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जिला पंचायत का कारनामा करोड़ों की जमीन का खेल।

छिन्दवाड़ा(भगवानदीन साहू)- के नेतृत्व में अन्य लोंगों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर करोड़ों की जमीन के खेल की जाॅच की मांग की जिसमें बताया कि 2 सितम्बर को मेरे द्वारा लिंगा ग्राम के कुछ जागरूक प्रतिनिधियों के साथ एक प्रार्थना पत्र जिला कलेक्टर को दिया था। जिसका विषय था, कोरोना माहमारी के आड़ में करोड़ों की जमीन का खेल की जाॅंच। जिला प्रषासन ने सारी आपत्ति को दरकिनार करते हुये, भू-माफिया के ईशारे पर गौशाला हेतू शासन से लगभग 34 लाख रूपये का फंड आवंटित करवा लिया। जिले का किसान अतिवृष्टि, फसल चैपट, कोरोना माहमारी के चलते आम व्यापारियों के काम-धंधे चैपट हो गये है। आम आदमी कोरोना से जंग लड़ रहा है। वहीं जिला पंचायत एवं मोहखेड़ ब्लाॅक के राजस्व अधिकारी करोड़ों की जमीन का खेल अपने स्वार्थ के लिए खेल रहें है। यह जमीन लिंगा हाईवें के समीप जिसका खसरा नं. 226/1/2 एवं 226/9/2 है जो 387.98 हेक्टेयर है। अब यहाॅं सरकारी गौशाला प्रारंभ होगी। जिसके निर्माण कार्य हेतू 15 लाख रूपये आवंटित किया गया है। पंचायत में सूचना मिलते ही सरपंच पति, इंजिनियर, जिला पंचायत के अधिकारी जमीन का नाप-जोक करने लगे। उक्त अधिकारी ने जोश-जोश में खसरा नं. 226 की जमीन का नाप-जोक कर दिया। जब साइट वाली जमीन के किसान ने लेआउट का नाप जोक का विरोध किया तो सरपंच पति नराज होकर दादागीरि पर उतर आया। बाजू वाले कृषक ने जब इंजिनियरों को जमीन के दस्तावेज दिखाये ंतब सरपंच पति का गुस्सा कम हुआ। जिले का किसान वैसे ही परेशान है। अच्छा हुआ बीमारी सें जूझ रहा अपाहिज सरपंच पति के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासन को चाहिए की स्वयं का स्वार्थ सिध्द करने के चक्कर में, भू-माफिया को पुरूस्कृत करने के चक्कर में ग्रामीण परिवेश में वेमनास्ता ना फैलायें। अच्छा प्रशासन का निर्णय है, गौशाला प्रारंभ होनी चाहिए। पर हाईवें को वहाॅं से हस्तांतरित कर दिया जायें, क्योंकि हाईवें है तो गौशाला के पशुओं की दुर्घटना की सम्भावना हमेशा रहेगी। दूसरा उक्त जमीन पर बड़े-बड़े वृक्ष है, उनकों भी कहीं हस्तांरित करें। तीसरा ग्राम में मवेशी चारा-पानी के लिए आते है, उनकी भी व्यवस्था करें। चौथा गत दो वर्ष पूर्व जिलें में प्रशासन ने कुछ सरकारी गौशाला प्रारंभ किये है, उनकीं दुर्दशा का भी अध्ययन करें। पाॅचवा शासन ने सत्ता में महिला की भागीदारी के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण तय किया है। पर हर जगह महिला जनप्रतिनिधि के पति ही कार्य कर रहें, इस पर भी लगाम लगाना है। छटवा उक्त गौशाला चलाने हेतू एक ग्रामीण समिति बनाने का नियम इसमें जन्म से लिंगा ग्राम में निवासरत लोंगों को ही शामिल करें। ऐसा न हो कि जिले के उच्चाधिकारियों को योग एवं ध्यान की शिक्षा देने वाले इस जमीन के खेल के शील्पकार को शामिल कर लें। जिला कलेक्टर से प्रार्थना है कि, जनता का पैसा या शासन के पैसे का जमकर दुरूपयोग तो नहीं हो रहा है। कार्यवाही करने की मांग की गयी।

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