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पंजाब में प्रतिदिन 1000 टैस्ट के सामथ्र्य वाली कोविड -19 टेस्टिंग लैब स्थापित

पंजाब बायोतकनालौजी इनक्यूबेटर राज्य में लाईफ़ साइंसेज़ और बायोटैक क्षेत्र को देगा बढ़ावा

राज्य सरकार की तरफ से 2019 में पी.बी.टी.आई. को कृषि, खाद्य, जल और पर्यावरण के क्षेत्रों सम्बन्धी प्रांतीय विश्लेषण एजेंसी के तौर पर नोटीफाई
चंडीगढ़ /मोहाली, 17 अगस्त:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के सपनों को साकार करते हुए राज्य में लाईफ़ साइंसेज़ और बायोतकनालौजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के मकसद से साल 2005 में इसके संस्थापक सी.ई.ओ. डा. एस.एस. मरवाहा द्वारा स्थापित पंजाब बायोतकनालौजी इनक्यूबेटर (पी.बी.टी.आई.) ने लम्बा समय तय कर लिया है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से आज़ादी दिवस के मौके पर पी.बी.टी.आई., सैक्टर -81 की नोलेज सिटी में नयी बन रही इमारत का वर्चुअल उद्घाटन किया गया।
यह जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव विज्ञान, तकनालौजी और पर्यावरण विभाग आलोक शेखर ने बताया कि राज्य में बायोतकनालौजी क्षेत्र को नयी बुलन्दियें पर ले जाने के लिए प्रतिबद्धता के तौर पर पी.बी.टी.आई. की नयी इमारत के निर्माण का काम कोविड -19 की चुनौती के बावजूद भी एक एकड़ ज़मीन पर जंगी स्तर पर जारी है। इस पर 31 करोड़ रुपए का ख़र्च आऐगा। उन्होंने आगे बताया कि नयी इमारत में मौजूदा सुविधाओं का विस्तार करते हुए कौशल विकास केंद्र, प्लग और प्ले सुविधा, कॉमन इंस्टरुमैंटेशन साझी सुविधा और पी.बी.टी.आई. -पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साझे पर्यावरण स्रोत कें्रद का प्रावधान भी रखा गया है।
प्रमुख सचिव ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब स्टेट कौंसिल फॉर साईंस और तकनालौजी की बेसमैंट से अपना सफऱ शुरू करते हुए पी.बी.टी.आई. ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों जैसे कि विज्ञान और प्रौद्यौगिकी, वाणिज्य और उद्योग फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कृषि और किसान कल्याण और पर्यावरण, वन और मौसम परिवर्तन की मदद से अब तक दोगुनी -चौगुनी तरक्की की है।
पी.बी.टी.आई. के मौजूदा सी.ई.ओ. डा. अजीत कौर दुआ ने और प्रकाश डालते हुये बताया कि मौजूदा महामारी को ध्यान में रखते हुए पी.बी.टी.आई. में एक हज़ार टैस्ट प्रतिदिन के सामथ्र्य वाली कोविड -19 टेस्टिंग लैब भी स्थापित की गई है। उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा पी.बी.टी.आई. की तरफ से प्रदान की गई कीमतीे विश्लेषणात्मक सेवाओं के चलते पंजाब से चावलों का निर्यात कोविड -19 लॉकडाऊन के बावजूद भी संभव हो सकी।
अन्य विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैनेडा के ससकातून इलाके के कलस्टर मॉडल पर आधारित पी.बी.टी.आई. को यह मान हासिल है कि यह नेशनल ऐकरीडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिबरेशन लैबोरटरीज़ द्वारा मान्यता प्राप्त पंजाब की पहली सार्वजनिक क्षेत्र की बहु-आयामी लैबोरेटरी है जिसके अंतर्गत 2500 मापदंड कवर होते हैं। इतना ही नहीं पी.बी.टी.आई. भारत की पहली लैब है जिसने 2015 में परमाणु तकनीक पर आधारित शहद की गुणवत्ता की जांच करने वाले केंद्र की स्थापना का मान हासिल किया था। यह पंजाब की पहली ऐसी लैबोरेटरी है जिसको राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर 15 सम्मान मिल चुके हैं जिनमें फूड सेफ्टी और स्टैंडरडज़ एक्ट, फीडज़ एक्ट, वाटर एक्ट और एयर एक्ट के अंतर्गत रैफरल का दर्जा मिल चुका है। इसके अलावा इसको शहद की राष्ट्रीय रैफरंस लैबोरटरी के तौर पर एफ.एस.एस.ए.आई. से मंज़ूरी भी मिल चुकी है।
डाक्टर दुआ ने आगे बताया कि विश्लेषणात्मक सेवाओं के अलावा पी.बी.टी.आई. की तरफ से कंसलटैंसी, कौशल विकास, मानव संसाधन विकास और स्टार्ट अप सम्बन्धी सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन के तौर पर ख्याति अर्जित करने के बाद पी.बी.टी.आई. ने राज्य स्तर पर उद्योग और अनुसंधान और विकास से सम्बन्धित कई प्रोजैक्ट सफलता से पूरे किये हैं जिनमें से एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोजैक्ट पंजाब के जल सप्लाई और सेनिटेशन विभाग द्वारा राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों की जल सप्लाई स्कीमों का मूल्यांकन करना था, जिस पर आधारित कई फ़ैसले लिए गए जिनमें इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल और आर.ओ. प्रणालियों को चालू करना था।
पी.बी.टी.आई. की तरफ से पंजाब के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.डी.ए.) और जल सप्लाई और सेनिटेशन विभाग की और देश की अन्य प्रांतीय खाद्य लैबोरटरियों को तकनीकी किस्म की मदद भी मुहैया करवाई जाती है और इसके अलावा भारत भर में लैबोरटरियों की स्थापना और उनके कामकाज को सुचारू ढंग से चलाने के लिए भी पी.बी.टी.आई. की मदद ली जाती है। खाद्य के सभ्यक मापदंड /गुणवत्ता तय करने सम्बन्धी भी पी.बी.टी.आई. का संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफ.ए.ओ.) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आई.ए.ई.ए.) के साथ गहरा तालमेल है जो इसलिए एक बड़ी प्राप्ति है।
पी.बी.टी.आई. की तरफ से अर्जित किये गये मान के स्वरूप पंजाब सरकार द्वारा 2019 में इसको कृषि, ख़ाद्य, जल और पर्यावरण क्षेत्रों पक्ष से प्रांतीय विश्लेषणात्मक एजेंसी के तौर पर नोटीफायी किया गया था और मिशन बायोटैक पंजाब को बढ़ावा देने की जि़म्मेदारी सौंपी गई थी। इतना ही नहीं बल्कि 2019 में पी.बी.टी.आई. से ही पंजाब राज्य बायोटैक कारपरोशन ने अपनी गतिविधियां शुरू की, जोकि केंद्र सरकार के बायोतकनालौजी विभाग की बायोतकनालोजी औद्योगिक अनुसंधन विकास कौंसिल की मदद से राज्य में लाईफ़ साइंसेज़ पार्क और कृषि उद्यमशीलता नैटवर्क स्थापित करने के क्षेत्र में सक्रिय है। इस कदम से आम तौर पर देश के और विशेष तौर पर पंजाब के व्यापारियों, किसानों, निर्यातकों, उद्योगपतियों, मधुमक्खी पालकों और स्टार्ट-अप शुरू करने वालों को बेहद लाभ पहुँचा क्योंकि इनको अब अपने जांच नमूने देश के अन्य हिस्सों में या देश से बाहर नहीं भेजने पड़ते जिससे समय के अलावा पैसों की भी बचत होती है क्योंकि इनको सभी सुविधाएं यहीं मिल जाती हैं।

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