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पुलवामा हमले के बाद और भी अलर्ट रहने की जरूरत- देखिये वो कैसे

पुलवामा आतंकी हमले के पीछे आतंकी संगठन का बहुत बड़ा होमवर्क लग रहा है। इस आत्मघाती हमले को एक स्थानीय कश्मीरी ने अंजाम दिया है। अगर किसी स्थानीय कश्मीरी ने अंजाम दिया है तो आप समझो कि ऐसे और भी बहुत से युवा हो सकते हैं जो इन आतंकी संगठनों के चंगुल में फंसे होंगे। एक युवा जब इस तरह के हमले को अंजाम दे सकता है तो सोचिये कि किस तरह से उसका ब्रेनवॉश किया गया होगा। इससे यहीं लगता है कि कश्मीर के पढ़े लिखे युवा आतंकी संगठनों के साथ जुड़े हुये हो सकते हैं।

 

हमले के तुरंत बाद उस आतंकी का वीडियो वायरल होता है और उस वीडियो में देखो कि भारत के प्रति कितनी नफरत दिखती है। वो देश पर पहले किये गये हमलों का भी जिक्र कर रहा है। वीडियो को देखकर लगता है कि हमले से ठीक पहले उसको फिल्माया गया होगा और हमले के तुरंत बाद रिलीज़ कर दिया गया। उस वीडियो में वो कह रहा है कि जब ये वीडियो रिलीज़ होगा तब वो जन्नत में होगा। बताया जा रहा है कि आदिल अहमद पिछले साल ही आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के साथ जुड़ा था।

 

पाकिस्तान मे मौजूद आतंकी संगठनों का ये नया प्लान है। उन्होनें स्थानीय कश्मीरियों का जेहाद के नाम पर ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया है। इससे पहले पाकिस्तान के घुसपैठिए ही यहां आकर आत्मघाती हमले को अंजाम देते थे। अब जेहाद के नाम पर यहां के युवाओं को वो अपने साथ जोड़ रहे हैं और सबसे खतरनाक बात ये है कि यहां के युवा उनके साथ जुड़ रहे हैं। उनके मन में भारत के प्रति नफरत का बीज बोया जा रहा है। ये खतरनाक स्थिति है और अब देश की सुरक्षा एजेंसियों को इस पर ध्यान देना होगा। 

 

कश्मीरी युवाओं के आतंकी संगठनों के प्रति आकर्षित होने के पीछे सोशल मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ है। कश्मीर के युवाओं में भी सोशल मीडिया का आकर्षण दिनों-दिन बढ़ा है। यहां के युवा भी अपनी रोजाना जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा फ़ेसबुक, ट्विटर या फिर इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म पर गुज़ारते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के युवाओं में हथियारों के प्रति लगाव बड़ा है, वो हथियारों को शौक के लिये इस्तेमाल करते हैं और आखिर में आतंकी संगठनों के झांसे में आ जाते हैं। आतंकी संगठन भी युवाओं को फंसाने के लिये सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं।

 

कुल मिलाकर जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर सुरक्षो बलों को सावधान रहने की जरूरत है। यहां इंटेलिजेंस पर पकड़ और मजबूत करनी होगी। यहां सोशल मीडिया पर सख्ती से नजर रखने की जरूरत है। सभी पार्टियों को इस पर राजनीति करने के बजाये देश के सैनिकों और उनके परिवार वालों की ओर देखना चाहिये। देश के सैनिकों का क्या कसूर है, बिना युद्द के इतनी तादाद में सैनिकों का शहीद होना वाक्य ही बहुत गंभीर विषय है। जम्मू कश्मीर के जो लोकर राजनेता हैं जो कहीं ना कहीं इन आतंकियों के प्रति नरम हैं उन पर भी सख्ती से पेश आना होगा। यहां के युवाओं की समय-समय पर काउंसलिंग होनी जरूरी है ताकि वो गुमराह होने से बच सकें।

 

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