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कड़े प्रतिबंध लगाने का ; पंजाब को कोविड के मामले में मुम्बई, दिल्ली, तमिलनाडु नहीं बनने देना चाहता : अमरिन्दर

चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) :  कोविड के मामलों की बढ़ती संख्या के चलते पंजाब सरकार द्वारा राज्य में कुछ और सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली गई है जिसमें सामाजिक, सार्वजनिक और पारिवारिक समारोहों पर बंदिशों सहित कामकाज के दौरान भी मास्क पहनना लाजिमी होगा।
फेसबुक लाईव सैशन ‘कैप्टन से सवाल’ के दौरान आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ऐलान किया कि कोरोनावायरस को आगे फैलने से रोकने के लिए सख्ती बहुत जरूरी है क्योंकि वह नहीं चाहते कि पंजाब भी मुम्बई, दिल्ली या तमिलनाडु के रास्ते पर बढ़े। यह पूछे जाने पर कि राज्य सरकार कोविड के फैलाव को रोकने के लिए हफ्ते के अंतिम वाले दिनों के लिए लॉकडाउन क्यों नहीं लगाती तो उन्होंने कहा कि रविवार को पहले ही लॉकडाउन लगाया हुआ है और सरकार पूरी स्थिति पर पूरी नज़र रख रही है और जो कदम जरूरी होंगे, वह उठाएगी।
मौजूदा संकट के चलते हरेक को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने की जरूरत पर जोर देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हर तरह की रोक का पालन करना यकीनी बनाया जाये और साथ ही उन्होंने सभी राजसी पार्टियों से अपील की कि वह पंजाबियों की जिंदगी बचाने के लिए किसी किस्म के जलसे से परहेज करें। उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब को बचाने की हम सभी की साझी जिम्मेदारी है। राजनीति इन्तजार कर सकती है।’’ मानवता के लिए सबसे बड़े खतरे का मुकाबला करने के लिए उन्होंने सभी को साझी लड़ाई लड़ने का न्योता दिया।
कई फ्रंटलाईन वर्करों और सरकारी अफसरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने समेत कोविड मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दवा का अभी कोई पता नहीं और लोगों को कोरोनावायरस के साथ लड़ने के लिए छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि शनिवार को मास्क न पहनने के लिए 5100 लोगों के चालान किये गए जबकि कुछ स्थानों पर सार्वजनिक तौर पर थूकने के भी मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसा कुछ करने की आज्ञा नहीं दी जायेगी। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार जरूरतमंदों को पुनः प्रयोग और धोने वाले मास्क और बाँटेगी।
मरने वालों के मैडीकल पृष्ठभूमि की महत्ता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना के साथ हुई सभी मौतों का ऑडिट किया जा रहा है जिससे डॉक्टर और माहिर कोविड के विरुद्ध लड़ाई पर और ज्यादा केंद्रित रणनीति बना सकें।
एक सवाल के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि पंजाब में कोविड के मामलों में इजाफा टेस्टिंग बढ़ने और बड़ी संख्या में आ रहे बाहरी लोगों के कारण हुआ है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक दिन में 700 टैस्ट होते थे और अब टेस्टिंग बढ़ाकर एक दिन में 10,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पिछले चार दिनों में दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से 63000 लोग राज्य में दाखिल हुए हैं।
यह पूछे जाने पर कि हिमाचल प्रदेश की तरह पंजाब भी दिल्ली जैसे अधिक प्रभावित (हॉटस्पॉट) राज्यों से आ रहे लोगों के लिए कोविड से नेगेटिव टैस्ट होने के सर्टिफिकेट को जरूरी क्यों नहीं बनाता तो मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पड़ोसी राज्य के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते परन्तु उनकी सरकार कोविड संदिग्धों की रोकथाम के लिए अपने स्तर पर कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि मामूली जैसे लक्षण पाए जाने या शक होने पर भी अपनी-अपनी जांच करवाएं और इसमें कोई जोखिम न लें क्योंकि मौत रोकने के लिए कोविड का जल्द पता लगना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य भर में रोगाणु रहित करने के लिए छिड़काव किया जा रहा है जिससे मौनसून से सम्बन्धित और वायरस के फैलाव रोके जा सकें।
मैडीकल लैब टैक्नीशियन ऐसोसिएशन, पंजाब की अपील कि कोविड के साथ निपटने में उनकी भूमिका को अगली कतार के योद्धाओं की तरह मान्यता देनी चाहिए क्योंकि वह भी अपनी जान जोखिम में डालते हैं और इस दौरान कई प्रभावित भी हुए हैं तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना किसी शक के तकनीशियन भी पूरी तरह अगली कतार के योद्धे हैं और मौजूदा संकट में उनकी भूमिका को कभी भी भुलाया नहीं जायेगा।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने संगरूर के एक निवासी को भरोसा दिलाया कि वह यह यकीनी बनाएंगे कि जिले के सरकारी हस्पताल में खराब सी.टी. स्कैन मशीन बारे पता करवाकर समस्या को दूर किया जाये।
मुख्यमंत्री ने यू.के. आधारित पंजाबी द्वारा अपनी माता को मिलने के लिए पंजाब आने हेतु पूछने पर उसे बताया कि यहाँ पहुँचने पर उसको 7 दिनों का संस्थागत एकांतवास और उसके बाद 7 दिनों के घरेलू एकांतवास के नियमों का पालन करना होगा और उसके व अन्यों की सुरक्षा के हित में इनमें कोई ढील नहीं दी जा सकी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी की सुरक्षा के लिए ही नियम बनाए गए हैं।
इंतकाल करने की गति धीरी होने बारे पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव को इसमें तेजी लाने और बकाया इंतकालों का निपटारा जल्द से जल्द करने के लिए विशेष मुहिम चलाने के हुक्म दिए हैं।
नेशनल डिफेंस अकैडमी (एन.डी.ए) इंस्ट्रक्टर नायब सूबेदार हरबंस सिंह के पोते द्वारा विनती कि नायब सूबेदार उनको दिल से याद करते हैं और मिलना चाहते हैं, के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘यदि वह आ सकते हैं तो कृपा करके उनको यहाँ लाओ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोई अपने पुराने दोस्तों को नहीं भूल सकता और वर्दी पहनने वाले भाइयों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।’’ उन्होंने आगे कहा कि जब आप वर्दी पहन लेते हो आप उम्र भर के लिए दोस्त बन जाते हो। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह अपने पूर्व एन.डी.ए इंस्ट्रक्टर को मिलने के लिए इंतजार करेंगे।
ठेके वाले मुलाजिमों को नियमित करने बारे पूछे जाने पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इस मामले संबंधी बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपी जायेगी और उनकी सरकार द्वारा इस सम्बन्धी फैसला जल्द लिया जायेगा।
एक अमृतसर निवासी द्वारा श्री दरबार साहिब के लिए मिल्कफैड की जगह पूणे की एक निजी कंपनी से देसी घी खरीदे जाने बारे प्रकट किए गए अपने सरोकार बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इसके हक में नहीं हैं क्योंकि डेयरी पंजाब के लिए दूसरी फसल है। आशा जताते हुए कि शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने फैसले पर फिर से गौर करेगी, मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के घी से और कोई घी बेहतर नहीं।
फाजिल्का के एक किन्नू फार्मिंग वाले किसान द्वारा कोविड के संकट जिसका चरम आने वाले तीन-चार महीनों में कल्पित किया जा रहा है, को देखते हुए उसकी फसल के लिए रचनात्मक मार्किटिंग यकीनी बनाऐ जाने बारे की गई विनती के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे मजबूत मार्किटिंग ढांचा पहले ही मौजूद है, वह कृषि विभाग को इस मसले को देखने और यह यकीनी बनाने कि इसमें कोई कमी न हो, बारे कहेंगे।
खन्ना निवासी द्वारा पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सर्टीफिकेटों को अंतर-राष्ट्रीय विद्या के लिए आस्ट्रेलिया जैसे कुछ मुल्कों द्वारा मान्यता न देने सम्बन्धी उठाए नुक्ते बारे, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह यह मुद्दा आस्ट्रेलिया सरकार के पास उठाएंगे और अपील करेंगे कि आस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा डिग्रीयों के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सर्टीफिकेटों को बनती मान्यता दी जाये।
कंडी बेल्ट के अंदर कीरतपुर साहिब के क्षेत्र चंगर में 65 करोड़ की लागत वाले पीने वाले पानी और लिफ्ट सिंचाई प्रोजैक्ट की स्थिति बारे एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सात योजनाएँ बनाईं गई थीं, जिनमें से तीन पहले ही कार्यशील हैं और दो का काम प्रगति अधीन है जबकि बाकी दो व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं पाए र्गइं।

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