की तीसरी मीटिंग थी, जिस दौरान दो बार उन्होंने पंजाब के भले के लिए गृह मंत्री तक पहुँच की और एक बार उनको गृह मंत्री बनने के लिए बधाई दी।
खेती कानूनों के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने के लिए अकालियों को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर लाइव वीडियो बयान के दौरान कहा कि बादलों ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर पलटी मारी है। उन्होंने बुज़ुर्ग अकाली नेता की तरफ से भारत सरकार को पद्म विभूषण वापस किये जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं नहीं जानता कि प्रकाश सिंह बादल को पद्म विभूषण क्यों मिला था। इस तथ्य पर गौर करते हुए कि 1965 की जंग जीतने के लिए जनरल हरबख़श सिंह को पद्म विभूषण के साथ नवाजा गया था, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पूछा, ‘‘प्रकाश सिंह बादल ने कौन सी जंग लड़ी या कौम के लिए उसने कौन सी बलि दी।’’ उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति खेलना बंद करो क्योंकि ऐसे हथकंडे 40 वर्ष पहले चल जाते थे परन्तु अब नहीं।
मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अपनी सारी जि़ंदगी प्रकाश सिंह बादल यह दावा करता रहा कि वह किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। अगर ऐसा था तो फिर उसकी पार्टी ने पहले विरोध करने के बाद केंद्रीय ऑर्डीनैंसों की हिमायत क्यों की और फिर पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए इनकी निंदा करना शुरू कर दिया।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मंडल का हिस्सा होने के नाते हरसिमरत कौर बादल उस मीटिंग में शामिल थी, जिस दौरान कृषि ऑर्डीनैंसों को पास किया गया था। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या वह अनपढ़ थे, जो पढ़ नहीं सकते थे।’’
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविन्द केजरीवाल की उनके द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा बारे दिए बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बयान साफ़ तौर पर पाकिस्तान के सम्बन्ध में दिया गया था और पंजाब का गृह मंत्री होने के नाते यह उनका फज़ऱ् बनता था कि वह केंद्रीय गृह मंत्री को रोष प्रदर्शन के लंबे समय तक चलने के ख़तरोंं से अवगत करवाएं।
मुख्यमंत्री ने किसानों के धरनों सम्बन्धी उठाए गए कदमों बारे हरियाणा और दिल्ली के अपने हमरुतबा नेताओं की तीखी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘केजरीवाल नूं झूठ बोलन दी आदत है और खट्टर नूं कुट्टन दी।’’ उन्होंने कहा कि खट्टर सरकार ने तो बुज़ुर्ग किसानों को भी नहीं बख़्शा और उनके खि़लाफ़ भी हिंसक तरीके अपनाए गए। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि किसानों ने अपने ‘दिल्ली चलो’ मार्च का पहले ही ऐलान कर दिया था, मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बातचीत के लिए बुलाया जाना चाहिए था परन्तु इसकी बजाय उन पर पानी की बौछार और आँसू गैस के गोले छोड़े गए।
केजरीवाल को झूठ बोलने की आदत वाला व्यक्ति बताते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को पूछा कि वह पहले यह बताए कि क्यों उसकी सरकार ने केंद्रीय खेती कानूनों में से एक को नोटीफायी कर दिया था। उन्होंने आगे कहा कि जब विरोधी पार्टियों की हकूमत वाले अन्य राज्यों जिनमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल हैं, ने केंद्रीय कानूनों का मुकाबला करने के लिए संशोधन बिल पास किये तो केजरीवाल ने इनको रद्द करने के लिए दिल्ली विधानसभा का सैशन क्यों नहीं बुलाया। क्या केजरीवाल नहीं जानता कि दिल्ली के आसपास ग्रामीण इलाके भी बसते हैं।
यह ऐलान करते हुए कि जब भी वह पंजाब बारे बोलते हैं तो पूरे दिल के साथ बोलते हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की तरफ से लाए और विधानसभा में पास किये गए बिल भारतीय संविधान के मुताबिक ही थे, जैसे कि साल 2015 में गुजरात में किया गया था। पहले तो पंजाब की सभी पार्टियों ने उनकी सरकार का साथ दिया और उनके साथ राज्यपाल को मिलने तक भी गए परन्तु बाद में राजनैतिक लाभ लेने के लिए इनमें से कुछ ने यू-टर्न ले लिया।
यह स्पष्ट करते हुए कि दो महीनों तक जब किसान पंजाब में रेल पटरियों पर धरने लगाकर बैठे थे तो एक भी पत्थर नहीं फेंका गया, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हमारे किसानों ने देश का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के खि़लाफ़ कोई कार्यवाही इसलिए नहीं की क्योंकि वह जानते हैं कि किसानों के दिल में क्या है।
उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि पंजाब के किसानों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया परन्तु अब जब अन्य राज्यों ने भी गेहूँ और धान की फ़सल की पैदावार शुरू कर दी है तो पंजाब के किसानों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि पंजाब के किसान भारत को न बचाते और हरित क्रांति न आती तो भारत की हालत आज की अपेक्षा बहुत अलग होनी थी। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनकारी किसानों को न सिफऱ् भारतीय लोगों, बल्कि विदेशों से भी समर्थन हासिल है।

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