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ऑनलाइन पढ़ाई करवाने वाले स्कूल सिफऱ् ट्यूशन फीस ही ले सकेंगे-सिंगला

  *  विजय इंदर सिंगला ने स्कूलों को कफ्र्यू / लॉकडाउन के दौरान ट्रांसपोर्ट, सैस चार्ज, बिल्डिंग चार्ज, दाखि़ला फीस, वर्दी खर्च या कोई अन्य अतिरिक्त फीस / ख़र्च न लेने की की हिदायत
  *  स्कूलों को अकादमिक सत्र 2020-21 के लिए फीस में वृद्धि न करने के लिए कहा
  *  किसी भी स्कूल को मुलाजि़मों की छटनी या वेतन में कटौती नहीं करनी चाहिए
  *  ट्यूशन फीस का समय पर भुगतान करने में असमर्थ होने पर बच्चों को न निकालने की दी सलाह
चंडीगढ़ (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) :  स्कूली बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री श्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा मुहैया करवा रहे स्कूलों को लॉकडाउन के दौरान सिफऱ् ट्यूशन फीस लेने की इजाज़त होगी और वह विद्यार्थियों से दाखि़ला फीस, वर्दी या किसी भी तरीके के अन्य कोई ख़र्च नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधकों को इस वैश्विक संकट के मद्देनजऱ अकादमिक सत्र के दौरान फीस या किसी अन्य खर्च में किसी भी तरह की वृद्धि से बचना चाहिए।
यहाँ जारी एक प्रैस बयान में श्री सिंगला ने कहा कि देश व्यापक कफ्र्य़ू / लॉकडाउन के दौरान वित्तीय गतिविधियां बेहद कम हो गई हैं। इसलिए विद्यार्थियों के अभिभावकों को राहत पहुँचाने की बहुत ज़रूरत है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ‘‘हम आदेश जारी करके स्कूलों के लिए यह लाजि़मी किया गया है कि वह लॉकडाउन के समय के दौरान सिफऱ् ट्यूशन फीस ले सकेंगे। सरकार के आदेशों में स्पष्ट है कि जो स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं लगा रहे हैं, सिफऱ् वही विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस लेने के हकदार होंगे। जो स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगा रहे, वह कोई फीस या फंड नहीं ले सकेंगे।’’ उन्होंने कहा कि हमारे लिए विद्यार्थियों के हित सबसे ऊपर हैं और इन नए दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राईवेट स्कूलों को ट्यूशन फीस लेने की आज्ञा देकर संतुलन कायम करने की कोशिश की गई है, जिससे वह अपने महीनावार खर्च चला सकें और अपने स्टाफ को समय पर वेतन दे सकें।
श्री सिंगला ने स्पष्ट कहा कि यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत जारी किया गया है, जिनका एकमात्र उद्देश्य विद्यार्थियों और उनके अभिभवकों को राहत पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी यह यकीनी बनाऐंगे कि कोई भी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा कोई ट्रांसपोर्ट फीस, सैस चार्ज, बिल्डिंग चार्ज या कोई अतिरिक्त ख़र्च न लें।
उन्होंने यह भी आदेश दिया कि अगर कोई विद्यार्थी ट्यूशन फीस समय पर जमा नहीं करवाता या किसी कारण देरी होती है, तो कोई भी स्कूल उस विद्यार्थी को स्कूल से नहीं निकालेगा। उन्होंने कहा कि इस महामारी के कारण ज़्यादातर अभिभावकों की आजीविका पर बुरा प्रभाव पड़ा है और स्कूल प्रबंधकों को इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने यह भी विकल्प दिया है कि अभिभावक अपने बच्चों की ट्यूशन फीस तिमाही की जगह महीनावार दे सकते हैं, जिससे अभिभावकों पर एक दम बोझ न पड़े।
स्कूलों के अध्यापकों और मुलाजि़मों के हितों की रक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने यह भी आदेश दिया कि स्कूल किसी भी हालात में अपने अध्यापकों और मुलाजि़मों के वेतन नहीं रोक सकते और न ही घटा सकते हैं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधकों को यह भी हिदायत की गई है कि वह लॉकडाउन और वित्तीय गतिविधियां कम होने के नाम पर अपने मुलाजि़मों को न निकालें। उन्होंने कहा कि जो स्कूल प्रबंधक अपने अध्यापकों और मुलाजि़मों के वेतन रोकेंगे या घटाएंगे, उनके खि़लाफ़ सख़्त कार्यवाही की जाएगी। शिक्षा विभाग पहले ही स्थिति पर नजऱ रख रहा है और निर्धारित मापदण्डों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्यवाही के लिए एक्शन कमेटी बना दी गई है।
श्री सिंगला ने कहा कि जि़ला शिक्षा अधिकारी यह यकीनी बनाएंगे कि उनके अधीन आने वाले सभी प्राईवेट स्कूल सरकारी आदेशों और शिक्षा विभाग के विस्तृत निर्देशों की पालना को यकीनी बनाएं।

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