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डीजीपी ने जालंधर पीएपी कैंपस में की 61वें पुलिस स्मृति दिवस समारोह की अगुवाई

   *    राज्य की अमन-शांति बहाली और साम्प्रदायिक सामांज्य स्थापित करने के लिए पंजाब पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया
जालंधर (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) :  पुलिस स्मृति दिवस, जिसे शोक परेड्स के तौर पर भी जाना जाता है, पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में की अगुवाई करने के लिए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिनकर गुप्ता बुधवार सुबह जालंधर के पीएपी काम्पलेक्स पहुंचे और यहां शहीद हुए पुलिस के जवानों व अधिकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। यह कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में आयोजित किए गए थे।
कानून-व्यवस्था को हर कीमत पर बनाए रखने की वचनबद्धता को दोहराते हुए डीजीपी ने पंजाब में अमन-शांति की स्थिति को बहाल करने और देश की एकता-अखंडरा बरकरार रखने में पुलिस की तरफ से दी कई कुर्बानियों व निभाई गई भूमिका को याद किया।
डीजीपी ने कहा कि यह पंजाब पुलिस के लिए गर्व की बात है कि साल 1981 से लेकर 2020 तक 2000 से ज्यादा अधिकारियों व मुलाजिमों ने लोगों की सुरक्षा व अमन-शांति के लिए अपनी कुर्बानियां दी ताकि देश व राज्य को बाहरी व अंदरूनी खतरों से बचाया जा सके।
गुप्ता ने कहा कि पुलिस के इन शहीदों की कुर्बानियां आने वाली युवा पीढिय़ों को हमेशा देशभक्ति के जज्बे और बहादुरी के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगवाई में पंजाब सरकार की तरफ से पुलिस डिपार्टमेंट के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह जिनके पास गृह विभाग का दायित्व भी है, का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने शहीद हुए मुलाजिमों व अधिकारियों के परिवारों के प्रति अपने दायित्व को बाखूबी निभाया है।
उन्होंने इस दौरान पटियाला के एएसआई हरजीत सिंह, जिनका अपनी ड्यूटी करते वक्त हाथ कट गया था, की भी प्रशंसा की, साथ ही पिछले साल ड्यूटी निभाते हुए शहीद हुए मोगा के सी-2 जगमोहन सिंह व जालंधर के कांस्टेबल गुरमीत सिंह को भी याद किया, जोकि अपनी ड्यूटी निभाते हुए शहीद हुए।
कोरोना वायरस महामारी के दौरान पंजाब पुलिस की तरफ से लोगों की सहायता के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान पुलिस की तरफ से समाज सेवी संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हुए लगभग 12 करोड़ लोगों को राशन, लंगर और फूड पैकेट्स के जरिए मदद पहुंचाई गई है। उन्होंने बताया कि महामारी के दरमियान कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद हमारे 41 जवानों व अधिकारियों ने अपनी जान गंवाई, जिन्हें वह पूरे पुलिस डिपार्टमेंट की तरफ से श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
उन्होंने बताया कि एक हफ्ते तक चल सिलसिलेवार आयोजनों के तहत सभी जिलों में इस तरह के आयोजन किए गए, जिसमें पुलिस कमिश्नर और एसएसपी की तरफ से संबंधित जिलों में रहने वाले 1500 से ज्यादा शहीदों के परिवारों से मुलाकात की गई और उनका कुशलक्षेम जाना गया,  साथ ही उन्हें सम्मान के तौर पर उपहार भेंट किए गए। पिछले दस दिन में हुई गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल है:
प्रमुख स्थानों पर शहीद पुलिस मुलाजिमों-अधिकारियों को समर्पित बैंड डिस्पले
बहादुर पुलिस वालों की याद में कैंडल मार्च निकालना
पुलिस पब्लिक स्कूलों में निबंध लेखन, डिबेट्स और प्रश्न मुकाबलों का आयोजन करना
शहीदों की याद में मिनी मैराथ, वाकाथॉन, साइकिल रैलियां इत्यादि आयोजित करना
पुलिस लाइंस में शहीदों की याद में पौधारोपण करना
युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए शहीद पुलिस मुलाजिमों-अधिकारियों के स्कूलो में प्रमुख स्थानों पर उनकी तस्वीरें प्रदर्शित करना
अखबारों में बहादुरी के कारनामे करने वाले शहीदों की कहानियां व किस्से प्रकाशित करना
एसएसपी पटियाला की तरफ से 25 पुलिस अधिकारियों के साथ पटियाला जिले में शहीद पुलिस मुलाजिमों-अधिकारियों की याद में प्लाजमा डोनेट करना
इस दौरान डीजीपी ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया, जिसकी अगवाई शहीद भगत सिंह नगर की डीएसपी दीपिका सिंह ने की। इसके बाद डीजीपी ने पीएपी कैंपस में स्थित शहीदी स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। आईएसटीसी कमांडेंट संदीप कुमार शर्मा ने पिछले साल देशभर में शहीद हुए 264 पुलिस मुलाजिमों व अधिकारियों के नाम पढ़े। इस मौके पर डीजीपी इकबालप्रीत सिंह सहोता, एडीजीपी गौरव यादव, कुलदीप सिंह, गुरप्रीत कौर दियो, अर्पित शुक्ला, एनके अरोड़ा, अमरदीप सिंह राय, वी नीरजा, आईजी अरुणपाल सिंह, गुरदर्शन सिंह संधू, डॉ. एसके कालिया, पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर, कमांडेंट 7वीं बटालियन पीएपी हरकमलप्रीत सिंह खख, कमांडेंट 7वीं आईआरबी परमबीर सिंह परमार व अन्य मौजूद थे।

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