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चीन से करोना वायरस के बाद अब जानवरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू: असम में 30 लाख सुअर, 2500 सुअरों की मौत

* यह वायरस भी अरुणाचल प्रदेश और फिर असम पहुंचने की आशंका
* वायरस का संक्रमण सुअर के मांस, लार, खून और टिश्यू से फैल रहा है
* यह वायरस इंसानों के जरिए भी जानवरों में ंफैल रहा है

गुवाहाटी (रफतार न्यूज ब्यूरो): अफ्रीकन स्वाइन फ्लू पिछले साल अप्रैल में चीन के शिजांग से शुरू हुआ था। शिजांग की सीमा अरुणाचल प्रदेश से लगती है। इसलिए इस आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का वायरस चीन से पहले अरुणाचल प्रदेश पहुंचा और फिर असम में आया।
ज्यादातर आवारा सुअर संक्रमित पाए गए हैं, लेकिन अब फार्मों वाले सुअरों में भी इन्फेक्शन मिलने से चिन्ता बढ़ गई है। एक किसान के 230 सुअर मर गए। इससे पहले उसके कर्मचारी का सुअर मर गया था। इसलिए आशंका है कि उस कर्मचारी के जरिए वायरस फार्म तक पहुंचा। ऐसा कुछ दूसरे फार्मों में भी देखा गया। यानी यह वायरस इंसानों के जरिए भी जानवरों में ंफैल रहा है हालांकि, इंसानों को इससे कोई नुकसान नहीं होता।
भारत में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का पहला मामला असम में सामने आया है। असम सरकार का दावा है कि वहां के सात जिलों के 306 गांवों में रविवार तक 2500 सुअरों की मौत हो गई है। असम के पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बावजूद सुअरों को मारने का कदम तुरंत नहीं उठाएंगे। बल्कि इस संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए दूसरा तरीका ढूंढेंगे। बोरा ने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का इंसानों पर इसका असर नहीं होता।
बोरा ने कहा कि 2019 के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में सुअरों की संख्या 21 लाख थी, जो अब बढ़कर 30 लाख हो चुकी है। हमने एक्सपर्ट से बात की है कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से सुअरों को कैसे बचाया जाए? जो सुअर संक्रमित नहीं हैं, उन्हें बचाने के लिए स्ट्रैटजी बनाई है। संक्रमण वाले इलाकों के एक किलोमीटर के दायरे में सैंपल लिए जाएंगे। जो सुअर संक्रमित होंगे, उन्हें मार दिया जाएगा।
बोरा ने कहा कि गुवाहाटी की 3 लैब्स में टेस्टिंग की जाएगी लेकिन, यह काफी नहीं होगा। इसलिए अधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने के लिए कहा है। वायरस का संक्रमण सुअर के मांस, लार, खून और टिश्यू से फैल रहा है। इसलिए अब एक से दूसरे जिले में सूअरों का ट्रांसपोर्टेशन नहीं किया जाएगा। असम से सूअरों की आवाजाही रोकने के लिए भी तुरन्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं उन्होंने पड़ोसी राज्यों से भी अपील की है कि सुअरों का मूवमेंट रोकने के इंतजाम करें।

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