Monday , September 28 2020
Breaking News
Home / दिल्ली / बॉबी देओल की क्लास के सबसे ‘फिसड्डी’ स्टूडेंट्स ने फ़िल्म को ढेर

बॉबी देओल की क्लास के सबसे ‘फिसड्डी’ स्टूडेंट्स ने फ़िल्म को ढेर

मुंबई। हिंदी सिनेमा में पुलिस, राजनीति और गैंगस्टरों के गठजोड़ पर इतनी फ़िल्में बन चुकी हैं कि अब इस विषय को भुनाना फ़िल्ममेकर्स के लिए एक चुनौती बन गया है। मुंबई का अंडरवर्ल्ड, गैंगवार और एनकाउंटर दर्शक इतनी दफ़ा पर्दे पर देख चुके हैं कि कुछ नया नहीं लगता। अतुल सभरवाल निर्देशित क्लास ऑफ़ 83 की सबसे बड़ी समस्या यही है, साथ ही इस फ़िल्म की मजबूरी भी।

चूंकि फ़िल्म एक पीरयड नॉवल का अडेप्टेशन है, इसलिए लेखक के पास ज़्यादा प्रयोग करने की गुंजाइश भी नहीं रही होगी। ख़ैर, क्लास ऑफ़ 83 नेटफ्लिक्स पर 21 अगस्त को रिलीज़ हो गयी और इसी के साथ करियर के 25वें साल में बॉबी देओल का डिजिटल वर्ल्ड में डेब्यू भी हो गया। क्लास ऑफ़ 83 की कहानी एस. हुसैन ज़ैदी के नॉवल क्लास ऑफ़ 83- द पनिशर्स ऑफ़ मुंबई से ली गयी है। हालांकि फ़िल्म के शीर्षक से पनिशर्स ऑफ़ मुंबई हटा दिया गया है।

खोजी पत्रकार रहे ज़ैदी आपराधिक पृष्ठभूमि (खासकर अंडरवर्ल्ड) पर किताबें लिखने के माहिर माने जाते हैं। उनकी लिखी कई किताबों पर फ़िल्में बनायी गयी हैं। मुंबई धमाकों पर आधारित उनकी किताब ब्लैक फ्राइडे पर अनुराग कश्यप ने ब्लैक फ्राइडे बनायी थी। संजय गुप्ता की शूट आउट एड वडाला में ज़ैदी की एक और चर्चित किताब डोंगरी टू दुबई के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था।

…और अब ‘क्लास ऑफ़ 83’, जिसमें 80 के दौर की मुंबई और अंडरवर्ल्ड को दिखाया गया है। मुंबई की मरणासन्न मिलों के मजदूरों की ख़राब आर्थिक स्थिति और मिलों पर गिद्ध-दृष्टि जमाये बैठे बिल्डरों के उद्भव को भी कहानी में संवादों के ज़रिए छुआ गया है। मुंबई में अंडरवर्ल्ड के फलने-फूलने की एक बहुत बड़ी वजह मिलों से बेरोज़गार हुए युवा भी रहे।

मुंबई और अंडरवर्ल्ड की यह कहानी बहुत पुरानी है, मगर अभिजीत देशपांडे की चुस्त पटकथा ने इसे ऊबाऊ नहीं होने दिया। क्लास ऑफ़ 83 मूल रूप से उस आइडिया का बीज पड़ने और उसके विकसित होने की कहानी है, जिसमें गैंगस्टरों के ख़ात्मे के लिए पुलिस को सिर्फ़ एनकाउंटर का रास्ता नज़र आता है। सियासत और अंडरवर्ल्ड के अटूट गठजोड़ ने पुलिस महकमे के लिए उन्हें ख़त्म करना लगभग नामुमकिन बना दिया था। यह भी कह सकते हैं कि क्लास ऑफ़ 83 मुंबई में पहले एनकाउंटर स्क्वॉड के बनने की कहानी है।

बॉबी देओल विजय सिंह नाम के आईपीएस अफ़सर के किरदार में हैं, जिसे सज़ा के तौर पर पुलिस एकेडमी का डीन बनाकर भेज दिया जाता है। विजय सिंह निजी ज़िंदगी में एक हारा हुआ इंसान है। अपने परिवार से ज़्यादा अपने फ़र्ज़ को उसने प्राथमिकता दी, मगर सिस्टम ने उसे ईनाम की जगह सज़ा दी। यह अपराध बोध विजय सिंह की मनोस्थिति का हिस्सा बन चुका है। बॉबी देओल ने विजय सिंह के गिल्ट और छटपटाहट को कामयाबी के साथ पर्दे पर उकेरा है।

यह संयोग ही है कि लगभग 25 साल के करियर में बॉबी को कभी ख़ाकी वर्दी पहनने का मौक़ा नहीं मिला। पहली बार वो एक आईपीएस अफ़सर के रोल में दिखे और पहली ही बार किसी फ़िल्म में दादा भी बने। उम्र और अदाकारी के लिहाज़ से डीन विजय सिंह के रोल में बॉबी जंचे हैं। अपने करियर को ट्रैक पर लाने के लिए बॉबी की प्रतिबद्धता डीन विजय सिंह के किरदार की संजीदगी के ज़रिए बखूबी बाहर आती है।

क्लास ऑफ़ 83 के एक छोर पर बॉबी हैं तो दूसरा छोर संभाला पांच नवोदित कलाकारों ने, जो पहले एकेडमी के शरारती रंगरूट और फिर तेज़-तर्रार पुलिस अफ़सरों के रोल में नज़र आये। एकेडमी में रंगरूटों से लेकर एनकाउंटर करते पुलिस अफ़सरों के ट्रांसफॉर्मेशन को इन कलाकारों ने बड़ी सहजता और कामयाबी के साथ निभाया। इनका अभिनय फ़िल्म की पटकथा को कॉम्प्लीमेंट करता है।

सहयोगी किरदारों में जॉय सेनगुप्ता, भ्रष्ट सीएम के किरदार में अनूप सोनी और और एकेडमी के ट्रेनर के रोल में विश्वजीत प्रधान ने अच्छा काम किया है। जॉय सेनगुप्ता और विश्वजीत प्रधान को दर्शक आर्या में देख चुके हैं। विश्वजीत प्रधान का अभिनय देखकर लगता है कि उन्हें अधिक स्क्रीन टाइम मिलना चाहिए।

अतुल सभरवाल के निर्देशन में संतुलन साफ़ नज़र आता है। अतुल ने इससे पहले औरंगज़ेब निर्देशित की थी। टीवी सीरीज़ पाउडर बना चुके हैं। क्लास ऑफ़ 83 को अतुल ने भटकने नहीं दिया। सभी कलाकारों का सही इस्तेमाल किया है। क्लास ऑफ़ 83 की अवधि भी फ़िल्म को सपोर्ट करती नज़र आती है। इसके लिए इसके संपादन विभाग को बधाई देनी होगी। एक घंटा 38 मिनट की फ़िल्म घिसी-पिटी कहानी के बावजूद बोझिल नहीं लगती।

About Yameen Shah

Check Also

स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर वेबीनार में की सहभागिता

गुरसराय,झाँसी(डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान)- कार्यक्रम खेल मंत्रालय भारत सरकार एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा मंत्री …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share