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पंजाब प्रदुषण कंट्रोल बोर्ड ने आग लगाने वाले किसानों पर लगाए जुर्माने, प्रदुषण बढ़ा रहीं फैक्ट्रयों पर होगी सख्त कार्यवाही: प्रो. मरवाहा

हमें बढ़ रही ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर मैट्रोपालिटन शहरों से सीख लेने की जरूरत: चेयरमैन
पटियाला (रफतार न्यूज ब्यूरो)ः पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड पटियाला के चेयरमैन प्रो. एस एस मरवाहा की तरफ से गेहूँ की नाड़ और अवशेषों को जलाने से ए आई क्यू बढ़ा और प्रदूषित होते मौसम के कारण किसानों पर जुर्माने लगाए जा रहे हैं और उन्होंने विरुद्ध जुर्माने और कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
चेयरमैन ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिबूयनल, वातावरण मंत्रालय भारत सरकार और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने फैसला किया है कि 2 एकड़ से कम जमीन में आग लगाने पर 2500 रुपए जुर्माना, 2 एकड़ से 5 एकड़ जमीन में आग लगाने पर 5000 रुपए जुर्माना और उससे अधिक क्षेत्र में आग लगाने वाले किसान पर 15000 रुपए जुर्माने के इलावा आग लाने किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
प्रो. मरवाहा ने कहा कि करीब 4.5 लाख रुपए गेहूँ के अवशेषांे को आग लगाने वालों पर जुर्माना और कुछ पर कानूनी कार्यवाही भी की गई है।
उन्होंने कहा कि जिले के डिप्टी कमीशनरों के नेतृत्व में जिला वातावरण समितियाँ बनीं हुई हैं। उनके द्वारा सीधी आग लगाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है, इस के इलावा लोग पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के हैल्प लाईन नंबरों पर भी संपर्क कर सकते हैं।
प्रो. मरवाहा ने कहा कि लाक डाउन के दौरान फूड और दवा इंडस्ट्री तो चलती रही परन्तु दूसरे कारोबारों की फैक्टरियाँ बंद हो गई। लाक डाउन 3 में केंद्र सरकार की तरफ से रेल गाड़ीयाँ और बसें चलाने के कारण सिर्फ जिला लुधियाना से ही 13 लाख प्रवासियों ने अपने आप को पंजाब में से घर जाने के लिए रजिस्टर्ड किया।
पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड मुख्य दफ्तर पटियाला के चेयरमैन प्रो. एस एस मरवाहा ने कहा कि कई इंडस्ट्री एसोसिएशन के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यातायात के साधन बंद होने के कारण फैक्टरियाँ में कच्चा माल में खत्म हुआ पड़ा है जब तक यातायात के साधन नहीं खुलते उस समय तक फैक्ट्री का काम नहीं चल सकता यहाँ तक कि उनका तैयार माल भी यातायात के साधन और मार्केट खुलने पर ही निर्भर करता है।
प्रो एस एस मरवाहा ने कहा कि लाक डाउन 4 में काफी रियायतों मिलने की उम्मीद है इस समय जरूरी वस्तुएँ वाली इंडस्टरी और देहाती क्षेत्रों वाली इंडस्टरी चालू हो गई हैं।
मरवाहा ने प्रदुषण पर बातचीत करते हुए कहा कि लाक डाउन के कारण 23 मार्च से 13 अप्रैल तक ए क्यू आई पंजाब के बड़े शहरों में 30-35 था। परन्तु 5 तारीख को 9 मिनट के लिए प्रधानमंत्री ने 9 मिनट के लिए मोमबत्तियाँ जलाने के लिए कहा परन्तु कई लोगों ने 9 मिनट के बाद आतिशबाजी, पटाखे आदि चलाए जिस कारण पंजाब के 4 शहरों में ए क्यू आई 50 पार कर गया।
प्रो. मरवाहा ने कहा कि हम 14 तारीख से हारवैस्टिंग में आए और हमारा ए क्यू आई बढ़ कर 70 हो गया, परन्तु 16 से 18 अप्रैल तक हुई बरसात के कारण पंजाब का ए क्यू आई 50 से नीचे आ गया और अब फिर 50 से ऊपर है।
उन्होंने कहा कि स्टब्बल बर्निंग के कारण बठिंडा जैसे शहरों में ए क्यू आई 100 पार कर गया था परन्तु 2 दिन पहले बारिश पड़ने से गेहूँ के अवशेष गीले होने के कारण फिर एक बार ए क्यू आई कम होकर 60-70 हो गया है।
प्रो. मरवाहा ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिबूयनल के साथ बातचीत करते मैंने सुझाव दिया था कि हमें बढ़ रही ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को मैट्रोपालिटन शहरों से सीख लेने की जरूरत है उन्होंने कहा कि वहाँ शेयरिंग के गाड़ियाँ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल की जा रही है। जिससे साथ फ्यूल भी बचता है, खर्चा घटता है और एयर क्वालिटी भी सुधरती है।

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