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आसाराम बापू ने दिए संकेत : 21 जून के सूर्यग्रहण के बाद भीषण आपातकाल चालू होने की संभावना : डॉ. प्रेमजी

आवश्यक सुचना – 2
🔸पूज्य बापूजी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समय बहोत कम है, इसका मतलब हमारी आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल समय अभी बहोत कम बचा है।
इसका कारण डॉ. प्रेमजी ने बताया कि अभी भी वातावरण में थोड़ी बहोत  सात्विकता है।लेकिन 21 जून के सूर्यग्रहण के बाद भीषण आपातकाल चालू होने की पूरी संभावना है, इस आपातकाल के दौरान अगर विश्व युद्ध चालू हुआ तो बॉम्ब गिरने के कारण  आसपास के सैकड़ों किलोमीटर की रेंज में रेडिएशन फैलेंगे।और रेडिएशन के कारण बीमारियां बहुत फैलेगी, वातावरण तामसिक हो जाएगा,ऐसा तामसिक वातावरण आध्यामिकता के अनुकूल नहीं होता। डॉ.प्रेमजी ने ये केवल संभावना बताई।
इसलिए 21 जून तक का समय हम सबके लिए  बहुत ही महत्त्वूर्ण है। ये समय में क्या बाह्य सावधानीया रखनी है वो एक हप्ते पहले ही बताया था।
लेकिन बाह्य सावधानी से भी ज्यादा जरूरी है अंतरंग सावधानी।

🔸इस समय हम साधकों के लिए पूज्य बापूजी की सबसे महत्त्वूर्ण आज्ञा आयी है कि *”तत्परता से ईश्वर प्राप्ति के लिए लग जाओ।”
पूज्य बापूजी ने 25 अप्रैल के सत्संग में ईश्वर प्राप्ति के 3 उपाय बताए।
1) वासनाक्षय
2) मनोनाश
3) तत्वज्ञान

इसमें पहला उपाय है
वासनाक्षय :-
“वासना कई प्रकार की होती है,जैसे विषय वासना,लोभ याने धन की वासना, पद की वासना, लोकवासना आदि आदि।
विषय वासना याने विषयो का आकर्षण।
5 विषय है, उनमें भी पूरे संसार में मानवजाति को सबसे ज्यादा आकर्षण 2 विषयो का होता है,
1)स्वाद
2)कामविकार
मनुष्य जितना चटोरा होगा,
याने जीभ का गुलाम होगा
उतना ही उसको कामविकार ज्यादा सताएगा।
अगर हमें इसी जन्म में ईश्वर प्राप्ति करनी है,तो हमे इन आकर्षणों को कम करते करते इनके उपर विजय पाना होगा।
गुरुसेवा का रस ही ऐसा है जो इन विषय विकारों के रस को फिका कर सकता है।”
पूज्य बापूजी ने विषय वासना को कम करने के लिए गुरुसेवा ही प्रमुख साधन बताया है।
डॉ.प्रेमजी ने बताया की अगर हम प्रबल पुरुषार्थ से 70% वासनाक्षय करने में सफल हुए तो बाकी का सद्गुरु संभाल लेते है।
2) मनोनाश :-
मनोनाश याने मन की चंचलता को कम करने के लिए जप एक महत्त्वूर्ण साधन है।
3)तत्वज्ञान :-
पूज्य बापूजी के तात्विक सत्संग का श्रवण मनन
तत्वज्ञान प्राप्ति के लिए उपयोगी साधन है।
इसलिए हम साधकों को हमारा अधिकाधिक समय गुरुसेवा,
जप और पूज्य बापूजी के सत्संग के श्रवण मनन में लगाना होगा।
जप तो सभी करते ही होंगे।पूज्य बापूजी के कुछ दुर्लभ तात्विक सत्संग इस ग्रुप में बीच बीच में भेजेंगे।
इन सत्संग के ऊपर हम ग्रुप में चर्चा कर सकते है, सत्संग की चर्चा करने से ज्ञान बढ़ेगा।
🔸21 जून सूर्यग्रहण तक का समय हम सबके लिए गुरुसेवा का बहोत बड़ा सुअवसर हैं।
अप्रैल मई की संयुक्त ऋषी प्रसाद पत्रिका और जून की पत्रिका छापने हेतु पूज्य बापूजी के पास अहमदाबाद हेड ऑफिस द्वारा चीठ्ठी भेजी जाएगी। उत्तर में अगर पूज्य बापूजी का “हा” आता है तो ऋषी प्रसाद छापना तिव्रता से शुरू हो जायेगा।
लेकिन ऋषी प्रसाद पत्रिका आने से पहले हम सबको एक महत्त्वूर्ण सेवा करनी है, हर साधक को अपने रिश्तेदार , परिचितों को अप्रैल मई की संयुक्त ऋषी प्रसाद की ऑनलाइन pdf कॉपी भेजना है। https://rishiprasad.org/free_highlights

और उन सबको पर्सनली फोन करके 21 जून के सूर्य ग्रहण के नियम पालन करने को राजी करना है।क्योंकी इस सूर्य ग्रहण में बननेवाला चूड़ामणि योग इतना विनाशकारी है कि जिसने इस ग्रहण का नियम पालन किया उसको पूर्व के लगभग सभी सूर्य ग्रहण की अपेक्षा बहुत अधिक आध्यात्मिक लाभ होगा। और जिसने इस ग्रहण के नियमो का पालन नहीं किया तो आनेवाले भीषण आपतकाल में उसको प्रकृति का बहुत बड़ा झटका सहना पड सकता है। इसलिए हमारे परिचितों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

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