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पंजाब सरकार औद्योगिक सैक्टर के लिए भी नयी लैंड पुल्लिंग नीति लेकर आई

चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : विकास प्रोजेक्टों के लिए स्वैच्छा से अपनी जायदाद देने वालों के लिए लैंड पुल्लिंग पॉलिसी को और आकर्षित बनाते हुये पंजाब सरकार ने ऐसे व्यक्तियों को मुआवज़े के तौर पर अतिरिक्त ज़मीन देने का फ़ैसला किया है। मंत्रीमंडल ने औद्योगिक सैक्टर के लिए भी ऐसी ही नयी नीति लाई है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने ग्रेटर मोहाली एरिया डिवैल्पमैंट अथॉरिटी (गमाडा) के अधिकार क्षेत्र में रिहायशी सैक्टर सम्बन्धी लैंड पुल्लिंग नीति को सुधारने और इस नीति को इंडस्ट्रियल सैक्टर में भी लागू करने की मंजूरी दे दी है।
यह फ़ैसला गमाडा की तरफ से ऐरोट्रोपोलिस अस्टेट के विकास के लिए पहले पड़ाव में 1680 एकड़ ज़मीन ऐकुवायर करने के मौके पर लिया गया। यह संशोधित नीति एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में 101 और 103 सैक्टरों में औद्योगिक अस्टेट के विकास के लिए भी सहायक होगी जहाँ प्रोजेक्टों को समय पर चलाने के लिए ज़मीन ग्रहण करने की प्रक्रिया सुविधाजनक बना दी गई है।
गमाडा की संशोधित लैंड पुल्लिंग नीति के अंतर्गत नयी बन रही ऐरोट्रोपोलिस रैज़ीडैंशियल अस्टेट के लिए ज़मीन मालिकों से ऐकुवायर किये जाने वाले हर एक एकड़ के लिए नगद मुआवज़े के बदले विकसित किये प्लाटों में से 1000 वर्ग गज़ रिहायशी प्लाट और 200 वर्ग गज़ कमर्शियल प्लाट (पार्किंग बिना) दिया जायेगा।
औद्योगिक सैक्टर के विकास के लिए पहली बार लागू की जाने वाली लैंड पुल्लिंग नीति के अंतर्गत हर एक एकड़ के लिए मुआवज़े के बदले ज़मीन मालिक को औद्योगिक प्लाटों में से 1100 वर्ग गज़ औद्योगिक प्लाट और 200 वर्ग गज़ कमर्शियल प्लाट (पार्किंग बिना) दिया जायेगा।
इसी तरह जो ज़मीन मालिक लैंड पुल्लिंग नीति के अंतर्गत प्राप्त किये प्लाट को बेचने के उपरांत यदि उक्त पैसे के साथ कहीं और कृषि वाली ज़मीन खऱीदता है तो उसे कई लाभ मुहैया करवाने के लिए विभाग की तरफ से ‘सहूलियत सर्टिफिकेट’ जारी किया जाता है और नयी नीति के अंतर्गत इस सर्टिफिकेट की मियाद को ज़मीन मालिक को अलाट किये प्लाट की तारीख़ से माना जायेगा। इससे पहले इसकी मियाद अवार्ड ऐलानने की तारीख़ से 2सालों तक होती थी। इस सर्टिफिकेट से ज़मीन मालिक की तरफ से लैंड पुल्लिंग के अधीन मिले प्लाट को बेच कर कृषि ज़मीन खरीदने के लिए स्टैंप ड्यूटी से छूट मिलने के इलावा अन्य कई लाभ मिलते हैं।
यह कदम इस कारण उठाया गया है क्योंकि ज़मीन मालिकों की माँग थी कि सर्टिफिकेट की मियाद को प्लाट देने की व्यावहारिक कब्ज़े की पेशकश की तारीख़ से लागू किया जाये जिससे बुनियादी ढांचे की स्थापना से इसकी संभावित कीमत बढ़ जाती है।
गमाडा की तरफ से साल 2001 से 2017 तक के समय के दरमियान 4484 एकड़ ज़मीन ऐकुवायर की गई है। इस ज़मीन में से अब तक लैंड पुल्लिंग नीति के द्वारा 2145 एकड़ ज़मीन ऐकुवायर की गई है। यह नीति साल 2008 में शुरू की गई थी जिसको समय -समय पर संशोधित किया गया।
लैंड पुल्लिंग नीति लाने का उद्देश्य ज़मीन ऐकुवायर की प्रक्रिया को तेज़ करने और गमाडा पर वित्तीय बोझ घटाने को यकीनी बनाना है क्योंकि गमाडा नगद मुआवज़े के ज़रिये ज़मीनों की प्राप्ति पर अदालत के द्वारा अतिरिक्त मुआवज़े की अदायगी के अंदेशों का सामना कर रही है। गमाडा पहले ही अदालतों में पहली रैफरैंस अपील (आर.एफ.ए.) के फ़ैसलों के अनुसार लगभग 9700 करोड़ के अतिरिक्त मुआवज़े की अदायगी करने का सामना कर रही है।

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