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21जून प्रभावशाली ग्रहों की उल्टी चाल में बनेंगे अजब संयोग

रफतार न्यूज डेस्क :
शिव सेना हिंदुस्तान की शाखा श्री सनातन धर्म प्रचारक सेना के जिला अध्यक्ष पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री ने बताया कि किस प्रकार से रहेगा 2020 का सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण यहां से देखा जा सकेगा : 21 जून को पड़ने वाले इस वार्षिक सूर्य ग्रहण को अफ्रीका के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा. अफ्रीका में ये सेंट्रल रिपब्लिक, कांगो और इथोपिया में देखा जा सकेगा. इसके अतिरिक्त यह सूर्य ग्रहण पाकिस्तान के दक्षिण भाग में, उत्तरी भारत और चीन में देखा जा सकेगा.
सूर्य ग्रहण के दौरान इन बातों का ध्‍यान रखें  : जब भी सूर्य ग्रहण लगे तो इसे सीधे यानी कि नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए. ऐसा करने से सूर्य से निकलने वाले हानिकारक किरणें आपकी आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं. यदि कोई भी व्यक्ति सूर्य ग्रहण  देखना चाहता हैं तो सोलर फिल्टर वाले चश्मों का इस्तेमाल करना चाहिए. इनसे सूर्य की हानिकारक किरणें आंखों को नुकसान नहीं पहुंचा पाती हैं.
सूर्य ग्रहण कब होता है?  :  सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. इस समयावधि में, चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी पर आने से रोकता है और चंद्रमा की पृथ्वी पर जो छाया पड़ती है उसे ही ‘सूर्य ग्रहण’ कहा जाता है.
सूर्य ग्रहण के प्रकार  :  सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं. ये पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण, वलयाकार सूर्य ग्रहण है. इस बार पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है.
1. पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी के काफ़ी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया क्षेत्र में ले लेता है. इससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती है.
2. आंशिक सूर्यग्रहण में चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह आता है कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है. इसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य के कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है और इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं.
3. वलयाकार सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में तो आता है लेकिन उसकी पृथ्वी से काफी दूरी होती है. चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढक पाता है एवं सूर्य की बाहरी परत ही प्रकाशित होती है जोकि वलय (रिंग) के रूप में दिखाई पड़ती है. इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री जी के अनुसार 21 जून को सूर्य ग्रहण दिन में 9:16 बजे शुरू होगा। इसका चरम दोपहर 12:10 बजे होगा। मोक्ष दोपहर में 3:04 बजे होगा।
ग्रहण का सूतक काल :  सूतक काल 20 जून शनिवार रात 9:15 बजे से शुरू हो जायेगा। इसी के साथ शहर के मठ-मंदिर के पट भी बंद हो जाएंगे। आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र ग्रहण के 12 घंटे पहले और 12 घंटे बाद तक के समय को सूतक काल मानते हैं।
कोरोना और सूर्य ग्रहण का यह है कनेक्‍शन  :  भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण जनवरी 2020 के बाद तेजी से फैलना शुरू हुआ था। इससे पहले 26 दिसंबर, 2019 को सूर्य ग्रहण लगा था। ज्‍योतिषीय गणना के अनुसार 2019 का ग्रहण बेहद नकारात्‍मक परिणाम देने वाला था, इसके चलते ही यह महामारी पनपी। ग्रहण से उपजा यह संकट ग्रहण से ही समाप्‍त हो सकता है। 21 जून के ग्रहण के एक पखवाड़े के भीतर कोरोना के संक्रमण में कमी आना शुरू हो सकती है।

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