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ज्योतिष के प्रकांड विद्वान जो लोगों का भूत भविष्य देखने की क्षमता रखते हैं : श्री सनातन धर्म प्रचारक सेना

    पटियाला (पीताम्बर शर्मा) : शिव सेना हिंदुस्तान की धार्मिक शाखा श्री सनातन धर्म प्रचारक सेना के जिला अध्यक्ष पंडित बद्री प्रसाद जी ने तथा देहरादून गीता भवन से ज्योतिषाचार्य  देवी प्रसाद कांडपाल दिल्ली से ज्योतिषाचार्य ओमप्रकाश व्यास जी ने ज्योतिषी संशोधन एवं भिन्न-भिन्न पंचांग   जैसे वाणी भूषण  महिंद्र पंचांग मार्तंड पंचांग  दिवाकर पंचांग  की गणना के आधार पर  ज्योतिषी संशोधन करके  बताया कि लोग कहते हैं कि जब कोई संकट या समस्या आती है तो हर एक ज्योतिषी यह कहता है कि हमारे शास्त्रों में तो इस चीज के बारे में पहले ही लिखा हुआ है परंतु इस बात को कोई उजागर नहीं करता जब वैज्ञानिक उसका समाधान खोज लेते हैं उसके पश्चात कुछ बताने से कोई फर्क नहीं पड़ता आज कहीं लोग कह रहे हैं कि ज्योतिष के प्रकांड विद्वान जो लोगों का भूत भविष्य देखने की क्षमता रखते हैं वह इस बीमारी के ऊपर कोई कुछ क्यों नहीं बोल रहा दोस्तों हमारे शास्त्रों में और ज्योतिष की गणना के आधार पर वैज्ञानिक भूकंप जैसी बातों को समय के आने से 5 दिन पहले बताता है परंतु ज्योतिष में 100 साल पुराने पंचांग में यह पहले से ही लिखा होता है सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण आदि का विवरण हमारे पंचांग के अंदर कई वर्षों पहले लिखा जा चुका है ठीक उसी प्रकार इस महामारी के बारे में भी हमारे ज्योतिष के अंदर ग्रहों के प्रकोप एवं  ग्रह के प्रभाव से होने वाले महा प्रकोप के बारे में पहले से ही हमारे ज्योतिष शास्त्रों में गणितज्ञों ने निकाल कर के यह स्पष्ट किया है कि 29 अक्टूबर 2019 को शनि बृहस्पति और केतु एक साथ धनु राशि में गोचर कर रहे थे यह तीन ग्रह जब भी एक साथ आते हैं तो कोई ना कोई संकट कोई ना कोई ऐसी विपत्ति ले करके आते हैं जिससे कि भयानक नुकसान एवन काफी आपत्तिजनक समस्याएं उत्पन्न होती है और ठीक उसी प्रकार जब 29 अक्टूबर को यह तीनों ग्रह है एक साथ धनु राशि में गोचर कर रहे थे तो इस महामारी का जन्म हुआ ठीक 2 महीने बाद 29 सितंबर 2019 को सूर्य और बुध भी धनु राशि में आ गए तब यह पांचों ग्रह एक साथ मिले तो यह महामारी बहुत ज्यादा बढ़ गई परंतु जब मई 5 तारीख 2000 20 को शनि अपनी राशि मकर राशि में वक्री हो जाएंगे यह बीमारी सीधा 2 गुना बढ़ जाएगी परंतु इस समय पर देश और जनता को अपना बचाव पूर्ण तरीके से करना चाहिए क्योंकि ठीक 9 दिन बाद 14 मई 2020 को जब बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर राशि में वक्री हो जाएंगे तब समस्याएं कुछ सुधरने पर आ जाएंगी क्योंकि बृहस्पति जब भी नीच राशि में वक्री होते हैं तो शुभ फल की प्राप्ति देते हैं परंतु यह भी कुछ ज्यादा समय नहीं चलेगा ठीक 2 महीने बाद 15 जुलाई 2020 गुरु मकर राशि को छोड़कर के धनु राशि में प्रवेश कर लेंगे और जैसे ही बृहस्पति धनु राशि में प्रवेश करेंगे वहां पहले से ही केतु महाराज विराजमान है और केतु और 10 पति इस महामारी को फिर से जीवित करेंगे फिर से ऐसी समस्याएं उत्पन्न होंगी और यह बीमारी पुनर्जीवित हो जाएगी और उस समय यह बीमारी अपने रूप को बदल कर के अनेकों रूपों में नजर आएगी उसके पश्चात 5 अगस्त 2020 को सनी भी अपनी राशि को छोड़कर के धनु राशि में पहुंच जाएंगे उसके पश्चात हमें इस बीमारी का भयंकर रूप देखने को मिलेगा परंतु ज्यादा समय नहीं चलेगा 3 सितंबर 2020 के तू राशि परिवर्तन करके धनु से वृश्चिक राशि में चले जाएंगे और जब केतु वृश्चिक राशि में जाएंगे तब जाकर के इस महामारी से बचने के लिए कोई सुनिश्चित उपाय मिलेगा कोई ऐसी दवाई मिलेगी कि जिससे इस बीमारी पर विजय प्राप्त की जाएगी उसके पश्चात 15 सितंबर 2020 बृहस्पति भी मार्गी हो जाएंगे और उसके बाद स्थिति सुधरने पर आ जाएगी 28 सितंबर 2020 को शनि भी मार्गी हो जाएंगे उसके पश्चात ही इस बीमारी पर पूर्णता विजय प्राप्त होगी और उसके बाद इस महामारी से किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं रहेगा
 कई लोग शास्त्रों पर टिप्पणी खासतौर पर ज्योतिष विद्या पर लोग कई प्रकार के व्यंग साधते हैं मैं उन लोगों को विशेष तौर पर अवगत कराना चाहूंगा कि कुछ समय पहले हमारे पूर्वज अपने पुरोहितों को ब्राह्मणों को बसंत पंचमी के दिन पूरा पंचांग का विवरण सुनकर के पूरे साल का अपना दिनचर्या बनाते थे परंतु लोग आज अपने कारोबार की भाग दौड़ में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि लोग बसंत पंचमी के दिन अपने पंचांग को सुनने की बजाय पश्चिमी सभ्यता की तरफ भाग रहे हैं केवल 10 परसेंट लोग जिन्होंने पंचांग को बसंत पंचमी के दिन सुना होगा उन्हें आज भी इस बात का ज्ञान है कि हमारे ब्राह्मणों ने हमें इस बात से पहले ही अवगत कराया था कि कोई महामारी भयंकर रूप लेकर के आने वाली है अभी भी आप अपनी संस्कृति की तरफ आने का प्रयास करें तो ऐसी महामारी का जन्म दोबारा नहीं  होगा
 इस महामारी से बचने का एक ही उपाय है अपना बचाव और सभी सनातन प्रेमियों को इस समय अपने पुरोहितों को अपने ब्राह्मणों को अपने नाम का संकल्प दे कर के अपने नौ ग्रहों को बल देने के लिए जप तप आदि करवाने के लिए संलग्न रहना चाहिए और खुद भी प्रभु का स्मरण और जप करना चाहिए क्योंकि कलयुग में पहले ही ग्रंथों ने लिखा है
 कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर होवत पारा
अतः अगर इस कलयुग के इस महामारी की बीमारी से बचना है तो परमात्मा का नाम जप सिमरन दान ही आपको इस महामारी से बचा सकता है
 ज्योतिषाचार्य  बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि यह महामारी नहीं यह हमारे धर्म ग्रंथों की एवं संस्कृति की चेतावनी है इसीलिए शास्त्र पहले से ही बताता आया है हाथ ना मिला कर हाथ जोड़कर के प्रणाम करें जूते चप्पल घरों के अंदर ना ले जाकर के हाथ पैर धोकर के अंदर जाए मृतक शरीर को जमीन में ना गाड़ कर अंतिम संस्कार करें आज अमेरिका जैसे देश भी सनातन संस्कृति को मान रहे हैं और हम भारतवर्ष में रहकर के पश्चिमी सभ्यता की तरफ जाने की जो भूल कर रहे थे उसे सुधारने के लिए यह अवसर इस महामारी के रूप में आया है आज भी अपनी सभ्यता को अपनाने का समय है अतः अपने ग्रंथों को श्रवण करें और मनन करें

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