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तेल कीमतों का इतना फिक्र है तो हरसिमरत कुर्सी क्यों नहीं छोड़ती -अमरिन्दर

  चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल की तरफ से कोविड के संकट के दरमियान अपने संकुचित राजनैतिक लाभ आगे बढ़ाने के लिए राज्य के लोगों को गुमराह करने पर सख्त शब्दों में आलोचना की है।
बादल दम्पत्ति पर तीखा हमला करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी तरफ से धोखेबाज़ी और झूठ की सांझी मुहिम चलाने के ढंग ने दोनों के दोहरे मानक का पर्दाफाश कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अकाली नेताओं के मगरमच्छ के अश्रु बहाने के ढकोसला और राजनैतिक हरकतों के बहकावे में नहीं आऐंगे क्योंकि वह अच्छी तरह जानते कि कैसे अकालियों ने सत्ता में होते हुये लोगों की दुख-तकलीफ़ों को दूर करने की बजाय एक दशक तक बेरहमी से पंजाब को लूटा।
पंजाब में कांग्रेसियों पर राशन में गबन के लगाऐ दोषों पर सुखबीर बादल को आड़े हाथों लेते हुये मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि विधायकों की तरफ से उनकी सरकार के उपरालों को सहयोग दिया जा रहा है जिससे यह यकीनी बनाया जा सके कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि विधायक सीधे तौर पर लोगों से जुड़ा होता है और वह भली भाँति जानता है कि तत्काल तौर पर मदद सबसे पहले ज़रूरत किसको देनी है और यही यकीनी बनाने के लिए वह काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से संकट की इस घड़ी में किये जा रहे संजीदा यत्नों के हिस्सेके तौर पर देश के हर क्षेत्र में कांग्रेसी वर्करों की तरफ से लोगों की सहायता की जा रही है और अकाली ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने कभी भी अपने राजनैतिक फायदों की पूर्ति किये बिना आगे देखा ही नहीं।
राज्य सरकार की तरफ से प्राप्त किये अनाज को लोगों में न बाँटने के लगाऐ दोषों के लिए सुखबीर बादल का मज़ाक उड़ाते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अकाली दल के प्रधान की तरफ से तो पेश किये तथ्य भी पूरी तरह गलत हैं जो यह दर्शाते हैं वह हकीकत से पूरी तरह अनजान है।
तथ्य यह हैं कि पंजाब सरकार की तरफ से जून तक प्राप्त किये अनाज पदार्थों की मात्रा सुखबीर की तरफ से दिए आंकड़ों से अपेक्षा अधिक थी और इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बांटा जा चुका है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत राज्य को 212164 मीट्रिक टन गेहूँ अलॉट किया गया जिसमें से 199091 मीट्रिक टन गेहूँ बांटा जा चुका है जबकि 10800 मीट्रिक टन अलॅाट दाल में से 10305 मीट्रिक टन की बाँट हो चुकी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की आत्म -निर्भर भारत स्कीम के अंतर्गत गेहूँ (प्रति व्यक्ति) और दाल (प्रति परिवार)14.14 लाख व्यक्तियों को मुहैया करवाई गई और राज्य की तरफ से गेहूँ का आटा तैयार करके, इसके साथ दाल शामिल करके इसको प्रति व्यक्ति एक किलो बनाया गया और राज्य की तरफ से अपने स्तर पर एक किलो चीनी इसमें डाली गई। वास्तव में, राज्य सरकार ने अपने फंडों में से प्रवासी कामगारों को 17 लाख खुराकी पैक्ट बाँटने के लिए 69 करोड़ रुपए खर्च किए जिनमें 10 किलो आटा, 2 किलो दाल और 2 किलो चीनी के पैकेट शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंकड़े यह दर्शाने के लिए काफ़ी हैं कि खाद्य अनाज के वितरण संबंधी सुखबीर की तरफ से किये दावे और लगाए दोष पूरी तरह निराधार और सबूत विहीन हैं और शिरोमणि अकाली दल प्रधान अक्सर बेतुकी ब्यानबाज़ी करते हैं और दोहरा मानक रखते हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में कृषि क्षेत्र सम्बन्धी आर्डीनैंसों के मुद्दे पर पीछे हटने और इससे पहले सी.ए.ए के मुद्दे पर अकालियों की तरफ से अपनाए आप विरोधी स्टैंड की तरफ भी इशारा किया।
तेल पर लगे वैट के मसले पर हरसिमरत बादल की आलोचना करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हरसिमरत तेल कीमतों के बढऩे से आम आदमी के प्रभावित होने पर इतनी चिंतातुर है तो उसने केंद्र सरकार, जिसमें वह कैबिनेट मंत्री है, पर डीज़ल और पेट्रोल कीमतों की कीमतों में बिना नियंत्रण के लगातार 22 दिन हुयी वृद्धि पर काबू पाने के लिए दबाव क्यों नहीं डाला।
उन्होंने आम लोगों की जताई जा रही इस दिखावे की चिंता को हास्यप्रद कह कर रद्द किया कि हरसिमरत केंद्र सरकार की तरफ से तेल की कीमतों में किये जा रहे हैरानीजनक वृद्धि को आँखों से अनदेखा करके राज्य सरकार की तरफ से पैट्रोलियम टैक्स में की वृद्धि पर प्रतिक्रया कर रही है।
केंद्रीय मंत्री के इस मसले पर बयानों पर कटाक्ष करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि लगता है कि हरसिमरत को केंद्र सरकार की तरफ से तेल कीमतों में विस्तार करके 2 लाख करोड़ हासिल करने पर कोई समस्या नहीं परन्तु जब उसके अपने राज्य, जो कोविड महामारी के साथ जूझ रहा है और वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, की बात आती है तो उसे यह जन विरोधी लगता है।
उन्होंने पूछा कि यदि बादल केंद्र की तरफ से तेल की कीमतों में किये वृद्धि का विरोध करने में गंभीर हैं, जिस तरह वह दावा करते हैं, तो वह केंद्र में एन.डी.ए गठजोड़ क्यों नहीं छोड़ देते? हरसिमरत अभी तक केंद्रीय कैबिनेट में क्यों है? उन्होंने कहा कि अकाली सिफऱ् हर कीमत पर अपनी ताकत बहाल रखने और अपनी जेबें भरने की लालसा रखते हैं, चाहे इससे पंजाब बर्बाद ही क्यों न हो जाये।

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