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ज़िंदगी की जंग हार गया फतेहवीर, सरकार और प्रशासन पर उठे की सवाल

पंजाब में सुनाम के नजदीक गांव भगवानपूरा में बोरवेल से जब फतेहवीर को बाहर निकालकर अस्पताल लेजाया गया तो डॉक्टरों ने वहां कहा कि फतेहवीर अब नहीं रहा। ये ख़बर सुनते ही पंजाब में लोग मातम में डूब गये। पिछले 4 दिन से हर कोई फतेहवीर के लिये अरदास कर रहा था कि फतेहवीर सही सलामत बाहर आ जाये लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

 

फतेहवीर को बोरवेल में गिरने के 109 घंटे बाद बाहर निकाला गया। प्रशासन का तरीके पर सवाल खड़े होते हैं कि इतना वक्त कैसे लग गया। क्या आज के आधुनिक युग में ऐसी कोई तकनीक या मशीन नहीं है जो जल्दी बच्चे को बाहर निकाल पाये। प्रशासन ने एनडीआरएफ का सहारा लिया लेकिन लोग दो दिन बाद ही कहने लग गये थे कि काश सेना को बुला लिया होता।

 

हालांकि पिछले दो दिन से कहा जा रहा था कि फतेहवीर चंद मिंटो में बाहर निकलने वाले हैं लेकिन फतेहवीर तक पहुंचने का रास्ता हर बार गलत निकला। 3 साल का मासूम बोरवेल में गिरा और ज़िंदगी की जंग हार गया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने अफसोस जताया है लेकिन जनता मुख्यमंत्री के लेट रिस्पॉंस से भी बहुत गुस्से में है।

 

फतेहवीर अपने पीछे कई सवाल सरकारों और प्रशासन के लिये छोड़ गया है। फतेहवीर का सवाल ये भी है कि अगर ये बच्चा किसी नेता का होता तो कितने समय में बाहर निकाल लिया जाता या कौनसी मशीन कहां कहां से मगवा ली जाती। फतेहवीर का सवाल ये भी है कि ये युग मशीनी युग है यहां जुगाड़ से काम नहीं चलता। फतेहवीर के इन सवालों पर बहस खूब होगी लेकिन जवाब सरकार या प्रशासन देगा नहीं सिर्फ खानापूर्ती करेगा।

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