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ओमप्रकाश चौटाला का दुष्यंत और दिग्विजय पर बड़ा आरोप, क्या बदलेगा वोटर का मूड

इनेलो सुप्रीमों ओमप्रकाश चौटाला ने बड़ा बयान दिया है। चौटाला ने अपने पोतों को गद्दार कहा है। चौटाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जेजेपी के साथ मिलकर एक साजिश के तहत ही उनकी पैरोल रद्द करवाई गई है। एक निजी चैनल की ओर से जब उनसे पूछा गया कि ऐसा प्रचार किया जा रहा है कि आपने खुद फरलो रद्द करवाई है क्योंकि आप पोतों के खिलाफ प्रचार नहीं करना चाहते। इसके जवाब में चौटाला ने कहा कि वो गद्दारों और देशद्रोहियों का साथ नहीं देते। चौटाला ने कहा कि वो स्वस्थ नहीं हैं फिर भी उन्हें अस्पताल से निकालकर जेल भेजा जा रहा है।

चौटाला ने साफ कहा कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार उमेद रेढू हैं और वो उनके साथ हैं। चौटाला काफी नाराज और गुस्से में दिखाई दे रहे थे। दरअसल पार्टी की ओर से कहा जा रहा था कि चौटाला 22 जनवरी तक पैरोल पर बाहर आयेंगे और वो जींद में इनेलो उम्मीदवार के लिये प्रचार करेंगे। पार्टी का कहना है कि 16 जनवरी को उनको पैरोल की मंजूरी मिल गई थी। बाद में उसमें नई कंडीशन जोड़ दी कि वो पार्टी के लिये प्रचार नहीं कर सकते या राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकते और आज उनको वापिस जेल भेज दिया गया कि वो पैरोल पर नहीं जा सकते।

इनेलो ने आरोप लगाया है कि आज ही दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी  आप ने जेजपी को समर्थन का एलान किया और दूसरी और इनेलो सुप्रीमों की पैरोल रद्द करवा दी। इनेलो ने इसके लिये दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला पर दोष लगाया है।

इनेलो को ये भरोसा था कि बड़े चौटाला बाहर आकर पार्टी के लिये प्रचार करेंगे और पोतों की पोल खोलेंगे तो इनेलो का वोट बैंक जो जेजेपी के साथ गया है वो वापस आ जायेगा। फिलहाल बड़े चौटाला अब प्रचार तो नहीं कर पायेंगे। हां पोतों के बारे में वो मीडिया में जरूर बोल गये कि पोतों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है। चौटाला ने कहा कि पार्टी में परिवार नहीं व्यवहार चलता है।

जींद चुनाव को लेकर लग रहा था कि अगर चौटाला बाहर आये और उन्होनें प्रचार किया तो ये टर्निंंग प्वाईंट हो सकता है। चौटाला अगर बाहर आकर किसी जनसभा में अपने पोतों के बारे में वो बोल देते जो उन्होनें आज मीडिया के सामने बोला है तो उसका बहुत बड़ा असर हो सकता था।

कहावत है कि राजनीति में सब जायज है। खैर ये तो अंदर की बात है कि क्या वाक्य ही पोतों ने दादा की पैरोल को रद्द करवाया है या नहीं। हां अगर वाक्य में ही ऐसा हुआ है तो ये कमाल की राजनीति है या कहें कि चाणक्य नीति है। हालांकि दुष्यंत चौटाला ऐसी किसी साजिश से इनकार कर रहे हैं।

 

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