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घर पर शाकाहारी तरीके से विटामिन B-12 बनाने की विधि

🔸 एक कटोरी पके हुए चावल लें।

🔹 चावलों को ठंडा होने दें।

🔸 ठंडा होने पर इन चावलों को एक कटोरी दही में अच्छी तरह mix कर दें।
🔹 इन mix किये चावलों को रात भर या कम से कम 3-4 घण्टों के लिए fridge में या किसी ठंडी जगह पर रख दें।
नोट:- इसमें नमक नहीं मिलाना है।

🔸 बस प्रचुर मात्रा में विटामिन B-12 युक्त ‘Fermented Curd-Rice ‘ खाने के लिए तैयार हैं।

🔹 Fermentation की वजह से Vitamin B-12 के अलावा इसमें अन्य B-Complex विटामिन भी पैदा हो जाते हैं।

🔸 दही में Lactobacillus नामक Bacteria मौजूद होता है। यह हमारा मित्र bacteria है। यह bacteria जब चावलों के ऊपर action करता है तो B-Complex vitamins पैदा होते हैं और इस विधी को Fermentation कहते हैं।

🔹 इन fermented Curd-Rice को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए इनमें इमली की चटनी मिला कर भी खा सकते हैं। चटनी मिलाने पर यह इतने अधिक स्वादिष्ट हो जाते हैं कि बच्चे भी इन्हें दही -भल्लों की चाट की तरह बड़े चाव से खा जाते हैं।

💁🏻‍♀️ इस विधी से बने Fermented food को pre- digested food भी कहते हैं क्योंकि friendly bacteria के action से यह आधे हजम तो पहले ही हो जाते हैं।

🔹 यह इतने अधिक सुपाच्य होते हैं कि जिसको कुछ भी हजम न होता हो उसे भी हजम हो जाते हैं।

🔸 पेट की लगभग हर बिमारी का रामबाण इलाज हैं fermented Curd-Rice.

🔹 जिन्हें कुछ भी हजम न होता हो या जिनमें विटामिन B-12 की बहुत अधिक कमी हो वह प्रतिदिन तीनों समय भी इन्हें खा सकते हैं। एक महीने में ही अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
🔸 दही में चावल की बजाये रोटी से भी Fermentation कर सकते हैं। बस चावल की बजाये दही में रोटी डालकर fridge में कम से कम 3-4 घंटों के लिए रखना है, बाकी विधी वही है।

🔹 कभी भी आप दही को नमक के साथ मत खाईये। दही को अगर खाना ही है, तो हमेशा दही को मीठी चीज़ों के साथ खाना चाहिए, जैसे कि चीनी के साथ, गुड़ के साथ, बूरे के साथ आदि।

🔸 इस क्रिया को और बेहतर से समझने के लिए आपको बाज़ार जाकर किसी भी साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट की दूकान पर जाना है, और वहां से आपको एक लेंस खरीदना है, अब अगर आप दही में इस लेंस से देखेंगे तो आपको छोटे-छोटे हजारों बैक्टीरिया नज़र आएंगे।

🔹 ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में आपको इधर-उधर चलते फिरते नजर आएंगे। ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में ही हमारे शरीर में जाने चाहिए, क्योंकि जब हम दही खाते हैं तो हमारे अंदर एंजाइम प्रोसेस अच्छे से चलता है।

🔸 हम दही केवल बैक्टीरिया के लिए खाते हैं।
🔹 दही को आयुर्वेद की भाषा में जीवाणुओं का घर माना जाता है। अगर एक कप दही में आप जीवाणुओं की गिनती करेंगे तो करोड़ों जीवाणु नजर आएंगे।

🔸 अगर आप मीठा दही खायेंगे तो ये बैक्टीरिया आपके लिए काफ़ी फायदेमंद साबित होंगे।

🔹 वहीं अगर आप दही में एक चुटकी नमक भी मिला लें तो एक मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जायेंगे और उनकी लाश ही हमारे अंदर जाएगी जो कि किसी काम नहीं आएगी।

🔸 अगर आप 100 किलो दही में एक चुटकी नामक डाल देते हैं तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जायेंगे क्योंकि नमक में जो केमिकल्स है वह जीवाणुओं के दुश्मन है।

🔹 आयुर्वेद में कहा गया है कि, दही में ऐसी चीज़ मिलाएं, जो कि जीवाणुओं को बढाये ना कि उन्हें मारे या खत्म करे।

🔸 दही को गुड़ के साथ खाईये, गुड़ डालते ही जीवाणुओं की संख्या मल्टीप्लाई हो जाती है और वह एक करोड़ से दो करोड़ हो जाते है थोड़ी देर गुड़ मिला कर रख दीजिए।

🔹 बूरा डालकर भी दही में जीवाणुओं की ग्रोथ कई गुना ज्यादा हो जाती है।

🔸 मिश्री को अगर दही में डाला जाये तो ये सोने पर सुहागे का काम करेगी।
🔹 भगवान श्री कृष्ण भी दही को मिश्री के साथ ही खाते थे।

🔸 पुराने समय के लोग अक्सर दही में गुड़ डाल कर दिया करते थे।

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