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सुखबीर बादल तुरंत अकाली दल की अध्यक्षता से इस्तीफ़ा दे-तृप्त बाजवा

    *   ‘भाजपा से नाता तोडऩे से बेपर्दा हुई दोगली राजनीति पर फिर पर्दा डालने की कोशिश’
    *   ‘अकाली दल अपनी संकुचित राजनीति के लिए धार्मिक भावनाओं और संस्थाओं को इस्तेमाल करने से गुरेज़ करे’
चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने आज यहाँ कहा है कि शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को तुरंत अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए, क्योंकि उनकी पार्टी मोदी सरकार में लम्बे समय से हिस्सेदार होने के बावजूद पंजाबियों के हितों की रक्षा करने में बुरी तरह से असफल हुई है। उसे अब कोई नैतिक और राजनैतिक हक नहीं है कि वह अपने पद पर बने रहें।
श्री बाजवा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से नाता तोडक़र राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड़ से बाहर आने का फ़ैसला दरअसल अकाली दल का ‘‘कबूलनामा’’ है कि वह अब तक मुल्क में हकीकी फेडरल ढांचा लागू करने, रायपेरियन सिद्धांत और बेसन सिद्धांत के अनुसार नदी के पानी का वितरण करने, पंजाबी बोलने वाला इलाका और चंडीगढ़ पंजाब को देने, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करके किसानों को फसलों के लाभप्रद भाव देने और सज़ाएं भुगतने के बावजूद लम्बे समय से जेलों में सड़ रहे सिख कैदियों को रिहा करने की लड़ाई लडऩे की जगह शिरोमणि अकाली दल की मौजूदा लीडरशिप अपने निजी हितों की ही पूर्ति तक सीमित रह गई है।
पंचायत मंत्री ने आज यहाँ जारी एक प्रैस बयान में कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा से नाता किसी उसूल या नैतिकता से नहीं तोड़ा बल्कि राजनैतिक मजबूरी के कारण तोड़ा है, क्योंकि पंजाबियों ने 25 सितम्बर को अकाली दल द्वारा दिए गए चक्का जाम के बुलावे को पूरी तरह नजऱअंदाज़ करके यह दिखा दिया कि वह अब अकालियों के झाँसे में नहीं आऐंगे। उन्होंने कहा कि पंजाबियों के सातवें आसमान पर चढ़े गुस्से और जोश ने अकाली लीडरशिप के होश टिकाने ला दिए और उसे मजबूरन किसान विरोधी बिलों की हिमायत का पिछले चार महीनों से आलापा जा रहा आटे की चक्की का राग छोडक़र मोदी सरकार से भी बाहर आना पड़ा और भाजपा से भी अपना ‘‘नाख़ुन-मांस वाला रिश्ता’’ तोडऩा पड़ा। अकाली दल की हालत अब ‘‘न खुदा ही मिला न विसाल-ऐ-सनम, न इधर के रहे न उधर के हुए’’ वाली हो गई है।
श्री बाजवा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल द्वारा लम्बे समय से की जा रही राजनैतिक दोगली राजनीति अब जब कृषि बिलों के मामले पर बिल्कुल ही नंगा हो गई है तो इस पर फिर पर्दापोशी करने के लिए ही अकाली दल की मौजूदा लीडरशिप ने पहले मोदी सरकार से बाहर आने और अब भारतीय जनता पार्टी से नाता तोडऩे का फ़ैसला करने के पापड़ बेल रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले अकाली दल की मौजूदा लीडरशिप ने प्रकाश सिंह बादल से भी कृषि अध्यादेशों के हक में बयान दिलाकर उनकी प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाई।
पंचायत मंत्री ने अकाली लीडरशिप से पूछा कि अगर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ही किसानों को कृषि अध्यादेशों सम्बन्धी गुमराह कर रहे थे तो अब आपको कौन गुमराह कर रहा है? उन्होंने कहा कि अकाली नेता बताएं कि जो कृषि अध्यादेश किसानों के हक में थे वही अध्यादेश कानून बनते समय रातों-रात किसान विरोधी कैसे बन गए?
सुखबीर सिंह बादल द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह से पद से इस्तीफ़ा देने की की गई माँग को बेतुकी बयानबाज़ी करार देते हुए श्री बाजवा ने कहा कि दरअसल अकाली नेता बौखला गए हैं और वह बिना सिर पैर की बातें कर रहे हैं।
शिरोमणि अकाली दल द्वारा पहली अक्तूबर को पंजाब में स्थित सिख पंथ के महान तख्तों से अकाली मार्च शुरू करने के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए श्री बाजवा ने कहा कि अकाली दल को अपनी राजनीति के लिए धर्म की आड़ लेने से गुरेज़ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकाली दल द्वारा सिखों की धार्मिक भावनाओं और संस्थाओं को अपने संकुचित राजसी हितों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल करने की दोषपूर्ण नीति ने पंजाब को दो दशक आतंकवाद की भट्टी में झोंक कर रखा था।

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