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कृषि बिलों पर टिप्पणी करने से पहले मेरे तीन सवालों के जवाब दो – कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर को पुछा

* शर्मनाक राजनैतिक नौटंकियों के द्वारा किसानों के संघर्ष को हाइजैक करने की कोशिशों के लिए अकाली दल के प्रधान की सख़्त आलोचना
* प्रधानमंत्री को किसानों के प्रति जि़म्मेदारी याद करवाने पर सुखबीर का मज़ाक उड़ाते हुये पूछा आपका अपनी जि़म्मेदारी के बारे क्या कहना
चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कृषि कानूनों पर सुखबीर बादल की तरफ से उन पर और उनकी सरकार पर सवाल करने के नैतिक हक को चुनौती देते हुये अकाली दल के प्रधान को इस मुद्दे पर पहले उनके तीन मुख्य सवालों के जवाब देने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री ने सुखबीर बादल की तरफ से अपनी पार्टी के एजंडे को थोपने के लिए किसानों के आंदोलन को हाइजैक करने की कोशिशों की सख़्त आलोचना की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखबीर बादल को काले कृषि कानूनों पर तब तक कोई भी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जब तक वह तीन अहम सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं देते जबकि पंजाब का हर किसान इन सवालों के जवाब अच्छी तरह जानता है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर बादल को सवाल करते पूछा कि जब केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से कृषि आर्डीनैंसों को पहली मंजूरी दी गई थी तो उस समय पर हरसिमरत कौर बादल ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? इन कृषि कानूनों के विरुद्ध सहमति बनाने के लिए उन (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) की तरफ से बुलायी गई सर्वदलीय मीटिंग के दौरान सुखबीर ने राज्य सरकार का समर्थन क्यों नहीं किया? इन कृषि कानूनों पर विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया था तो भाजपा को छोड़ कर बाकी पार्टियाँ प्रस्ताव के हक में खड़ी थी परन्तु अकालियों ने सदन का बहिष्कार क्यों किया?
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पिछले कई हफ़्तों से सुखबीर और हरसिमरत से कई बार यह सवाल पूछ चुके हैं परन्तु अकाली नेता इनका जवाब देने से भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि दोनों के पास अपने किये का जवाब देने के लिए कोई आधार नहीं बचा और इनकी यह कार्यवाहियां ही स्थिति को आज इस हद तक ले आईं हैं कि किसानों का सारा दारोमदार ही दांव पर लगा हुआ है।
सुखबीर बादल की तरफ से प्रधानमंत्री को किसानों के साथ बातचीत करने और लोगों की आवाज़ सुनने संबंधी की गई तथाकथित अपील पर प्रतिक्रया देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री को उस समय पर किसानों के प्रति जि़म्मेदारी निभाने के लिए याद क्यों नहीं दिलाई जब किसान भाईचारे को तबाह करने के लिए वह भाजपा के साथ घी-खिचड़ी थे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर को पूछा, ‘आपने अपनी जि़म्मेदारी संबंधी आपका क्या कहना है? क्या आप यह मान रहे हो कि आप पंजाब के लोगों ख़ास कर किसानों के प्रति अपना फज़ऱ् निभाने में कभी भी संवेदना ज़ाहिर नहीं की थी?’
सुखबीर बादल की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर समान विचारधारा वाली पार्टियों का मंच बनाने संबंधी की बात पर मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुये कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने तो पहले ही ‘समान विचारधारा वाली पार्टियों’ के गठजोड़ को छोड़ दिया है जिनकी सांझी रूचि कृषि को तबाह करने और कॉर्पोरेट दिग्गजें को खुश करना है जिन्होंने इनको कंट्रोल किया हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सुखबीर को किसानों के कल्याण में कोई रूचि होती तो वह केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरुद्ध पंजाब सरकार की लड़ाई का समर्थन करने के लिए मैदान में उतरता।
अकाली लीडरशिप पर दोहरी बोली बोलने और किसानों को गुमराह करने के लिए झूठी उम्मीदों दिखाने पर सख़्त आलोचना करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और पंजाब के अन्य वर्ग बादलों की ऐसी नौटंकियों के झाँसे में नहीं आऐंगे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों के हित अडानी और अम्बानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को बेचने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए सरकार के साथ हिस्सेदारी निभाने के बाद बादल अब अपने किये हुए पाप धोने के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मार रहे हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सुखबीर की तरफ से अब प्रधानमंत्री को की जा रही विनतियाँ भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असली बात तो यह है कि पंजाब के किसानों में से अपना मान पूरी तरह गवा लेने के बाद अकाली अब अपने गुनाह छिपाने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सावधान करते हुये कहा कि यह ढकोसला अब काम नहीं आऐंगे और यदि सुखबीर के में अभी भी कोई शर्म बाकी है तो उसे अपने किसान विरोधी और पंजाब विरोधी कामों के लिए माफी मांगणी चाहिए और राज्य सरकार पर हमले करने में वक्त गवाने की बजाय सुधरने की कोशिश करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जब आपको हमारा साथ देना चाहिए था तो आप उस समय पर हमारे साथ नहीं खड़े हुये जिस कारण स्थिति इस हद तक पहुँच गई है। अब भी यदि आप थोड़ा बहुत कुछ कर सकते हो तो हमारे यत्नों में हाथ बटाएं और अपने राजनैतिक हितों के लिए किसानों के संघर्ष को हथियाने की कोशिशें बंद करो।

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