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सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने विधानसभा में लाए गए कृषि बिलों पर बहस के दौरान केंद्र सरकार को लगाई लताड़

     *   मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार हर बलिदान देने के लिए तैयार-रंधावा
     *   पानी के बिल रद्द करने के बाद आज खेती बिल लाकर कैप्टन ने फिर पंजाब को समर्पित होने का सबूत दिया
    चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) :  सरहदी राज्य पंजाब को उतना ख़तरा पड़ोसी मुल्कों से नहीं जितना ख़तरा मोदी सरकार से है। केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी की आड़ में तीन किसान विरोधी कानून बनाकर किसानों, मज़दूरों, आढ़तियो की कमर तोड़ दी है। यह बात सहकारिता एवं जेल मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने पंजाब विधानसभा में कही।
स. रंधावा मंगलवार को देश के संघीय ढांचे पर हमला करते हुए राज्यों के अधिकार क्षेत्र वाले कृषि क्षेत्र में केंद्र द्वारा लाए गए किसान विरोधी कृषि कानूनों के मुकाबले के लिए पंजाब विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा लाए गए चार बिलों पर बहस में हिस्सा ले रहे थे।
डेरा बाबा नानक से विधायक स. रंधावा ने कहा, ‘‘मैं उस धरती से आता हूँ जहाँ बाबा नानक जी ने अपने हाथों से खेती करके काम करने का संदेश दिया था, इसलिए कृषि हमारे लिए आमदन या धंधा नहीं बल्कि बाबा नानक द्वारा बख्शी गई रहमत है।’’ स. रंधावा ने कहा कि किसान के लिए खेती धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों पक्ष से जुड़ी हुई है, इसलिए केंद्र सरकार का इस पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करूँगा। उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री जी ने इस्तीफ़ा देने की बात करके साफ़ कर दिया है कि राज्य सरकार काले खेती कानूनों के खि़लाफ़ कोई भी बलिदान देने को तैयार है।
स. रंधावा ने कहा कि सितम जऱीफी की बात यह है कि कृषि संबंधी फ़ैसला देश के प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री तोमर कर रहे हैं जिनके पास ख़ुद कृषि योग्य एक इंच भी खेती की ज़मीन नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब को देश की आबादी का दो प्रतिशत हिस्सा समझ कर अपने तुगलकी फरमान थोपने से सावधान रहे, क्योंकि यह वही पंजाब है जिसने मुगलों, अबदालियों और अंग्रेज़ों की अधीनता नहीं मानी। 2 प्रतिशत पंजाबियों ने देश की आज़ादी के संघर्ष के दौरान 80 प्रतिशत बलिदान दिए और देश के अन्न-भंडारों में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस कौम का जन्म संघर्ष में से हुआ हो, उसे दबाया नहीं जा सकता।
स. रंधावा ने नाबार्ड की रिपोर्ट समेत अलग-अलग रिपोर्टें भी सदन में रखी, जिनसे स्पष्ट होता है कि जितना भी राज्यों में यह कानून पहले लागू हैं, वहां किसानी की हालत बहुत बुरी है। अब केंद्र सरकार पंजाब की किसानी को तबाह करने पर तुली हुई है। स. रंधावा ने कहा कि किसानों की बाह पकडऩे के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि पानी का समझौता रद्द करने के बाद आज फिर यह बिल लाकर मुख्यमंत्री ने पंजाबियों को समर्पित होने का सबूत दिया है।

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