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आरटीआई में खुलासा सिरसा की गौशालाओं में सवा साल में 10,772 गौवंश की मौत 

आरटीआई में खुलासा हुआ है कि जिला सिरसा की गौशालाओं में सवा साल में 10,772 गौवंश मर गए। अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 के बीच 16 माह में औसतन 673 गौवंश दम तोड़ते रहे। हरियाणा सरकार व जिला सिरसा प्रशासन खामोश रहे। जबकि एडीसी सिरसा की अध्यक्षता में दो बार हुई मीटिंगों में इतनी भारी संख्या में गौवंश की मौतों बारे चर्चा तक नहीं हुई। सर्वाधिक 1409 गौवंश श्री कृष्ण गौशाला में मरे। जिले में 4226 बेसहारा पशु सडक़ों पर हैं। सूचना अधिकार प्रहरी ने इतनी भारी संख्या में गौवंश के मरने की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। हरियाणा गौ सेवा आयोग की कारगुजारी भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
पानीपत के सूचना अधिकार प्रहरी पीपी कपूर ने बताया कि 5 सितम्बर 2019 को गौ सेवा आयोग को आरटीआई लगाकर प्रदेश की सभी गौशालाओं में मरे गौवंश की संख्या, लावारिस गौवंश क संख्या, जिला स्तरीय स्ट्रे कैटल फ्री कमेटियों द्वारा बनाए गए एक्शन प्लान, गौ रक्षकों की कुल संख्या, शेष पकड़े जाने वाले आवारा पशुओं की संख्या की सूचना मांगी थी। लेकिन हरियाणा गौ सेवा आयोग ने बिना कोई ठोस सूचना दिए आवेदन पत्र को महानिदेशक पश्ुापालन, सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, सभी शहरी स्थानीय निकायों आदि को भेजकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
 कपूर ने बताया कि सघन पशुधन विकास परियोजना सिरसा के उपनिदेशक ने अपने 18 अक्टूबर 2019 के पत्र द्वारा जिला सिरसा की गौशालाओं में अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 की अवधि में मरे गौवंश के चौंकाने वाले आंकड़े दिए हैं। इसके अनुसार इस अवधि में कुल 10,772 गौवंश सिरसा के विभिन्न गौशालाओं में मरे। कपूर ने बताया कि दिनांक 7 अगस्त 2018 को नगराधीश व दिनांक 21 नवम्बर 2018 को एडीसी सिरसा की अध्यक्षता में बेसहारा पश्ुा कल्याण समिति की उच्चस्तरीय बैठकें भी हुई। लेकिन इन दोनों बैठकों में बेसहारा गौवंश की इतनी भारी संख्या में हुई मौत बारे कोई चर्चा तक नहीं की गई।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग पानीपत के डिप्टी डायरेक्टर ने सूचित किया कि गौशाला प्रबंधकों के पास गौशालाओं में मरे गौवंश का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। कपूर ने आरटीआई से मिले इन जवाबों पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बेसहारा गौवंश की दयनीय हालत व आवारा पशुओं से जनता को हो रही परेशानी से आंखें मूंदे हुए है। सरकार को इतनी भारी संख्या में गौवंश के मरने की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। आवारा पशुओं के प्रकोप से जनता को मुक्त कराना चाहिए।

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