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स्वराज इंडिया लड़ेगी हरियाणा में विधानसभा चुनाव

नवगठित राजनैतिक दल “स्वराज इंडिया”हरियाणा विधानसभा के आगामी चुनाव में सभी सीटों पर भाग लेगी। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित करते हुए यह सूचना स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने दी। उन्होंने कहा कि आज राज्य की राजनीति या तो जेल से चल रही है या फिर जेल की तरफ ताक रही है। ऐसे में स्वराज इंडिया प्रदेश में सच्ची प्रतिपक्ष की राजनीति स्थापित करेगी और जनता के मुद्दों को चुनाव में लेकर उतरेगी।

 

योगेंद्र यादव ने कहा कि स्वराज इंडिया प्रदेश में राजनीति का मुहावरा और ढर्रा बदलने आई है। बाकी सब पार्टियां सत्ता की खेती करने के लिए चुनाव लड़ रही हैं स्वराज इंडिया सच की खेती के लिए उतर रही है। हम पांच साल की फसल काटने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले पांच साल के लिए बीज बोने के लिए चुनाव में उतरे रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले चार साल से स्वराज अभियान और स्वराज इंडिया ने देशभर में खेती के संकट, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाया है। स्वराज इंडिया के संघर्ष के चलते ही प्रदेश में बाजरा और सरसों की फसल की सरकारी खरीद में बढ़ोतरी हो सकी।

 

पार्टी घोषणापत्र नहीं ईमानपत्र करेगी जारी – यादव

 

यादव ने कहा कि खोखले वादे और झूठे दावे से भरे घोषणा पत्र जारी करने की बजाय स्वराज इंडिया ठोस नीति कार्यक्रम वाला “ईमानपत्र” जारी करेगी। फिलहाल पार्टी अध्यक्ष ने उन पांच मुद्दों को चिन्हित किया जिनके इर्द-गिर्द स्वराज इंडिया अपना चुनाव अभियान चलाएगी:

 

1. किसानों को अपनी फसल की पूरी लागत का कम से कम डेढ़ गुणा दाम व पूर्ण कर्जा मुक्ति सुनिश्चित किया जाए

2. शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार ढूंढने के लिए सरकार की तरफ से विशेष स्टाइपेंड दिया जाए

 

3. शराब के ठेके चलाने या खोलने के लिए ग्राम सभा में महिलाओं की अनुमति अनिवार्य कर दी जाए

 

4. खेती में लगे और अन्य दिहाड़ी के मजदूर को न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाए

 

5. राज्य की बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार किया जाए।

 

प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की राजनीति को आड़े हाथ लेते हुए स्वराज इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गोदारा ने कहा कि हरियाणा में राजनीतिक शून्य की स्थिति बन रही है। एक ओर राज्य में रोजगार घटा है, किसान को MSP नहीं मिली, कर्मचारी सड़क पर है, और समाज में जातीय और धार्मिक द्वेष बढ़ा है। मगर दूसरी ओर भाजपा सत्ता के खेल में मशगूल है और स्थापित विपक्ष बदहवास है !

 

डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को पैरोल देने के सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की मिलीभगत को प्रदेश की राजनीति के दिवालियापन का नमूना बताते हुए उन्होंने कहा की प्रदेश की राजनीति में जनता की आवाज उठाना अब पार्टियों के बस की बात नहीं रही। प्रदेश में जाट बनाम गैर जाट की राजनीति को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि हम “मिलके पैंतीस एक, बने छत्तीस एक” का नारा बुलंद करेंगे।

 

पार्टी की प्रेजिडिम की सदस्य शालिनी मालवीय ने कहा कि पार्टी के दरवाजे उन तमाम सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ताओं खासतौर पर महिलाओं और युवाओं के लिए खुले हैं जो प्रदेश में जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।

 

 

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