Breaking News
Home / Breaking News / सरकार के आदेशो के खिलाफ जाकर ज्यादा फीस मांगने वालो को थमाया जा रहा है नोटिस

सरकार के आदेशो के खिलाफ जाकर ज्यादा फीस मांगने वालो को थमाया जा रहा है नोटिस

चंडीगढ़ । ( देव श्योकंद )

निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें लगाने वाले प्राइवेट स्कूलों पर शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। बगैर मंजूरी के राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताबों से अलग पुस्तकें लगाने वाले स्कूल संचालकों पर कार्रवाई होगी। साथ ही तीन महीने की फीस और वार्षिक शुल्क मांग रहे कई स्कूलों को नोटिस थमाया गया है।शिक्षा निदेशालय में लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं कि बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालक अभिभावकों पर फीस वसूली और निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। न केवल छोटे स्कूल, बल्कि नामी-गिरामी संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों द्वारा बकायदा मोबाइल फोन पर संदेश भेजे जा रहे कि भले ही सरकार ने शुल्क नहीं लेने का निर्देश जारी किया है, लेकिन स्कूल के अपने खर्चे हैं। स्टाफ की सैलरी भी देनी होगी, इसलिए शुल्क जमा कराकर सहयोग करें। फीस नहीं देने पर आपके बच्चे का नाम काट दिया जाएगा।इस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि किसी भी अभिभावक से जबरन फीस नहीं ली जा सकती। अगर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपी गईं तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। भारी जुर्माने से लेकर स्कूल की मान्यता रद करने तक का कदम शिक्षा विभाग उठा सकता है ।कई स्कूल संचालकों ने लॉकडाउन में अभिभावकों की बिगड़ी आर्थिक स्थिति को देखते हुए तीन महीने की फीस माफी से लेकर किताबों और स्टेशनरी की कीमत में भारी भरकम छूट देने की घोषणा की है। अगर किसी अभिभावक ने शुल्क जमा भी कराया है तो जुलाई-अगस्त की फीस में इसे समायोजित कर दिया जाएगा। करनाल के पट्टी सालवन स्थित आदर्श पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद के डिवाइन पब्लिक स्कूल और यमुनानगर के स्प्रिंग फील्ड्स पब्लिक स्कूल सहित ऐसे निजी विद्यालयों की फेहरिस्त लंबी है, जिन्होंने महामारी का हवाला देते हुए कई तरह की रियायतें अपने छात्रों को दी हैं। साथ ही विभिन्न शिक्षण संस्थाओं ने कई-कई लाख रुपये कोरोना रिलीफ फंड में जमा कराए । हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल बसों का किराया नहीं लेंगे। अभिभावकों को भी सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत एक-एक महीने की फीस जमा कराने में सहयोग करना चाहिए ताकि स्टाफ को समय पर वेतन दिया जा सके। कोई स्कूल तीन महीने की फीस नहीं लेगा। अगर किसी अभिभावक के पास एक महीने की फीस देने में भी दिक्कत है तो वह लिखित आग्रह दे सकता है। ऐसे में कोई भी स्कूल संचालक उस पर फीस जमा कराने के लिए दबाव नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान बसों के रिन्यूवल, फिटनेस, परमिट फीस, बीमा और रोड टैक्स माफ करना चाहिए।

About admin

Check Also

नवजोत सिद्धू पंजाब कांग्रेस के प्रधान होंगे, 4 कार्यकारी प्रधान भी होंगे नियुक्त … 

दिल्ली, 17 जुलाई  (रफ्तार न्यूज संवाददाता)  : सूत्रों के हवाले से ख़बर आई है कि …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share
gtag('config', 'G-F32HR3JE00');