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संयुक्त अरब अमीरात-इजरायल शांति समझौता मुसलमानों की पीठ में खंजर घोंपना

तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल के बीच गुरुवार को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए हुए ऐतिहासिक समझौते की कड़ी निंदा की। साथ ही इसे सभी मुसलमानों के पीठ में छुरा घोंपना करार दिया। सरकारी टीवी ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह बताया। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में ईरान ने दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने को खतरनाक और ‘शर्मनाक’ कदम बताया है।

यही नहीं ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को इजरायल द्वारा फारस की खाड़ी के क्षेत्र के ‘राजनीतिक समीकरण’ में हस्तक्षेप करने को लेकर आगाह किया है। बयान में मंत्रालय ने कहा, ‘संयुक्त अरब अमीरात सरकार और अन्य सहयोगी सरकारों को इस कदम से होने वाले परिणाम की जिम्मेदारी भी अवश्य लेनी चाहिए।’ वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाली के समझौते का स्वागत किया है।

गुतारेस ने उम्मीद जताई है कि इस समझौते से इजरायल और फलस्तीन के नेता दोबारा से द्विराष्ट्रीय समाधान की दिशा में ‘सार्थक वार्ता’ की तरफ बढ़ सकते हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल ने गुरुवार को उस समझौते के तहत पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति जतायी जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

फलस्तीन ने यूएई से अपने राजदूत को वापस बुलाया
इस समझौते के तहत इजरायल अपने कब्जे वाले पश्चिमी तट के बड़े हिस्सों का विलय नहीं करेगा। फलस्तीनी अपने भावी राज्य के लिए यह क्षेत्र चाहते हैं। उधर फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक प्रवक्ता ने इस समझौते को विश्वासघात बताया। फलस्तीन की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में तैनात फलस्तीनी राजदूत को वापस बुलाया जा रहा है।

फलस्तीन ने समझौते पर निशाना साधते हुए इसे फलस्तीन की मांगों के साथ ‘विश्वासघात’ करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रदेनेह ने कहा कि यह समझौता ‘राजद्रोह’ के समान है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने अरब देशों से भी ‘फलस्तीनी लोगों के अधिकारों की कीमत पर’ इसका पालन ना करने का आग्रह किया।

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