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कांग्रेस का आरोप , कोरोना फंड के नाम पर जबरन वसूली कर रही हरियाणा सरकार

नई दिल्ली ।

कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कर्मचारियों से इस प्रकार जबरन वसूली करना खट्टर सरकार की जोर जबरदस्ती की मानसिकता का दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है। एक तरफ तो हरियाणा के कर्मचारी सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों से परेशान हैं, और दूसरी तरफ सरकारी फरमान के जरिए 20प्रतिशत तक वसूली की जा रही है।मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर यह भूल गए कि हरियाणा की परंपरा ही दानी और दरियादिली है। कारगिल युद्ध हो, सूनामी हो,केदारनाथ त्रासदी हो या कोरोना से लड़ाई, हरियाणा के सरकारी कर्मचारी व जनता अपनी श्रृद्धा व सामर्थ्य के अनुसार न केवल दान दे रहे हैं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक राशन-पानी-दवाईयां भी पहुंचा रहे हैं। रोना से जंग में हरियाणा के कर्मचारी अपनी जान की बाजी लगाकर आगे खड़े हैं। पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट यानि एन95 मास्क, गॉगल, ग्लव्स, बॉडी कवरऑल आदि न उपलब्ध होने के बावजूद भी हमारे डॉक्टर, नर्स व स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं। पुलिस के कर्मचारी व अधिकारी दिन रात चप्पे-चप्पे पर ठीकरी पहरा लगाए बैठे हैं। विद्युतकर्मी बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने की निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, तो जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पानी की आपूर्ति करने में लगे हैं। शिक्षक घर-घर जाकर मिड-डे मील बच्चों तक पहुंचा रहे हैं, तो गांव व शहर के सफाई कर्मचारियों ने सफाई व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने का बीड़ा उठाया है। इस सबके बावजूद भी 07 अप्रैल, 2020 तक खट्टर सरकार द्वारा कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं दी गई है। चौंकानेवाली बात तो यह है कि इस जबरन वसूली से स्वास्थय विभाग के डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मियों व दूसरे अधिकारियों तक को नहीं बख्शा गया। एक तरफ तो पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट के अभाव में डॉक्टर व नर्स कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं, तथा रेनकोट व हैलमेट पहनकर कोरोना का इलाज करने को बाध्य हैं, तो दूसरी तरफ उनसे की जा रही यह वसूली सरकार के अमानवीय तथा असंवेदनशील रवैये को साबित करती है। यही हाल पुलिस कर्मियों व सफाई कर्मचारियों का भी है। हर विभाग के प्रमुख को यह हिदायत दी गई है कि कर्मचारियों के व्हाट्सऐप ग्रुप में सख्ती से आदेश कर जबरन वसूली करें। इसका सबूत किसी भी सरकारी कर्मचारियों के व्हाट्सऐप ग्रुप को देखने से मिल जाएगा।

सरकार से हम पाँच सवाल पूछते हैं

सुरजेवाला ने सरकार को घेरते हुए पाँच सवालों के जवाब माँगे हैं । दान के नाम पर खट्टर सरकार कर्मचारियों से जबरन वसूली क्यों कर रही है? .​क्या सरकारी फरमान जारी कर दान न देने वाले कर्मचारियों का वेतन रोकना या काटना उचित है?   क्यामुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसदों, विधायकों, बोर्ड/कॉर्पोरेशन/कमीशन के चेयरमैनों व सदस्यों द्वारा अपनी तनख्वाह से कोरोना रिलीफ फंड में राशि दान की गई है? अगर हां, तो यह राशि कितनी है । .​क्या इस रिलीफ फंड का इस्तेमाल डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, सफाई कर्मचारियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट व एन95 मास्क आदि खरीदने के लिए किया गया है? यदि हां, तो इस पर कितनी राशि खर्च हुई है?.​खट्टर सरकार ने आज तक इस फंड से किस मद में कितना पैसा खर्च किया? किस कंपनी तथा किस सप्लायर को किस एवज में कितना भुगतान हुआ? क्या कोरोना रिलीफ फंड की वेबसाईट बनाकर प्रतिदिन पैसे के इस्तेमाल व खर्चे की सूचना जनता से साझा करेंगे?

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