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बेटा बीजेपी सरकार में मंत्री , पौते को कांग्रेस से दिलवाया टिकट

हिमाचल के वरिष्ठ नेता पंडित सुखराम के पौते आश्रय शर्मा को कांग्रेस ने मंडी से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया है। कुछ दिन पहले ही पंडित सुखराम अपने पौते को लेकर दिल्ली पहुंचे और राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुये। कांग्रेस ने भी देर नहीं लगाई और आश्रय शर्मा को मंडी से मैदान में उतार दिया।

 

राजनीति के खिलाड़ी पंडित सुखराम राजनीति में मौका देख कर चौका मारने वाले खिलाड़ी हैं। पंडित सुखराम का बेटा अनिल शर्मा हिमाचल की बीजेपी सरकार में मंत्री है। अनिल शर्मा भी कांग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन हिमाचल में विधानसभा चुनाव से पहले पंडित सुखराम जी अपने बेटे के साथ बीजेपी में चले गये। बीजेपी ने भी देर नहीं लगाई और अनिल शर्मा को मंडी की विधानसभा से उम्मीदवार बनाया और फिर प्रदेश सरकार में मंत्री।

 

बेटा बीजेपी में तो पौता कांग्रेस में ….

 

पंडित सुखराम के दोनों हाथों में अब लड्डू हैं। बेटा बीजेपी की सरकार में मंत्री और पौते को कांग्रेस से लोकसभा का टिकट दिलवा दिया। इसे कहते हैं राजनीति। मतलब कुर्सी के लिये कुछ भी करेगा।

 

प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल शर्मा जो कि पंडित सुखराम के बटे हैं वो धर्मसंकट में है। ऐसा अनिल शर्मा ने खुद कहा है कि वो क्या करे क्या ना करे। मतलब वो बीजेपी के लिये प्रचार करेगा या फिर अपने बेटे और कांग्रेस के लिये। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पंडित सुखराम का इस उम्र में कांग्रेस में शामिल होने से मजाक उड़ रहा है।

 

आश्रय शर्मा के बड़े भाई को सलमान खान ने बॉलीवुड में किया था लांच….. 

 

आश्रय शर्मा अनिल शर्मा का छोटा बेटा है और आयुष शर्मा का छोटा भाई है। आयुष शर्मा, सलमान खान के जीजा हैं। सलमान खान ने उन्हें बॉलीवुड में लॉंच किया था। हालांकि उनकी फिल्म नहीं चली और वो बॉलीवुड में संघर्ष कर रहे हैं।

 

पंडित सुखराम का पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह से 36 का आंकड़ा रहा है लेकिन अब पौते को कांग्रेस से टिकट मिल गई तो वीरभद्र सिंह से भी मुलाकात करनी पड़ी क्योंकि चुनाव में मदद जो चाहिये। खबर है कि आश्रय शर्मा को टिकट मिलने से मंडी में कई कांग्रेसी विरोध कर रहे हैं।

 

पंडित सुखराम के घर से जब मिले थे सीबीआई को करोड़ों रूपये……

 

पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम उस समय सुर्खियों में आये थे जब पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में दूर संचार मंत्री थे। साल 1996 में सुखराम का नाम टेलीकॉम घोटाले में उछला था, सीबीआई ने सुखराम, रुनु घोष और हैदराबाद स्थित एडवांस रेडियो फॉर्म कंपनी के मालिक पर केस दर्ज कर सीबीआई की एक टीम उनके दिल्ली के सफदरजंग स्थित आवास पर पहुंची और छापेमारी की। सुखराम के घर से 2.45 करोड़ रुपये बरामद हुए थे।

 

दिल्ली के अलावा सीबीआई की एक टीम ने सुखराम के हिमाचल के मंडी स्थित बंगले पर भी छापेमारी की थी। सीबीआई को वहां से 1.16 करोड़ रुपये मिले थे, पैसे दो संदूकों और 22 सूटकेस में रखे थे। सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुखराम के खिलाफ नया केस दर्ज कर लिया और 19 नवंबर 2011 को टेलीकॉम घोटाले में सीबीआई की अदालत ने उन्हें पांच साल की सजा सुनाई थी।

 

दलबदलू के तौर पर पहचान रही है पंडित सुखराम की……

 

देश में भ्रष्टाचारी नेताओं का जब जिक्र होता है तो उसमें नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम का भी आता है उसके बावजूद मंडी के लोगों के लिए वो विकास पुरुष रहे हैं। हालांकि 2007 से सुखराम सक्रिय राजनीति से दूर हैं लेकिन आज भी कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के नेता उनके भ्रष्टाचार वाले एंगल पर खुलकर नहीं बोलते हैं। सुखराम ने पिछले 20-25 सालों में जिस तरह से पार्टियां बदली है उससे यही लगता है कि कुर्सी के लिये वो कभी भी कहीं भी पलटी मार सकते हैं।

 

हमारे देश में बहुत से नेता ऐसे हैं जो जिनके आगे मौकापरस्त शब्द भी बौना हो जाता है। पंडित सुखराम भी ऐसे ही नेता हैं जहां से फायदा दिखा उस पार्टी में हो लिये। एक खास बात और बीजेपी और कांग्रेस भी पंडित सुखराम को हाथों हाथ लेती हैं और फट से टिकट थमा दिया जाता है।

 

देखना होगा पंडित सुखराम के बेटे और आश्रय शर्मा के पिता इस चुनाव में किसका साथ देते हैं। मतलब जिस बीजेपी सरकार में वो मंत्री हैं उसका साथ या फिर पिता और बेटे का साथ। खैर ये भी 2-4 दिन में पता चल जायेगा लेकिन इसको लेकर मंडी के लोगों में चर्चा जरूर है कि अनिल शर्मा वास्तव में धर्मसंकट में फंस गये हैं।

 

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