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बजट में किसान-मजदूर को खुश करने की कोशिश, क्या किसान की नाराजगी होगी दूर

 

पिछले चुनाव में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार ने वो वादा तो पूरा नहीं किया वहीं अब सरकार ने चुनाव को नजदीक आते देख किसानों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है। देखना होगा कि क्या किसान बजट में दी गई इस राहत से खुश होगा या फिर उसकी नाराजगी बरकरार रहेगी। पीयूष गोयल ने बजट पेश करते हुए दावा किया कि हमारी सरकार में किसानों की आमदनी दो गुनी हुई। सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि इस अंतरिम बजट में किसानों के अलावा मजदूरों के लिये क्या क्या घोषनाएं की गई हैं।

 

 

अंतरिम बजट पेश करते हुये बतौर वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दो हैक्टेयर यानि कि करीब पांच एकड़ तक के किसानों को उनकी आमदनी में सपोर्ट करने के लिए 6000 रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से देने का निर्णय हमने किया है। ‘‘6000 रुपए प्रति वर्ष की रकम सीधे किसानों के खाते में जाएगी। यह रकम दो-दो हजार रुपए की तीन बराबर किश्तों में दी जाएगी। योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। करीब 12 करोड़ किसानों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।“ ये योजना 1 दिसंबर 2018 से ही लागू होगी। दो हजार रुपए की पहली किस्त जल्द ही किसानों की सूचियां बनाकर उनके खातों में डाली जाएगी। इस कार्यक्रम का अनुमानित खर्च 75 हजार करोड़ रुपए होगा जो केंद्र सरकार वहन करेगी। किसान योजना से करीब 12 करोड़ किसान परिवारों को फायदा। इसके अलावा सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 फीसदी ब्याज छूट की घोषणा।

 

 

श्रमिकों की न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये तक की गई। कम आमदनी वाले श्रमिकों को गारंटीड पेंशन देगी सरकार, 100 रुपये प्रति महीने के अंशदान पर 60 साल की आयु के बाद 3000 रुपये प्रति माह पेंशन की व्यवस्था। पीएम श्रमयोगी मानधन योजना की घोषणा, 15 हजार रुपये तक कमाने वाले 10 करोड़ श्रमिकों को योजना का लाभ। श्रमिक की मौत पर अब 2.5 लाख रुपये की बजाय 6 लाख रुपये मुआवाजा। ग्रैच्युअटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये की गई। श्रमिकों का बोनस बढ़ाकर 7 हजार रुपये, 21 हजार रुपये तक के वेतन वालों को मिलेगा बोनस।

 

 

 

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