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GST: मुआवजे पर राज्यों के पाले में गेंद, केंद्र ने दिए दो विकल्प

नई दिल्ली।(ब्यूरो) अपने बकाए GST मुआवजे को लेकर राज्यों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. गुरुवार को हुई GST काउंसिल की बैठक में भी ये मुद्दा जोरदार तरीके से उठा. हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों के सामने इस मुश्किल से निकलने के दो रास्ते रखे हैं,और ये राज्यों पर छोड़ा है कि वो कौन सा रास्ता चुनते हैं. वित्त मंत्री के मुताबिक राज्यों के राजस्व में आई कमी को दूर करने के लिए फिलहाल दो विकल्प हैं, जिसमें रिजर्व बैंक की बड़ी भूमिका होगी.

विकल्प नंबर 1. राज्य अपना पूरा GST मुआवजा जो कि 2.35 लाख करोड़ रुपये होता है, RBI से सलाह मशविरा के बाद बाजार से उठाएं.

विकल्प नंबर 2. रिजर्व बैंक की सलाह से राज्यों को एक विशेष विंडो दिया जाए ताकि वो एक तय ब्याज दर पर 97,000 करोड़ रुपये रकम उधार हासिल ले सकें. इस पैसे को पांच साल बाद वापस किया जा सकता है, क्योंकि तब तक कम्पेनसेशन सेस से राज्यों को काफी फंड मिल चुका होगा.

इन दोनों विकल्पों पर अब राज्यों को 7 दिन के अंदर अपना जवाब देना है. सात दिन के बाद एक फिर एक बैठक होगी. ये दोनों विकल्प सिर्फ इसी साल के लिए होंगे. GST काउंसिल की अगली बैठक अप्रैल 2021 में होगी. तब मौजूदा हालातों की फिर से समीक्षा की जाएगी.

सरकार के पास नहीं हैं पैसे!
GST मुआवजे को लेकर केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब ने अपनी नाराजगी जताई और केंद्र से जल्द से जल्द पैसा देने की मांग की. राज्यों ने केंद्र पर उन्हें धोखा देने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं. वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय के मुताबिक कोरोना की वजह से मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में GST मुआवजे का अंतर 3 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, इसमें से 65,000 करोड़ रुपये की भरपाई सेस से होगी.

राज्यों को मई, जून, जुलाई और अगस्त यानी चार महीने का मुआवजा नहीं मिला है. सरकार ने हाल में वित्त मामलों की स्थायी समिति को बताया है कि उसके पास राज्यों को मुआवजा देने के लिए पैसे नहीं हैं. GST काउंसिल की बैठक के बाद वित्त सचिव ने बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए GST मुआवजे के रूप में 1.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जारी किए. इसमें मार्च में 13,806 करोड़ रुपये भी शामिल हैं. 2019-20 के लिए जारी मुआवजे की कुल राशि 1.65 लाख करोड़ है, जबकि सेस 95,444 करोड़ था.

टू-व्हीलर्स पर फिलहाल राहत नहीं
उम्मीद थी कि वित्त मंत्री टू-व्हीलर्स पर GST छूट को लेकर काउंसिल में चर्चा करेंगी लेकिन बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई. आपको बता दें कि बीते दिनों पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टू-व्हीलर्स पर GST कटौती के संकेत दिए थे. वित्त मंत्री ने कहा था कि दोपहिया वाहन न तो विलासिता (luxury) का सामान है और न ही यह अहितकर सामान (sin goods) की श्रेणी में आता है इसलिये इस पर जीएसटी दर में संशोधन का मामला बनता है. उम्मीद है कि अगली GST काउंसिल की बैठक में ये मुद्दा उठे.

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