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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने फसल विविधीकरण पायलट योजना की शुरूआत की

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को चण्डीगढ में ‘फसल विविधीकरण पायलट योजना’ की शुरूआत की। उन्होंने विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के धान बाहुल्य जिलों अम्बाला के अम्बाला-1 व साहा खण्ड, यमुनानगर के रादौर खण्ड, करनाल के असंध खण्ड, कुरुक्षेत्र के थानेसर खण्ड, कैथल के पुण्डरी खण्ड, जींद के नरवाना खण्ड तथा सोनीपत के गन्नौर खण्ड में इस योजना की शुरुआत की।

 

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ‘फसल विविधीकरण पायलट योजना’ का ब्राउशर का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगभग 25 किसानों से सीधा संवाद करते हुए किसानों से अपील की कि वे धान की बुआई कम करने का मन बनाए तथा सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का लाभ उठाएं और इसमें अपना सहयोग दें। किसानों ने मुख्यमंत्री की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि आज हमें प्रदेश में ऐसा मुख्यमंत्री देखने को मिला है जिसने खेती व जल बचाने की बात सोची और यदि खेत व जल बचेगा तो किसान निश्चित रूप से ज्यादा समृद्ध होगा।

मनोहर लाल खट्टर ने चरखी दादरी जिले की ग्राम पंचायत पैंतावास कलां का विशेष आभार व्यक्त किया जिन्होंने प्रस्ताव पारित कर अपने गांव में धान की फसल न बोने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि डार्क जोन व दिन-प्रतिदिन गिरता भूजल हमारे लिए एक चुनौती बन रहा है और आने वाली पीढिय़ों के लिए इसी चुनौती का समाधान निकालने की हमने एक शुरूआत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पंचायतों ने पंचायती जमीन ठेके पर दी है उन पट्टेदारों से भी अपील करें कि वे धान के स्थान पर मक्का, अरहर व अन्य फसल की बुआई करें।

अगले साल से पंचायती जमीन पर धान की फसल ना उगाने की शर्त जुड़ जायेगी- मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन ठेके पर दी जा चुकी है इसलिए हम ऐसे किसानों को जिन्होंने ठेके पर जमीन ली है उनको धान न उगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं परंतु ऐसी अपील जरूर कर सकते हैं कि वे धान की सीधी बिजाई करें। उन्होंने कहा कि अगले साल से ठेके पर दी जाने वाली पंचायती व सरकारी जमीन पर धान की फसल न उगाने की शर्त जोड़ दी जाएगी।


इस अवसर पर मुख्य सचिव  डी.एस.ढेसी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है जब जल बचाने की मुहिम हरियाणा में शुरू की है। उन्होंने सम्बंधित जिलों के उपायुक्तों व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के क्षेत्र में कार्यरत उप-निदेशक  स्तर के अधिकारियों से आह्वान किया कि वे मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई इस पहल की जानकारी अपने जिलों के किसानों तक अवश्य पहुंचाएं।

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