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कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एक-दिवसीय विधानसभा सैशन पर संकुचित राजनीति करने पर अकाली दल और आप को आड़े हाथों लिया

  *  विधानसभा में अपनी निराशाजनक हाजिरी से सुखबीर द्वारा खुद लोगों के साथ किया गया भद्दा मजाक
  *  अकालियों और आम आदमी पार्टी दोनों को लोगों की कोई परवाह नहीं, सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने तक मतलब
चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : कोविड महामारी के संकटमयी दौर में भी विपक्ष द्वारा पंजाब में अपनी संकुचित राजनीति जारी रखने को आड़े हाथों लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा का एक दिवसीय सैशन बुलाना सरकार की संवैधानिक जरूरत है जैसे इसके द्वारा दो दिन पहले किये अधिकारित ऐलान में स्पष्ट तौर पर बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों के दोषों के उलट लोगों के साथ भद्दा मजाक उनकी सरकार द्वारा नहीं बल्कि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर द्वारा किया गया है, जिसकी बतौर विधायक विधानसभा में हाजिरी का निराशाजनक रिकार्ड दर्शाता है कि उसके द्वारा विधानसभा और इसके सैशन को कितनी कम महत्ता दी जाती है। उन्होंने कहा कि मार्च 2017 से मई 2019 तक विधायक होते हुए सुखबीर द्वारा सैशन के 40 दिनों में केवल 16 दिन हाजिरी भरी गई।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल और आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल सिंह चीमा की प्रतिक्रया पर हैरानी प्रकट करते हुए इसको सिर्फ हास्यप्रद ही नहीं करार दिया बल्कि राज्य के दोनों विरोधी पक्षों द्वारा संवेदनशीलता और सरोकारों को दी गई तिलांजलि का प्रदर्शन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष लोगों की भावनाओं के साथ खेलने पर आमादा हैं जबकि लोगों की एक मात्र चिंता मौजूदा समय में अपने आप को कोरोनावायरस से बचाना है जो पंजाब में शिखर की तरफ बढ़ रहा है और हालातों के फिर सामान्य होने से पहले राज्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
सुखबीर बादल द्वारा टिप्पणी कि एक दिन का सैशन सरकार द्वारा इस बात को सही ठहराने का सबूत है कि यह साशन चलाने का अधिकार खो चुकी है, संबंधी प्रतिक्रया देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार को लोगों द्वारा बहुमत दिया गया है और शिरोमणि अकाली दल के मुट्ठीभर विधायकों के विधानसभा में समर्थन की जरूरत नहीं।
सरकार पर एक दिन का सैशन बुलाने के लिए दबाव सिर्फ संवैधानिक था, मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए सुखबीर को संविधान पढ़ने की अपील की जिसके सिद्धातों और नियमों पर चलना अकालियों ने लंबे समय पहले ही छोड़ दिया था।
यह बताते हुए कि कई मंत्री, विधायक और अधिकारी मौजूदा समय में या तो कोविड पॉजिटिव हैं या एकांतवास में हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि या तो सुखबीर को जमीनी हकीकतों के बारे में पता ही नहीं या इनकी परवाह ही नहीं। राज्य में 34400 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं और अब तक 898 मौतें (अगस्त 18 को एक दिन में 1704 लोगों के पॉजिटिव होने और 35 मौतों की रिपोर्टों सहित) स्थिति बहुत चिंताजनक है। उन्होंने आगे कहा कि 366 लोग ऑक्सीजन स्पोर्ट पर हैं और 3 नाजुक हालत में वैंटीलेटर पर हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में उनकी सरकार सुखबीर की बेतुकी बातों की तरफ ध्यान देने की अपेक्षा गंभीर संकट से निपटने के प्रति और ज्यादा संवेदनशील है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सुखबीर लोगों के हितों के प्रति गंभीरता के साथ चिंतित है तो उसको अपनी शक्ति लोगों को महामारी में से निकालने पर लगानी चाहिए बजाय अपने संकुचित राजनैतिक हितों को उभारने के लिए भड़काऊ बयानबाजी करने के। उन्होंने साथ ही कहा कि निराधार मुद्दों पर अनावश्यक शोर मचाने की अपेक्षा अकालियों को कोविड के साथ लड़ाई में सरकार का साथ देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न ही शिरोमणि अकाली दल और न ही आम आदमी पार्टी के पास लोगों के आगे रखने के लिए कोई भी महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस कारण दोनों द्वारा महामारी के दरमियान शर्मनाक ढकोसलों का सहारा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आप नेता चीमा के दोषों कि पंजाब सरकार अहम मुद्दों पर बहस से भाग रही है, बारे प्रतिक्रया देते हुए पूछा, ‘‘मौजूदा समय में हमारे लिए पूरी ताकत के साथ कोविड के खिलाफ लड़ने के अलावा यहाँ और कौन सा बड़ा गंभीर मुद्दा हो सकता है।?’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय काम करने का है न कि बहस का, परन्तु न ही शिरोमणि अकाली दल और न ही आम आदमी पार्टी इसके प्रति गंभीर है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि इन दोनों पार्टियों का सिर्फ एक ही सरोकार अपने राजनैतिक हितों को पहल देना है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ‘‘हमारे लोग पीडि़त हैं और मर रहे हैं परन्तु अकाली और आम आदमी पार्टी को लोगों की इस पीड़ा के साथ कोई सरोकार नहीं।’’ उन्होंने साथ ही कहा कि यह शिरोमणि अकाली दल का जनविरोधी व्यवहार ही था जिसका मूल्य इसको पिछले कई चुनावों में चुकाना पड़ा है और इसी तरह दिल्ली के लोगों की दुर्दशा के लिए आम आदमी पार्टी का जनविरोधी रवैया जिम्मेदार है।

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