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पंजाब द्वारा उच्च शिक्षा के प्रसार हेतु यूनिवर्सिटियों के लिए बनाए गए क्षेत्र की शर्त में छूट का फैसला

*  कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा लिया फैसला राज्य में और निजी यूनिवर्सिटियों की स्थापना का रास्ता साफ करेगा
*  कैबिनेट द्वारा पंजाब कोऑपरेटिव ऑडिट (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्ज, 2016 में संशोधन को मंजूरी
चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : राज्य में उच्च शिक्षा को और अधिक प्रचारित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब कैबिनेट ने गुरूवार को बहु-कार्यक्षेत्र वाली यूनिवर्सिटियों के लिए बनाए गए क्षेत्र की शर्त 50000 वर्ग मीटर से घटाकर 30000 वर्ग मीटर और एक ही कार्य क्षेत्र वाली यूनिवर्सिटियों के लिए यह शर्त 20000 वर्ग मीटर से घटाकर 10000 वर्ग मीटर किये जाने का फैसला कर लिया है।
सरकारी प्रवक्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा हुई पंजाब मंत्रीमंडल की मीटिंग के बाद बताया कि इसी लिए ‘द पंजाब प्राईवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010’ में संशोधन करने का फैसला भी किया गया है।
यह फैसला मुख्यमंत्री की मंजूरी से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुख्य सचिव के नेतृत्व में गठित की गई कमेटी की सिफारिशों के अनुसार ही लिया गया है जिससे राज्य में नयी निजी यूनिवर्सिटियों की स्थापना के लिए अलग-अलग स्पांसर पक्षों से 2010 की नीति के अलग-अलग प्रावधानों में छूट/संशोधन हेतु प्राप्त हुई अनुरोधों पर विचार किया जा सके।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि उपरोक्त नीति के प्रावधान 4.5 (4) के अनुसार पंजाब में बहु-कार्यक्षेत्र वाली यूनिवर्सिटियों की स्थापना के लिए बनाए गए क्षेत्र सम्बन्धी शर्त 50000 वर्ग मीटर है जो कि भारत भर में सबसे ज्यादा है। इसीलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि इस नीति के मौजूदा प्रावधान 4.5 (ए) (4) में संशोधन किया जाये जिससे निर्माण क्षेत्र की शर्त को घटाकर बहु-कार्यक्षेत्र वाली यूनिवर्सिटियों के पक्ष से 30000 वर्ग मीटर और एक ही कार्य क्षेत्र वाली यूनिवर्सिटियों के लिए 15000 वर्ग मीटर किया जा सके।
संशोधित नीति से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और ज्यादा पूँजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और यह उम्मीद की जा रही है कि दो और यूनिवर्सिटियाँ, जो कि वैश्विक स्तर की यूनिवर्सिटियों से जुड़ी होंगी, द्वारा पंजाब में अपने कैंपस स्थापित किये जाएंगे।
कैबिनेट द्वारा 2010 की नीति के मौजूदा प्रावधान 4.3 (जी) को भी संशोधित करने का फैसला किया गया जिससे प्रायोजित करने वाली संस्था पट्टे पर ली गई जमीन, किसी सरकारी अथॉरिटी या ग्राम पंचायत से ली गई हो, पर निजी यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पात्र बन जायेगी। बशर्ते कि यह पट्टा या लीज कम-से-कम 33 वर्षों तक के लंबे समय के लिए हो।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि पंजाब प्राईवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जिसके अंतर्गत पट्टे पर जमीन लेकर यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाये जबकि भारत के काफी राज्यों में जमीन की जरूरत सम्बन्धी ऐसा प्रावधान है।
पंजाब प्राईवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010, जिसका मकसद राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता भरपूर निजी शिक्षा को उत्साहित करना है, के अंतर्गत राज्य सरकार ने अभी तक 14 यूनिवर्सिटियों को मंजूरी दी है। इनके अलावा चार और निजी यूनिवर्सिटियाँ स्थापित करने बाबत प्रस्ताव विचार अधीन हैं।
पंजाब कोऑपरेटिव ऑडिट (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्ज में होगा संशोधन
कैबिनेट द्वारा ‘द पंजाब कोऑपरेटिव ऑडिट (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्ज, 2016’ को संशोधित किए जाने की मंजूरी दे दी गई है और इसके अंतर्गत सीनियर सहायक (लेखा) के पद को सीनियर सहायकों में विलय किया जायेगा जिससे सहकारिता विभाग के ऑडिट विंग में काम करते सीनियर सहायक (लेखा) की तरक्कियों का रास्ता साफ हो सके। यह नियम पंजाब गजट में अधिसूचना की तारीख से प्रभावी होंगे।

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