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बिना लाइसेंस जुगाड़ी बाबा ने लॉन्च की कोरोना की दवा : लाइसेंस मिला तमंचे का, बना लिए तोप !

हरिद्वार (रफतार न्यूज डेस्क): हरिद्वार स्थित बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की पतंजलि द्वारा कोरोनिल नाम से कोरोना की दवा लॉन्च किए जाने पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई ने 24 जून की दोपहर उत्तकराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस अफसर के हवाले से बताया कि पतंजलि की ओर से लाइसेंस के लिए जो आवेदन आया था, उसमें कोरोना वायरस का जिक्र नहीं था। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कफ व बुखार की दवा का लाइसेंस दिया गया है। इस खबर के आने के बाद एक बार फिर बाबा रामदेव और पतंजलि सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गए। वरिष्ठक पत्रकार और पूर्व प्रसार भारती प्रमुख मृणाल पांडे ने ट्वीट के जरिए तंज कसा. लाइसेंस मिला तमंचे काए बना लिए तोप!
योगगुरु और पातंजलि आयूर्वेद लिमिटेड सुप्रीमो जुगाड़ी बाबा रामदेव ने करोना वायरस की दवा कोरोनिल लाने का दावा किया है। यह दवाई बगैर लाइसेंस लॉन्च की गई जिसे लेकर उनकी दो कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। उत्तराखंड के देहरादून में आयुर्वेदिक और यूनानी सेवा में लाइसेंस अधिकारी की ओर से 24 जून को जारी यह पत्र ‘मेसर्स दिव्य फार्मेसी’ (औद्योगिक क्षेत्र, हरिद्वार) और ‘मेसर्स दिव्य फार्मेसी यूनिट-2 (लक्सर रोड, ग्राम पदार्था, हरिद्वार) को भेजकर कहा गया है कि आप लोग कानून तोड़ रहे हैं।
पतंजलि योगपीठ द्वारा कोरोनावायरस के लिए Coronil और Shwashari Vati से जुड़े दावों का प्रचार-प्रसार करने को लेकर लाइसेंसिंग अधिकारी की ओर से कहा गया- आपके द्वारा बनाई जा रही दवाएं- दिव्य स्वसरी वटी और दिव्य कोरोनिल टैबलेट के साथ अणुतेल सहित किट तैयार करते हुए किट को ‘कोरोना किट’ का नाम दिया गया है। इन दवाओं से कोरोना का इलाज हो सकता है- इस बात का प्रचार प्रसार मीडिया में किए जाने को लेकर हमें शिकायत मिली है।
उत्तराखंड के देहरादून में आयुर्वेदिक और यूनानी सेवा में लाइसेंस अधिकारी के पत्र के अनुसार, “निदेशालय के 2 पत्रों में आपको उक्त दवाइयों को बनाने की अनुमति दी गई है, जिसमें दिव्य स्वसरी वटी का इस्तेमाल खांसी और बुखार (खास व श्वास) के लिए और दिव्य कोरोनिल टैबलेट का उपयोग इम्युनिटी बूस्टर के लिए बताया गया था। विशेषतः सांस संबंधी संक्रमण और हर किस्म के बुखार के लिए। हमने इसी संदर्भ में इलाज के लिए दवाओं के निर्माण की आज्ञा दी थी। परंतु कोरोना के उपचार का उसमें कोई उल्लेख ही नहीं था। पत्र में आगे लिखा गया है कि साथ ही ये भी बता दें कि तथाकथित कोरोना किट के बारे में लाइसेंसिंग अधिकारी द्वारा कोई अनुमोदन प्रदान नहीं किया गया है।”

चिट्ठी में आगे कहा गया- आपके द्वारा दिव्य कोरोनिल टैबलेट के लेबल पर कोरोना वायरस का फोटो दर्शाया गया है। इस तरह आप लोग ड्रग और मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 और ड्रग व कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के नियम 170 और नियम 161 का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं।

लेटर में आगे दो टूक ‘मेसर्स दिव्य फार्मेसी’ और ‘मेसर्स दिव्य फार्मेसी यूनिट-2 से कहा गया है कि ऐसे में आप स्पष्ट करें कि किन हालात में आप की तरफ से दिव्य कोरोनिल टैबलेट और दिव्य स्वसरी वटी और कोरोना किट का भ्रामक प्रचार प्रसार मीडिया में किया जा रहा है? ऐसा करने के लिए आप को क्यों न आपको प्रदत्त संबंधित दवाइयों को बनाने की मिली अनुमित रद्द करने की कार्रवाई की जाए।
पत्र में आगे कहा गया है कि आपको निर्देशित किया जाता है कि अपनी सफाई हफ्ते भर के अंदर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं और दिव्य कोरोनिल टैबलेट और दिव्य स्वसरी वटी के साथ कोरोना किट के भ्रामक प्रसारण को तत्काल मीडिया से हटवाएं। उक्त लेबल क्लेम को भी संशोधित कराना सुनिश्चित करा लें। बिना किसी भी अनुमोदित योग के मीडिया में प्रसारण की कार्रवाई न की जाए वर्ना आपके खिलाफ संबंधित धाराओं और नियमों के तहत ऐक्शन लिया जाएगा, जिसके पूरी तौर पर आप लोग ही जिम्मेदार होंगे।

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