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हरे राशन कार्ड धारक ग़रीब को भी मिलना चाहिए अनाज- हुड्डा

चंडीगढ़ ।

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने डिपो होल्डर्स और उनके ज़रिए बंटने वाले राशन का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि महामारी के इस दौर में सरकार का सहयोग करने के साथ उसका ध्यान उन गरीब और ज़रुरतमंद परिवारों की तरफ दिलाना ज़रूरी है, जो पूरी तरह से सरकारी मदद के सहारे हैं। हुड्डा ने कहा कि लॉकडाउन को देखते हुए सरकार ने पीले और गुलाबी राशन कार्ड धारकों को डिपो होल्डर्स के ज़रिए दोगुना राशन देने का का वादा किया था। सरकार की तरफ से लिया गया ये अच्छा फ़ैसला था। लेकिन डिपो होल्डर्स के पास दोगुना तो छोड़िए, पहले जितना देने लायक भी राशन नहीं पहुंच रहा है। इसलिए डिपो होल्डर्स के साथ हज़ारों ग़रीब परिवारों की मांग है कि सरकार उनके लिए जल्द पर्याप्त राशन का बंदोबस्त करे ।हां राशन बंट रहा, वहां कई जगह से उसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आ रही हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें बिना डेट या एक्सपायरी डेट का आटा बांटा जा रहा है। ये सीधे तौर पर ग़रीबों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। सरकार को फ़ौरन ऐसी शिकायतों का संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, सरकार को फ्री राशन मुहैया करवाने की घोषणा के दायरों को भी बढ़ाना चाहिए। मुफ्त राशन का फ़ायदा उन ग़रीब परिवारों को भी दिया जाना चाहिए जिनके पास हरे राशन कार्ड हैं। हरे कार्ड धारक हज़ारों परिवार ऐसे हैं, जिन्हें ग़रीबी के चलते सरकारी मदद की दरकार है। बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो दिहाड़ी-मजदूरी, दुकानदारी, बारबर, मिस्त्री, कारीगर, फेरी, ऑटो रिक्शा और रिक्शा चलाने जैसे व्यवसाय से जुड़े हैं। लॉकडाउन की वजह से उनकी आमदनी बिल्कुल ज़ीरो हो चुकी है। इसलिए सरकार को उनके परिवारों की मदद के लिए भी विशेष आदेश जारी करने चाहिए और दिल्ली सरकार की तर्ज़ पर उन्हें 5-5 हज़ार देने चाहिए।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आढ़तियों और सरकार के बीच चल रहे टकराव को देखते हुए सरकार से अपील की और कहा कि किसान और आढ़ती का रिश्ता सदियों पुराना है। सैंकड़ों साल पहले से ही किसान और आढ़ती का आपस में लेन-देन होता रहा है। इस नाज़ुक समय में भी ये रिश्ता टूटना नहीं चाहिए। इसलिए सरकार से अपील है कि आढ़तियों के साथ सरकार का जो समझौता हुआ था उस पर वो कायम रहे। आज किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच रहा है, इसलिए सरकार और आढ़ती, दोनों आपसी विवाद सुलझाकर पूरा ध्यान फसल ख़रीदने पर लगाएं। दोनों की कोशिश मंडियों में किसानों के लिए सुविधाएं जुटाने की होनी चाहिए।

मौसम का कुछ पता नहीं, वो किसी भी समय करवट बदल लेता है। इसलिए सरकार से अपील है कि वो मंडी में तिरपाल और बारदाना का समुचित प्रबंध कराये। वक़्त रहते इसपर ध्यान दिया गया तो फसल के भण्डारण में कोई दिक्कत नहीं आएगी और विपरीत परिस्थिति में भी अनाज ख़राब नहीं होगा।

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