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मंत्री मंडल द्वारा अर्थव्यवस्था और उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए आबकारी नीति और श्रम कानूनों में बदलाव करने संबंधी विचार-विमर्श

चंडीगढ़, (रफ़्तार न्यूज़ ब्यूरो) : राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योग को फिर से पैरों पर खड़ा करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा कोविड-19 के प्रभाव के मद्देनज़र आबकारी नीति और श्रम कानूनों में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है।
आज यहाँ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में हुई मंत्री मंडल की मीटिंग के दौरान यह मामले विचार-विमर्श के लिए सामने आए। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फिर दोहराया कि सरकारी मुलाजि़मों के लिए भी ‘मुख्यमंत्री कोविड राहत कोष’ में योगदान डालने का फ़ैसला स्वैच्छिक होना चाहिए, जैसे कि यह अन्य वर्गों के लिए है।
आबकारी नीति संबंधी मंत्री मंडल ने नीति और इसको लागू करने के लिए कोविड और लॉकडाउन के प्रभावों संबंधी विस्तार में विवरण माँगे हैं। आबकारी विभाग को इस संदर्भ में नीति को जाँचने पर विचार कल फिर हो, इस मुद्दे को मंत्री मंडल की मीटिंग के दौरान पेश करने के लिए कहा, जिससे इस पर और विचार-विमर्श किया जा सके।
मौजूदा स्थिति को असाधारण बताते हुए मंत्री मंडल ने महसूस किया कि राज्य के आबकारी उद्योग को फिर पैरों पर खड़ा करने ख़ासकर राज्य के राजस्व के मॉडल को महत्ता देने के लिए सभी संभव संभावनाएं तलाशी जानी चाहीए हैं।
इस पर ज़ोर देते हुए कि औद्योगिक क्षेत्र द्वारा कामगारों को अपने साथ जोड़ कर रखा जाये और कामगारों को पंजाब में रोकने पर ही ध्यान दें, मुख्यमंत्री द्वारा उद्योग मंत्री को निर्देश दिए गए कि कामगारों के कल्याण और देखभाल के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। इसी दौरान मंत्री मंडल द्वारा लॉकडाउन की बंदिशों में मिली छूट के चलते 9500 अन्य ईकाइयों के कार्यशील होने का स्वागत किया गया है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह अपने आप में सकारात्मक पहलू है कि औद्योगिक ईकाइयों द्वारा कामकाज चालू किये जाएँ जिसके स्वरूप अपने जद्दी राज्यों को वापस जाने के लिए रजिस्टर्ड होने वाले कामगारों में से अब तक 35 फीसदी ने पंजाब में ही रुकने का फ़ैसला किया है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में एलान किए गए चार औद्योगिक पार्कों के विकास के काम की निगरानी पूरी मुस्तैदी के साथ की जाए। कैबिनेट ने यह विचार रखा कि कई मुल्क अपने औद्योगिक कामकाज को चीन में से दूसरे मुल्कों में तबदील कर रहे हैं, इसके चलते उद्योग ख़ासकर फार्मास्यूटीकल, पैस्टीसाईड्स ईकाइयों के इधर आने की भरपूर संभावनाएं हैं।
इस दौरान मंत्री मंडल द्वारा प्रवासी कामगारों की कमी के चलते धान की बिजाई में स्पष्ट रूप से आने वाली मुश्किलों संबंधी भी सहमति अभिव्यक्त की गई।
कोविड महामारी के चलते अगली कतार में ड्यूटी निभा रही उन महिलाओं जिनके बच्चे (5 साल से कम उम्र के) हैं, के सरोकारों संबंधी मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को कहा कि वह विभिन्न विभागों के साथ इस संबंधी विचार करके ज़रूरी दिशा-निर्देश जारी करें, जिससे ऐसी महिला मुलाजि़मों की सुरक्षा को यकीनी बनाया जा सके।
स्कूलों के नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए तबादला नीति को मज़ूरी:-
इसी दौरान मंत्री मंडल द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए तबादला नीति को मंजूरी दी जो 2020-21 अकादमिक सैशन के लिए पहली अप्रैल 2020 से लागू होगी।
इस नीति के अंतर्गत स्कूलों /दफ्तरों को पाँच ज़ोनों में बाँटा गया। तबादला वर्ष में सिफऱ् एक बार हो सकेगा जो कि मेरिट पर आधारित सॉफ्टवेयर के द्वारा होगा। मेरिट निर्धारित करने के लिए मापदण्डों में से सर्विस की लंबाई के 95 अंक, विशेष कैटेगरी के मुलाजि़मों के लिए 55 अंक और प्रदर्शन के 90 अंक आदि होंगे।
एक स्टेशन पर काम करने वाले मुलाजि़म का तब तक तबादला नहीं हो सकेगा जब तक वह एक स्टेशन पर पाँच साल की सेवा पूरी नहीं करता। एक बार पाँच साल पूरे होने पर मुलाजि़म का लाजि़मी तबादला उसकी इच्छा के अनुसार होगा। यदि कोई मुलाजि़म अपनी इच्छा नहीं बताता तो उसका तबादला विभाग अपने आप कर देगा।

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