Breaking News
Home / दुनिया / कोविड 19 की लड़ाई में पंजाब की सहायता न करने के लिए केंद्र की कड़ी अलोचना

कोविड 19 की लड़ाई में पंजाब की सहायता न करने के लिए केंद्र की कड़ी अलोचना

चंडीगढ़  (पीतांबर शर्मा) : – कांग्रेस वर्किंग कमेटी की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के दौरान पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनीया गांधी की तरफ से कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आयोजित वीडियो काॅन्फ्रेंस, जिसमें पूर्व प्रधान मंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और अन्यों द्वारा शिरकत की गई, के दौरान कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि हमें इस पर कड़ा स्टैंड लेना होगा और हमें स्पष्ट होना चाहिए कि यदि हम एक इंच जगह भी गंवाते हैं तो वह जिम्मेदार होंगे।
   मुख्यमंत्री द्वारा राज्य की कोविड के साथ लड़ाई में केंद्र द्वारा सहायता न करने के लिए कड़ी अलोचनाएं की गईं। उन्होंने कहा कि पंजाब को केंद्र से राज्य के अपने जनवरी से मार्च के समय के 2800 करोड़ और थोड़ी अन्य ग्रांटें ही प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के अप्रैल से जून महीने के जी.एस.टी के बकाए भी अभी नहीं मिले।
  उन्होंने कहा कि बार-बार अपीलों और माँग पत्रों के बावजूद केंद्र द्वारा राज्य को कोविड संकट के साथ लड़ने के लिए कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य के बनते हिस्से भी नहीं दिए जा रहे। उन्होंने कहा कि पंजाब को प्रधानमंत्री द्वारा 20000 लाख करोड़ रुपए के ऐलान किए गऐ पैकेज में से एक पैसा भी प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य को अंदाजन 25 से 30 हजार करोड़ के इस साल हुए मालीया घाटे और बाकी का कोविड के खिलाफ में जंग पर लगने के कारण पंजाब की हालत खराब हो चुकी है।
  कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार को अपने स्रोतों के प्रबंध के साथ ही कोविड के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि उनको यकीन है कि अन्य राज्य भी इतने विपरीत हालातों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र द्वारा कोई सुनवाई न किये जाने पर अफसोस जाहिर किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको 500 रेल गाड़ीयों के द्वारा 5.63 लाख कामगार को उनके गृह राज्यों तक पहुँचाने के लिए 35 करोड़ रुपए का खुद प्रबंध करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कुल 2.52 लाख उद्योगों में से अब 2.33 लाख उद्योग फिर से चालू हो गए हैं और प्रवासी मजदूर भी अब राज्य में वापस आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उद्योगों को सभी संभव सहूलतें देने और नियमों को आसान बनाकर उद्योग को से फिर पटरी पर लाने के लिए अपनी तरफ से पूरा यत्न कर रही है परन्तु औद्योगिक इकाईयाँ इस समय 40 प्रतिशत की क्षमता के साथ काम कर रही हैं जिनको पूरी तरह काम करने में अभी कुछ महीने लगेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार द्वारा कोई मदद नहीं दी जा रही और उन्होंने बड़ी संख्या में उन ईकाईयों की भी मिसाल दी जिन्होंने भारत सरकार की अपील पर पी.पी.ई. किटों का निर्माण शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि अब राज्य हर रोज 15 लाख पी.पी.ई. किटें बनाने में सक्षम हो गया है परन्तु इनको खरीदने वाला कोई नहीं है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि उन्होंने इन किटों को निर्यात करने की इजाजत देने के लिए प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय 17 लाख स्थानीय और प्रवासी कामगार औद्योगिक कामों में जुटे हुए हैं और धान की फसल लगाने के कामों में और कामगार किसानों के पास पहुँच रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब से बहुत से किसान खुद यू.पी., बिहार और झारखंड में जाकर प्रवासी मजदूरों को वापस लेकर आए। उन्होंने बताया कि राज्य में प्रवासी कामगारों को मुफ्त अनाज अभी भी बँटा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि कोविड की बन्दिशों की चुनौतियों के बावजूद पंजाब के किसानों द्वारा फसल की रिकार्ड पैदावार के मद्देनजर अनाज वितरण स्कीम को और छह महीनों के लिए बढ़ाया जाये।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो प्रवासी मजदूर यहाँ रुक गए थे और उनके पास राशन कार्ड आदि नहीं थे, को भोजन की जरूरत थी और उन्होंने इस मुद्दे पर तीन बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जिनका कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने बताया कि राज्य के कुल 13.50 लाख प्रवासी मजदूरों में से सिर्फ 5.63 लाख मजदूर ही वापस गए जबकि बाकी रुक गए थे और इनके लिए अब यहाँ रोजगार मौजूद हैं और भोजन की अभी भी समस्या है।
राज्य की अर्थव्यवस्था की बहाली की योजना के बारे में विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्य नीति तैयार करने के लिए मोंटेक सिंह आहलूवालीया कमेटी सरकार के साथ अपनी फीडबैक साझा कर रही है जिसके मुताबिक अगला रास्ता तैयार किया जा रहा है।
इस कमेटी के छह वर्किंग ग्रुप हैं जिनमें से वित्त के साथ सम्बन्धित टीम ने पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जबकि अन्यों द्वारा भी जल्द ही सौंप दिए जाने की आशा है।
राज्य में कोविड की स्थिति के बारे में कांग्रेस वर्किंग कमेटी को अवगत करवाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि सैंपलिंग और टेस्टिंग को लगातार बढ़ाया जा रहा है और महामारी के फैलाव को रोकने के लिए सूक्ष्म / सीमित रणनीति अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि हालाँकि मामलों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और टेस्टिंग बढ़ाने के अलावा बाहरी राज्यों और मुल्कों से बड़ी संख्या में आ रहे लोगों के कारण यह विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि लुधियाना और जालंधर के अलावा अमृतसर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक है जहाँ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आ रही हैं जिनमें बुरी तरह प्रभावित खाड़ी मुल्कों के क्षेत्र से आ रही उड़ानें भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि और बड़ी समस्या यह है कि दिल्ली से रोजाना हजारों लोग पंजाब आ रहे हैं जबकि दिल्ली में हालात पहले ही बहुत खराब हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें से बहुत से लोग अपने आने संबंधी जानकारी भी नहीं दे रहे और इनको ढूंढना पड़ रहा है जिसमें गाँव भी शामिल हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार महामारी के फैलाव को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है और बैड, एकांतवास केन्द्रों, टेस्टिंग लैब्स, पी.पी.ई. किटों, मास्क, वैंटीलेटरों और आॅक्सीजन किटों आदि के रूप में अपनी तैयारियों को लगातार बढ़ा रही है।

About admin

Check Also

खालिस्तान रेफरेंडम 2020 में वोटिंग न करने पर सिक्खों का आभार: शांडिल्य

अंबाला (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) : – एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्री …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share