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प्रधानमंत्री ने अन्य राज्यों को कोविड से निपटने के लिए पंजाब के माईक्रो कंट्रोल और घर-घर सर्वेक्षण के मॉडल को अपनाने के लिए कहा

  •  प्रधानमंत्री की वीडियो कॉन्फ्ऱेंस में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कोविड के मुकाबले के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल के लिए ग्रुप बनाने की अपील की
  • पंजाब की अर्थव्यवस्था की पुन: बहाली के लिए केंद्र से सहयोग माँगा, प्रधानमंत्री को लिखे मैमोरंडम में की गई माँगों को उठाया
    चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) : कोविड से निपटने के लिए पंजाब द्वारा अपनाई सूक्ष्म स्तर पर कंट्रोल की विधि और घर-घर सर्वेक्षण की नीति की सराहना करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सभी राज्यों को पंजाब का मॉडल अपनाने के लिए कहा जिस कारण पंजाब को इस महामारी को रोकने में बड़ी सफलता हासिल हुई है।
    प्रधानमंत्री ने यह बात तब कही जब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह कोविड से निपटने के लिए राज्य का यह मॉडल बताते हुए सभी राज्यों को इस रणनीति को अपनाने का सुझाव दे रहे थे जिससे इस महामारी का मुकाबला प्रभावशाली तरीके से किया जा रहा है।
    सभी राज्यों में कोविड की स्थिति और इसको रोकने के लिए अपनाई जा रही नीति की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री की तरफ से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ रखी दो दिवसीय वीडियो कॉन्फ्ऱेंस मीटिंग के पहले दिन आज पंजाब समेत अन्य कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री मीटिंग कर रहे थे। इसी तजऱ् पर प्रधानमंत्री कल भी बाकी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग करेंगे।
    मीटिंग के दौरान कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री को एक ग्रुप बनाने का सुझाव दिया जिसमें कुछ मुख्यमंत्री शामिल किये जाएँ जो देश भर में अर्थव्यवस्था और सरकारों पर कोविड के विनाशकारी प्रभावों संबंधी विचार-विमर्श करता हुआ केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल स्थापित करे।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्ऱेंस जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन भी शामिल थे, के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री ने अपील की कि कोरोना महामारी और इसके बाद लगाए लॉकडाऊन करके हुई परेशानी को दूर करने के लिए केंद्र को राज्यों के साथ मिल कर काम करना चाहिए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय, जब लॉकडाऊन को असीम समय के लिए नहीं जारी रखा जा सकता क्योंकि अर्थव्यवस्था की गतिशीलता एक बार भंग होने के उपरांत पुन: शुरू होने के लिए लम्बा समय लगता है, कोविड के साथ जीना जीवन का नया नियम है। उन्होंने कहा कि रोज़ी रोटी और जि़न्दगियां दोनों का ख़्याल रखना समय की मुख्य ज़रूरत है जैसे प्रधानमंत्री की तरफ से ख़ुद अप्रैल महीने हुई वीडियो कॉन्फ्ऱेंस के दौरान कहा गया था।
    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने याद करवाया कि जब अप्रैल महीने के शुरू मेउन्होंने ख़ुद कहा था कि कोविड सितम्बर महीने तक चलेगा तो कुछ लोगों ने इसको डर फैलाने की वजह बताया था। उन्होंने ज़ोर देते हुये कहा कि परन्तु अब जब माहिर चेतावनी दे रहे हैं कि यह सितम्बर महीने के बाद भी जारी रह सकता है तो यह और भी महत्ता रखता है कि हम कोविड के साथ रहना सीखें और इसके साथ बढिय़ा ढंग से निपटें। उन्होंने इस कारण केंद्र और राज्य सरकारों के आपसी सहयोग के साथ काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
    पंजाब के वित्तीय संकट को घटाने के लिए ज़रूरी कदमों के लिए न्योता देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को एक विस्तृत माँग पत्र पहले ही भेजा जा चुका है जिसमें कोविड के प्रभावों की सूची और वित्तीय और ग़ैर-वित्तीय सहायता की माँग है। जून महीने के शुरू में जी.एस.टी के 2800 करोड़ रुपए की राशि जारी करने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का धन्यवाद करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे भारत सरकार भी वित्तीय दबाव का सामना कर रही थी तो भी उन्होंने वित्तीय संकट में से उभरने के लिए राज्य के करों के बकाया हिस्से को जारी करने के लिए अपील करनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्रोतों से आय वसूली में करीब 25000 से 30000 करोड़ का कमी होने के कारण पंजाब में संकट और गहरा होने की संभावना है।
    मुख्यमंत्री ने राज्य में कोविड की स्थिति के विवरण देते हुये कहा कि चाहे मौजूदा समय देश में कुल मामलों में पंजाब का हिस्सा 1 फीसद से कम है (3140 केस) और मौत दर 2.1 और रिकवरी रेट 75 फीसद है, तो भी बंदिशों में ढील, लोगों के मेल-मिलाप बढऩे और बाहर से राज्य में लोगों के आने से केस बढ़ रहे हैं। भारत में प्रति मिलियन लोगों के पीछे औसतन 4088 टैस्टों की दर से अधिक पंजाब में प्रति मिलियन 5527 टैस्टों की मौजूदा दर के बावजूद और ज्यादा टैस्ट किये जाने पर ज़ोर देते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री को पंजाब और चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के संस्थानों को टैस्ट सामथ्र्य बढ़ाने सम्बन्धी निर्देश देने के लिए अपनी अपील को दोहराया।
    महामारी को और बढऩे से रोकने के लिए राज्य की तैयारियों संबंधी मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दूसरे और तीसरे दर्जे के सरकारी केन्द्रों में 5000 बैड तैयार हैं और इसके साथ ही कम प्रभावित मरीज़ों के लिए दर्जा एक के कोविड इलाज केन्द्रों में 10 से 15 हज़ार बैड तैयार किये गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ज़रूरत पड़े तो दर्जा एक वाले बैडों की संख्या 30 हज़ार तक बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय स्तर के इलाज के लिए पंजाब सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों की भागीदारी की जा रही है।
    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार महामारी से लडऩे के लिए बहुपक्षीय रणनीति पर काम कर रही है। सप्ताह के अंतिम वाले दिनों और छुट्टियों वाले दिनों के दौरान कुछ पाबंदियाँ लगाईं गई हैं और जुर्माने के द्वारा सभी प्रोटोकालों को सख्ती से लागू करने को यकीनी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फि़लहाल बड़े क्षेत्रों को बंद करने की बजाय छोटे मुहल्लों या गाँवों के वार्डों को अलग करने की माईक्रो कंट्रोल रणनीति पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिक जोखिम वाले मरीज़ों का जल्दी पता लगाने के लिए किसी भी संभावित केस और सहरोग वाले व्यक्तियों का पता लगाने के लिए घर -घर जाकर निगरानी के लिए एक विशेष एप भी लांच की गई है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए शुरू किये गए मिशन फतेह संबंधी चर्चा की जिसके अंतर्गत प्रसिद्ध हस्तियों की वीडियो बना कर ज़मीनी गतिविधियों और जुर्माने के द्वारा व्यवहार में तबदीली लाने के लिए ध्यान केंद्रित करने संबंधी भी बताया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने गरीबों के लिए मुफ़्त अनाज स्कीम को छह महीनों तक बढ़ाने की अपनी विनती को दोहराया और उम्मीद ज़ाहिर की कि केंद्र की तरफ से राज्यों के राजस्व की कमी को पूरा करने और कोविड -19 पर खर्चे सम्बन्धी फंड के लिए 3 महीनों के लिए राजस्व ग्रांट मुहैया करवाने संबंधी उनके पहले सुझाव का नोटिस लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग को मौजूदा साल की अपनी रिपोर्ट की भी समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि कोविड -19 के कारण स्थिति पूरी तरह बदल गई है जैसे पहले प्रस्तावित थी।
    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एफ.आर.बी.एम. एक्ट के अधीन उधार लेने की सीमा को 3 प्रतिशत से बढ़ा कर 5 प्रतिशत करने की इजाज़त देने के भारत सरकार के फ़ैसले की तरफ भी इशारा किया जिसमें 2 प्रतिशत अतिरिक्त उधार प्राप्त करने के लिए 4 में से 3 शर्तें पूरी करनी ज़रूरी हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह कुछ शर्तों पर समीक्षा करें और ज़मीनी स्तर पर जायज़ा लें । उन्होंने बताया कि उधार कजऱ् था जो राज्यों ने वापस करना था न कि भारत सरकार द्वारा दी गई ग्रांट।

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