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किसान विरोधी कृषि ऑर्डीनैंसों के हक में बयान देने के पीछे प्रकाश सिंह बादल अपनी मजबूरी बताए-कांग्रेसी नेता

   *   कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों ने किसान विरोधी पाले में रहने के लिए अकाली दल के सरपरस्त को घेरा
   *   कुर्बानियों का राग अलापने वाले बड़े बादल के राज में ही हुई धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी
चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : राज्य के राजनैतिक नक्शे से ग़ायब हुए अकाली दल को पुनर्जीवित करने के लिए हाथ पैर मार रहे बादल परिवार के प्रमुख द्वारा कृषि ऑर्डीनैसों के हक में दिए बयान ने पंथ और किसान हितैषी पार्टी का चेहरा नंगा कर दिया। कांग्रेसी नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह पहले यह बताएं कि किस मजबूरी के चलते उन्होंने किसानी का गला घोटने वाले ऑर्डीनैंसों की हिमायत की है।
आज यहाँ पार्टी हैडक्वार्टर से जारी साझे प्रैस बयान में पाँच कैबिनेट मंत्रियों सुखजिन्दर सिंह रंधावा, गुरप्रीत सिंह कांगड़, बलबीर सिंह सिद्धू, अरुणा चौधरी और भारत भूषण आशु और छह विधायकों दर्शन सिंह बराड़, कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों, प्रीतम सिंह कोटभाई, बरिन्दरमीत सिंह पाहड़ा, कुलबीर सिंह जीरा और कुलदीप सिंह वैद्य ने कहा कि 60 साल की राजनीति में अपने आप को किसान हितैषी कहलवाने वाले प्रकाश सिंह बादल ने आज अपनी बहु की केंद्रीय मंत्री की कुर्सी की खातिर किसानों का गला घोटने वाले कृषि ऑर्डीनैंसों की हिमायत करके किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने कहा कि ऑर्डीनैंसों की हिमायत करते समय बुजुर्ग अकाली नेता को अपनी मजबूरी भी बता देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल हमारी सरकार पर किसानों को गुमराह करने का दोष लगा रहे हैं परन्तु वास्तविकता यह है कि बादल परिवार अपनी कुर्सी की खातिर किसानों के साथ द्रोह कर रहा है।
कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि कैप्टन सरकार और कांग्रेस पार्टी और निशाना साधने से पहले अकाली दल के सरपरस्त को अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बलिदानों का राग अलापने वाले बड़े बादल के मुख्यमंत्री रहते हुए ही धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी हुई थी। और तो और बेअदबी के कारण दुखी हृदय के साथ शांतमयी ढंग से गुरू का जाप कर रही सिख कौम पर अंधाधुन्ध गोलियाँ चलाई र्गइं। धर्म की ठेकेदार बनी पार्टी के राज में नशों का कारोबार फला-फूला जिसका नतीजा हमारी सरकार को भुगतना पड़ा।
कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों ने कहा कि पूर्व अकाली मुख्यमंत्री द्वारा अपनी पार्टी को राजनैतिक नक्शे पर उभारने के लिए की जा रही कोशिशें मगरमच्छ के आंसू के समान हैं जिन पर राज्य के लोग अब बिल्कुल भी यकीन नहीं करेंगे। अकाली दल हर मोर्चे पर विफल हो चुका है। इसी पार्टी के कब्जे वाली शिरोमणि कमेटी में पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बीड़ों का गायब होना भी इस पार्टी के माथे पर एक और कलंक है।

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