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खट्टर ने बात करने के लिए मेरे मोबाइल फ़ोन पर कॉल करने या अधिकारिक विधि क्यों नहीं अपनाई – कैप्टन अमरिन्दर सिंह

यदि मेरे साथ बात करनी थी तो कॉल मेरे अटैडैंट को क्यों की
कोविड संबंधी टिप्पणियों पर खट्टर की कड़ी आलोचना, यदि उनको सचमुच ही इतनी चिंता थी तो हरियाणा में किसानों को रोकना नहीं चाहिए था
अपने किसानों से मुँह मोड़ लेने वाला और खालिस्तानी बताने वाला व्यक्ति भरोसो के लायक नहीं हो सकता
चंडीगढ़  (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) :  पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हरियाणा में अपने हमरुतबा द्वारा जारी किये गए तथाकथित कॉल रिकार्ड को मुकम्मल तौर पर ढकोसला बताते हुए रद्द कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अपने ही सरकारी रजिस्टर का पन्ना दिखाने से एम.एल. खट्टर के झूठ पर पर्दा नहीं पड़ सकता और यदि वह सचमुच ही संपर्क साधना चाहते थे तो वह अधिकारित विधि इस्तेमाल कर सकते थे या फिर उनके मोबाइल फ़ोन पर कॉल कर सकते थे।
खट्टर द्वारा अपने दावे सिद्ध करने के लिए की गई निराश कोशिशों को रद्द करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कॉल रिकार्ड की कॉपियां जिनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा उनके साथ संपर्क करने की कोशिशों को दिखाने का यत्न किया गया है, जारी करन से खट्टर की पाखंडबाजी का और भी अधिक पर्दाफाश हुआ है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि खट्टर के कार्यालय द्वारा मेरे निवास पर कॉल की भी गई थी तो यह कॉल एक अटैडैंट को ही क्यों की गई। मेरे साथ संपर्क कायम करने के लिए अधिकारिक तरीके का प्रयोग क्यों नहीं किया गया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार के सर्वोच्च अधिकारी जिनमें प्रमुख सचिव और डी.जी.पी. स्तर के अधिकारी शामिल हैं, किसान मुद्दे पर पिछले कई दिनों से दोनों तरफ से एक-दूसरे के संपर्क में थे, इनमें से भी किसी अधिकारी ने किसी भी मौके पर मेरे साथ बात करने संबंधी खट्टर की इच्छा बारे नहीं बताया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हरियाणा में उनके हमरुतबा की किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के ऊँचे नैतिक आधार पर काबिज़ होने की कोशिश निराशाजनक थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले बीते समय में खट्टर ने मेरे साथ संपर्क करने के लिए कितनी बार अटैडैंट वाले चैनल का प्रयोग किया है? उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री को झूठ बोलना बंद करने के लिए कहा।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि मेरे निवास पर मेरा अटैडैंट प्रात:काल 9 बजे से शाम 5 बजे तक फ़ोन कॉल सुनता है क्योंकि मैं अपने स्टाफ सदस्यों का शोषण करने में विश्वास नहीं करता। खट्टर सीधा अपना फ़ोन उठाकर मेरे मोबाइल फ़ोन पर कॉल कर सकता था।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि असली बात यह है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री किसानों को दबाने के प्रयास में थे और किसान संघर्ष संबंधी विचार-विमर्श करने का उनका कोई गंभीर इरादा नहीं था। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि यदि मैं किसानों के मुद्दे पर बहुत से केंद्रीय मंत्रियों के साथ बात कर सकता हूं तो मैं इस बारे खट्टर के साथ बात करने से क्यों संकोच करूंगा। उन्होंने अपने हरियाणा के हमरुतबा द्वारा किसानों की जायज़ माँगों और जीवन निर्वाह के लिए किसानों की ज़मीनी स्तर की लड़ाई को राजनैतिक रंग देने की कोशिश करने की सख़्त आलोचना की।
हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा टिप्पणी कि यदि अब कोविड किसानों के विरोध के कारण फैलता है तो इसके लिए अमरिन्दर सिंह जि़म्मेदार होगा, इस पर खट्टर पर बरसते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वह (खट्टर) हरियाणा राज्य, जिसका ट्रैक रिकार्ड महामारी के मामले में काफ़ी बुरा रहा है, में किसानों के कारण कोविड फैलने सम्बन्धी इतने चिंतित थे तो उनको किसानों को राज्य में ही न रोककर तुरंत दिल्ली की तरफ जाने की आज्ञा देनी चाहिए थी।
खट्टर की इस टिप्पणी कि किसानों को हरियाणा की सरहदें बंद नहीं करनी चाहीएं पर बोलते हुए कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि यह खट्टर की सरकार और हरियाणा पुलिस ही थी जिसने पिछले 3 दिनों से किसानों को ज़बरदस्ती आगे बढऩे से रोककर सरहदें बंद करके रखीं।
मुख्यमंत्री ने खट्टर द्वारा हरियाणा पुलिस द्वारा बल के प्रयोग से लगातार इन्कार करने की कड़ी निंदा की जबकि मीडिया की तरफ से इस पूरे मामले कि की गई कवरेज लोगों के सामने है। जो मामला सभी के सामने साफ़ और स्पष्ट है, उससे इन्कार करना हैरानी वाली बात है। यह जि़क्र करते हुए कि जख़़्मी किसानों को हर टी.वी. चैनल पर देखा जा सकता है, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह खट्टर के झूठ की हद को दिखाता है।
कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि इस मामले पर खट्टर के झूठ को हरियाणा के किसानों ने ख़ुद ही उजागर कर दिया है क्योंकि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के दावों कि राज्य का कोई भी किसान मार्च में शामिल नहीं हुआ, को रद्द ही नहीं किया बल्कि हरियाणा सरकार की तरफ से जारी अपने पहचान पत्र भी दिखाए थे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने ख़ुद के किसानों से मुँह फेर सकता है और यहाँ तक कि संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़े होने की बजाय उनको खालिस्तानी पुकार सकता है, से स्पष्ट होता है कि ऐसे व्यक्ति को झूठ फैलाने संबंधी कोई नैतिक झिझक, शर्म नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि स्पष्ट तौर पर खट्टर पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता।

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